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कर्नाटक में सरकार बनाने के फॉर्मूले पर माथापच्ची

बैंगलूर। कर्नाटक चुनाव परिणाम आने के बाद सूबे में सरकार बनाने की माथापच्ची शुरू हो गई है। कांग्रेस-जेडीएस सरकार बनाने का दावा पहले पेश कर चुकी है तो येदियुरप्पा द्वारा राज्यपाल से सात दिन का समय मांगा गया है। ऐसे में सूबे की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बीजेपी को सत्ता फिसलने का डर सता रहा है। इसी चुनावी गणित को साधने की खातिर बीजेपी संसदीय दल के नेता नई दिल्ली में बैठक कर रहे हैं।  भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा दफ्तर से अपने कार्यकर्ताओं के संबोधित किया। इस दौरान वह काफी अक्रामक दिखाई दिए। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता ने काग्रेस मुक्त कर दिया है। हमें बहुमत नहीं मिला लेकिन हमारी जीत हुई है। 104 सीटें लेकर हम सरकार बनाने के बहुत नजदीक हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पैसे और फर्जी वोटर के जरिए चुनाव जीतना चाहती थी। लेकिन कर्नाटक की जनता ने उन्हें नकार दिया, और कांग्रेस की कोशिश नाकाम हो गई। राज्य में भारतीय जनता पार्टी 40 से 104 पर पहुंच गई है। उन्होंने पीएम मोदी के कामों की भी सराहनाह की।

इस बैठक में अमित शाह समेत प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, अनंत कुमार, थावर चंद गहलोत, शिवराज सिंह चौहान, जेपी नड्डा और रामलाल बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। इस बैठक का उद्देश्य पार्टी के लिए कर्नाटक में फंसी सत्ता की चाबी ढूंढना है।  खबर के मुताबिक नतीजे साफ होने तक कांग्रेस और जेडीएस एक साथ आने का मन बना चुके हैं। सूत्रों की माने तो कांग्रेस कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप बीजेपी को रोकने का प्रयास कर रही है। वहीं बीजेपी की कोशिश है कि जेडीएस के लिए कांग्रेस से ज्यादा फायदेमंद साबित हो इस समीकरण को उलटा जाए।

चुनावी नतीजे साफ होने के बाद बीजेपी सूबे में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 222 में से बीजेपी को 104 सीटें हाथ लगी हैं। वहीं कांग्रेस को अपने पिछले सीटों में भारी नुकसान हुआ है और वो केवल 78 सीटें ही जीत पाई है। जबकी जेडीएस 38 सीटें जीतकर बड़े उलटफेर की संभावना पैदा कर रही है। वहीं अन्य के खाते में 2 सीटें हैं। देखना यही है कि बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए बीजेपी संसदीय दल की बैठक से कौन सा फॉर्मूला निकाल पाती है। वहीं इन सबके बीच बीजेपी के पास एक आखिरी दांव बचा है, जिसे चलकर बीजेपी कांग्रेस-जेडीएस का खेल बिगाड़ सकती है। कांग्रेस ने कर्नाटक में 78 सीटों पर जीत दर्ज की है और उसने बीजेपी को रोकने के लिए जेडीएस को समर्थन करने का ऐलान कर दिया है, इतना ही नहीं कांग्रेस ने बीजेपी को रोकने के लिए मुख्यमंत्री पद भी छोड़ दिया है। कर्नाटक में पार्टी का एक ही मकसद है, कैसे भी बीजेपी को सत्ता से दूर रखा जाए।

कांग्रेस का प्लान (बी)

कांग्रेस पार्टी ने गोवा, मणिपुर और मेघालय चुनावों में बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन सरकार नहीं बना पाई क्योंकि इससे पहले बीजेपी ने अपने प्लान ‘क्चÓ पर काम करना शुरू कर दिया था और कांग्रेस बहुमत की आस में सत्ता से दूर हो गई। तीनों राज्यों में बीजेपी ने सहयोगियों की मदद से सरकार बना ली। कांग्रेस पार्टी कर्नाटक चुनाव में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी, इसलिए उसने अपने सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत को मतगणना से एक दिन पहले बेंगलुरू भेज दिया था क्योंकि कांग्रेस इस बार पहले से ही प्लान ‘क्चÓ पर काम कर रही थी और उनकी ये रणनीति काम भी कर गई। जैसे ही बीजेपी बहुमत से दूर हुई तो कांग्रेस ने जेडीएस के साथ चल रही बातचीत को अंतिम रूप दे दिया। कांग्रेस के इस दांव से बीजेपी राज्य में बैकफुट पर आ गई है।

सत्ता की चाबी जेडीएस के पास

वहीं चुनाव से पहले जेडीएस राज्य में अपने दम पर सरकार बनाने का दावा कर रही थी, लेकिन राजनीतिज्ञों का मानना था कि जेडीएस कर्नाटक में किंगमेकर की भूमिका में होगी क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों को यह पता था कि अगर परिणाम त्रिशंकु हुआ तो जेडीएस के बिना सरकार बनाना संभव नहीं है। इसी के मद्देनजर बीजेपी के नेता चुनाव प्रचार के दौरान जेडीएस पर सीधा हमला करने से बचते रहे। भाजपा ने प्रचार के दौरान यह संकेत भी दिया कि उसे जेडीएस से गठबंधन पर कोई आपत्ति नहीं। लेकिन कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद राज्य में सत्ता की चाबी जेडीएस के हाथों में जाती दिख रही है। बीजेपी और कांग्रेस बड़ी पार्टी होकर भी उसके सामने छोटी नजर आ रही हैं। यहीं नहीं कांग्रेस ने तो जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान भी कर दिया है। इन सबके बीच बीएस येदियुरप्पा ने बीजेपी की ओर से राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। लेकिन आंकड़े उनके पक्ष में नहीं हैं।

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