Chhattisgarh Mahasamund

एक मई से स्कूलों में लटके हैं ताले

बच्चों को नहीं हो रहा है मध्यान्ह भोजन नसीब

सरायपाली। सूखाग्रस्त जिला घोषित होने के कारण पूरे जिले के सभी ब्लॉकों के स्कूलों को शिक्षा सत्र बीत जाने के बाद गर्मी की छुट्टियों में मध्यान्ह भोजन के लिए स्कूल खोलने का फरमान शासन द्वारा जारी किया गया है. लेकिन अधिकांश स्कूलों में इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। कई स्कूलों को शिक्षकों द्वारा खोला ही नहीं जा रहा है, जिससे बच्चों को मध्यान्ह भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है। क्षेत्र के कुछ स्कूलों का जब निरीक्षण किया गया तो शासन द्वारा जारी किए गए निर्देश केवल कागज तक ही सीमित होने की बात सामने आई. शिक्षकों एवं रसोइयों द्वारा शासन के नियम का पालन करते नहीं देखा गया। शहर से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम नवरंगपुर शासकीय प्राथमिक शाला भवन में विगत 1 मई से ताला लटका हुआ है. पालकों ने चर्चा में बताया कि स्कूल ही नहीं खुल रहा है तो बच्चे मध्यान्ह भोजन के लिए स्कूल कैसे जाएंगे. यहाँ तक कि 30 अप्रैल के बाद से स्कूल में कोई भी शिक्षक नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे बच्चे भी शिक्षकों के नहीं आने एवं ताला नहीं खुलने के कारण स्कूल आने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

इसी तरह शासकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शाला पाटसेन्द्री में भी मध्यान्ह भोजन का बुरा हाल है. यहां भी प्राथमिक शाला विगत 1 मई से नहीं खुलने की बात पालको द्वारा कही गई. वहीं एक ही परिसर में स्थित उच्च प्राथमिक शाला में आज निरीक्षण के दौरान शिक्षक तो पाए गए, लेकिन बच्चे नदारद मिले।शिक्षकों से पूछने पर बताया कि विगत 2 तारीख से मध्यान्ह भोजन नहीं बन रहा है. बच्चे स्कूल जरूर आते हैं लेकिन मध्यान्ह भोजन खाने के लिए नहीं बल्कि अंकसूची लेने के लिए आते हैं. जब उन्हें मध्यान्ह भोजन कक्ष के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने रसोईया द्वारा घर से खाना बनाकर लाने की बात कही।

मध्यान्ह भोजन में बिस्किट, चॉकलेट देकर बच्चों को दे दी जाती है छुट्टी

इसी तरह ग्राम पंचायत गिरसा के आश्रित ग्राम डूंमरपाली में भी शासकीय प्राथमिक स्कूल में ताले लटके मिले. वहां के ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे जरूर आते हैं लेकिन शिक्षक नदारद रहते हैं. उन्होंने बताया की मध्यान्ह भोजन बच्चों को नहीं दिया जा रहा है, बल्कि उसके स्थान पर बच्चों को बिस्किट चॉकलेट आदि देकर छुट्टी दे दी जाती है. आज मौके पर स्कूल बंद पाया गया. जब रसोईया के घर जाकर उनसे पूछा गया कि कितने बच्चे आज आए थे और कितने लोगों को मध्यान्ह भोजन खिलाया गया तो उन्होंने 10 बच्चों को भोजन खिलाये जाने की बात कही।
वहीं प्रधानपाठक से स्कूल बंद होने का कारण पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वे किसी निजी कारण से छुट्टी पर थे, इसलिए आज स्कूल बंद था. जब उनसे मध्यान्ह भोजन की उपस्थिति पंजी दिखाने की बात कही गई तो वे स्कूल के ही एक अन्य शिक्षक द्वारा रजिस्टर ले जाने की बात कहते हुए टाल मटोल करने लगे. इस तरह तीनों स्कूलों में ताला लटका हुआ पाया गया।

स्कूल बंद पाया गया तो होगी कार्रवाई- डीईओ

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी डी एल कुर्रे से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि सभी स्कूलों को गर्मी के दिनों में मध्यान्ह भोजन के लिए खोलना अनिवार्य है.अगर कोई स्कूल मध्यान्ह भोजन के लिए नहीं खुलता है या मध्यान्ह भोजन खिलाते नहीं पाया जाता है तो जांच उपरांत नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *