Chhattisgarh Raipur

आईईडी का डिटेक्शन संभव नहीं, वरना…

रायपुर । सुकमा हमले में शहीद हुए 9 सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत में सीएम डॉक्टर रमन सिंह ने कहा है कि आईईडी का डिटेक्शन मौजूदा टेक्नोलॉजी में संभव नहीं हो पा रहा है, वरना हम इस लड़ाई को 6 महीने में समेट लेंगे। साल 2017 के मार्च में भी सड़क निर्माण के दौरान एक ऐसा ही आईईडी ब्लास्ट हुआ था और यहां भी ऐसी ही घटना हुई है।

अंदरूनी इलाकों की जो भौगोलिक स्थिति है वहां आईईडी बड़ी समस्या है। नक्सलियों का अंत समय आ चुका है इसलिए वह बौखलाए हुए हैं सरकार और जवानों का मनोबल कहीं से कमजोर नहीं हुआ है बल्कि नक्सलवाद को छत्तीसगढ़ में खत्म करने की प्रतिज्ञा के साथ लड़ाई जारी रहेगी। इससे ठीक पहले सीआरपीएफ के शहीद जवानों को आधिकारिक तौर पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सलामी दी गई और उनके पार्थिव शरीर अब जवानों के गृह ग्राम भेजे गए हैं।

जानिए क्या होती है आईईडी: आईईडी का फुल फॉर्म होता है इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस, असल में यह एक बम ही होता है। इस डिवाइस को आमतौर पर नक्सली अपने हाथों से तैयार करते हैं इसमें कई अलग-अलग तरीकों से डेटोनेटर को एक्टिवेट करने का सिस्टम तैयार किया जाता है।

नक्सलियों से लडऩे बस्तर में अब आएगी सेना? अभी ऐसा कोई निर्णय नहीं: अहीर

रायपुर। सुकमा में हुए इस साल के सबसे बड़े नक्सल अटैक के बाद से इस बात पर फिर से बहस शुरू हो गई है कि क्या नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए भारतीय सेना का इस्तेमाल करना होगा? सुकमा के नक्सल हमले में सीआरपीएफ के 9 जवान शहीद हो गए नक्सलियों ने रास्ते में आईईडी लगा रखी थी और जब सीआरपीएफ के जवानों का एंटी लैंडमाइन व्हीकल इसके ऊपर से गुजरा तो ब्लास्ट का शिकार हो गया।

घटना के बाद छत्तीसगढ़ पहुंचे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने मीडिया से बातचीत में कहा, की आईईडी की दिक्कत से निपटने के लिए काम किया जा रहा है जो आधुनिक तकनीक हो सकती है उस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या अब सेना का इस्तेमाल किया जाना चाहिए ? गृह राज्य मंत्री ने कहा कि ऐसे विचार आते रहते हैं लेकिन सरकार ने फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

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