Chhattisgarh Raipur

कमेटी ने सुनी शिक्षाकर्मी संघों की मांग

रायपुर। मुख्यमंत्री रमन सिंह के निर्देश पर बनी चीफ सिकरेट्री की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी से आज पहली बार शिक्षाकर्मियों का संघ मुखातिब हुई। तय वक्त से करीब 20 मिनट की देरी से शुरू हुई इस बैठक में 14 संघों के 11 पदाधिकारी मौजूद थे। लेकिन इस बैठक में सिर्फ आज 6 प्रांताध्यक्ष को ही बोलने का मौका मिला। चीफ सिकरेट्री को आज आवश्यक काम से जाना था, लिहाजा बाकी के 8 प्रांताध्यक्षों को बाद में बुलाने के आश्वासन के साथ बैठक खत्म कर दिया गया। लिहाजा शिक्षाकर्मियों के साथ कमेटी की ये बैठक औचित्यविहिन और आधी-अधूरी रही। बैठक में 5 सक्रिय शिक्षाकर्मी संघ के अलावे उन 7 शिक्षाकर्मियों के संघ को बुलाया गया है, जो हड़ताल से दूर रहे थे। वहीं हाल ही बने शिक्षाकर्मी महासंघ को भी बैठक में बुलावा भेजा गया है। साथ ही प्रधानपाठक संघ को भी बैठक में बुलाया गया है। पहले दौर की बैठक करीब सवा पांज बजे बजे खत्म हुई। करीब 40 मिनट में सिर्फ 6 प्रांताध्यक्ष ही अपनी बात कह पाये हैं..। दूसरे दौर की बैठक शुरू थोड़े देर में शुरू होगी। शिक्षाकर्मियों के संघ को जिस तरह से बुलावा मिला है, उससे एक बात तो साफ है कि कमेटी के पास बाद में ये शिकायत ना आये कि उनके संघ की बात नहीं सुनी गयी। बैठक के दौरान जो जानकारी सामने आयी है, उसके मुताबिक बैठक में शिक्षाकर्मियों के प्रांताध्यक्ष सिर्फ अपने नियत वक्त पर ही बोलने की अनुमति है.. दूसरे की टाइमिंग में बोलने या टोकाटोकी की इजाजत किसी भी शिक्षाकर्मी प्रांताध्यक्ष को नहीं है। बार-बार एक ही मुद्दे को दोहराने से भी रोका गया है।
बैठक के दौरान कमेटी के अधिकारी बहुत ज्यादा तो नहीं बोल रहे, लेकिन तेवर साफ है कि सिर्फ शिक्षाकर्मी वहां सिर्फ अपनी मांगों को लेकर बोलेंज्अधिकारियों पर मांगों को लेकर दवाब ना बनायें। हालांकि कमेटी ने पहले ही ये तय कर लिया था, कि उन्हें बैठक के दौरान शिक्षाकर्मियों के प्रांताध्यक्ष के साथ कैसी चर्चा करनी है..लिहाजा मंत्रालय में प्रांताध्यक्ष के अलावे अन्य शिक्षाकर्मी नेताओं को भी मंत्रालय के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गयी है। बैठक के पहले भी चीफ सिकरेट्री के कमरे बाहर जमघट लगाने से रोका-टोका जा रहा था।
बैठक में ठोस नतीजा नहीं निकलने पर मूल्यांकन बहिष्कार का निर्णय : शिक्षाकर्मी शुक्रवार को मंत्रालय में हुई हाई पावर कमिटी कि बैठक में कोई नतीजा नहीं निकलने से नाराज है। संघ का कहना है कि सरकार का रवैय्या समझ नहीं आ रहा है इसलिए संघ पेपरों कि जांच नहीं करेगा, हम उसका बहिष्कार करेंगे। इस सम्बन्ध में सभी जिला मुख्यालयों में 26 मार्च को ज्ञापन सौंपा जाएगा और 3 अप्रैल से होने वाले मूल्यांकन में संघ का कोई भी सदस्य भाग नहीं लेगा।शिक्षाकर्मियों के महानदी भवन में अधिकारियों के साथ शुक्रवार को हुई प्रथम दौर की बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हाईपवार कमेटी ने पहले दूसरे दौर की वार्ता की बात कहीं, लेकिन बाद में उन्होंने बात करने से इंकार कर दिया। इसकी वजह से आधे से ज्यादा संघ अपनी कमेटी के सामने नहीं रख पाए। शिक्षाकर्मी संघ ने प्रमुखता से संविलियन का मुद्दा रखा है। शाम को सवा चार बजे शुरु हुई मीटिंग करीब एक घंटे तक चली जिसमें शालेय शिक्षाकर्मी संघ ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग संविलियन ही है और इससे कम वे लेेने का तैयार नहीं है। संघ ने बैठक में कहा कि संवर्ग के समस्त कर्मचारियों का स्कूल शिक्षा विभाग के मूल पदों व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक, व्यायाम शिक्षक आदि पर समान सेवा, श्रेणी, स्तर, वेतनमान व समस्त सुविधाओं सहित संविलियन किया जाना तथा उन्हें क्रमोन्नित एवं पदोन्नति का अवसर सुनिश्चि किया जाना ही संवर्ग की समस्त समस्याओं का समग्र व स्थायी समाधान है। बैठक में संघ के वीरेन्द्र दुबे, जितेन्द्र शर्मा, धर्मेश शर्मा, चन्द्रशेखर तिवारी, विवेक शर्मा, घनश्याम पटेल और शिक्षाकर्मी मौजूद थे।

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