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इस बार क्या कहते हैं राज्यों के समीकरण, 2014 में तो ‘मोदी लहर’ ने झोली भर कर दी थी सीटें

नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली  ने साफ कर दिया है कि जल्द लोकसभा चुनाव की संभावना नहीं है. लेकिन इससे पहले कयास लगाना शुरू हो गया था कि शायद बीजेपी जल्द चुनाव का फैसला ले सकती है. इसकी एक वजह यह भी थी की पीएम मोदी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की वकालत कर रहे थे और इसी साल आखिरी में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने थे. हालांकि विपक्षी दल और एनडीए में शामिल नीतीश कुमार इसके पक्ष में नहीं थे. दरअसल विपक्षी दलों के विरोध के पीछे एक वजह हाल ही में आए कुछ चुनावी सर्वे भी हो सकते हैं. इनमें पीएम मोदी की लोकप्रियता में कोई खास कमी नहीं आंकी गई है. विपक्षी दलों को लगता था कि हो सकता है कि बीजेपी पीएम मोदी को आगे कर जिन राज्यों में बीजेपी की सरकारें वहां पर सत्ता विरोधी लहर को कम कर ले जाने में कामयाब हो जाए. इन राज्यों में राजस्थान, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, और छत्तीसगढ़, हैं. ये वही राज्य हैं जहां बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की थी. इसमें हरियाणा और असम ऐसे राज्य है जहां पर लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव हुए थे और यहां भी बीजेपी ने बहुमत हासिल किया था. अगर मौजूदा हालत की बात करें तो बीजेपी और बाकी दलों के लिए समीकरण कुछ बदल से नजर आते हैं. ॉ

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