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कश्यप बंधुओं के बस्तर में बाप की लाश के लिए सात हजार की रिश्वत!

जगदलपुर। भाजपा सांसद दिनेश कश्यप और राज्य सरकार के मंत्री केदार कश्यप के बस्तर में एक बेटी को अपने बाप की लाश लेने के लिए पुलिस को चंदा करके सात हजार रुपए रिश्वत देनी पड़ी। आदिवासी समाज के एक नेता के विरोध तथा पुलिस के खिलाफ जगदलपुर बंद करने की चेतावनी के बाद बस्तर एसपी शेख आरिफ हुसैन के निर्देश पर आखिरकार पुलिस को रिश्वत की रकम वापस करनी पड़ी।
घटना दरभा ब्लॉक के सीतापुर पंचायत के खेरगेरासपारा की है, जहां का कोयाराम नाग नामक एक आदिवासी बुधवार से घर से गायब था। परिजन उसकी तलाश कर रहे थे कि सोमवार की उसकी लाश धूमगुड़ा नाले में मिली। जानकारी मिलते ही परिजन वहां पहुंचे। सूचना पाकर पुलिस भी वहां पहुंची और कुछ घण्टों की मशक्कत के बाद लाश को नाले से निकाला गया। लाश निकालने के बाद पुलिस ने उसे अपने कब्जे में रखा। सोमवार की दोपहर से लेकर रात तक परिजन लाश मांगते रहे परंतु पुलिस ने लाश देने से इनकार कर दिया। मृतक की बेटी का आरोप है कि बाप की लाश के बदले पुलिसवाले उससे दस हजार रुपए रिश्वत मांग रहे थे।
मृतक की बेटी ने इसकी जानकारी कोया समाज के नेताओं को दी। मौके पर पहुंचे कोया समाज के नेता शंकर सिंह ठाकुर ने बताया कि मृतक की बेटी के आरोप के आधार पर उन्होंने इसकी शिकायत एसपी बस्तर शेख आरिफ हुसैन से की, लेकिन एसपी का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक था। वे मानने को तैयार नहीं थे कि लाश देने के लिे दरभा थाने के पुलिस वाले रिश्वत मांग रहे हैं। शंकर सिंह ठाकुर ने बताया कि पुलिस अफसरों के इस व्यवहार से बस्तर में आदिवासी समाज में आक्रोश बढ़ गया और विरोध में जगदलपुर बंद की तैयारी की जाने लगी।
चंदा करके दी रिश्वत
शंकर सिंह ठाकुर ने बताया कि जगदलपुर आकर रेजा का काम करने वाले मृतक की बेटी के आग्रह पर आसपास के लोगों ने सात हजार रुपए एकत्र किया और थाने के मुंशी को यह राशि दी, जिसके बाद कोयाराम नाग की लाश परिजनों को सौंपी गई। मृतक की एक विवाहित बेटी के अलावा दो छोटे-छोटे बेटे भी हैं।
पुलिस ने नहीं कराया पोस्टमार्टम
परिजनों को लाश सौंपने के बाद पुलिस वहां से लौट गई। मृतक का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया। दरभा पुलिस का कहना है कि परिजनों को अगर पोस्टमार्टम कराना है तो वे लाश को लेकर सरकारी अस्पताल चले जाएं परंतु मृतक के परिजनों की आर्थिक दशा इतनी खराब है कि उनके पास लाश को लेकर अस्पताल जाने का भी पैसा नहीं है। इसलिए उन्होंने पोस्टमार्टम कराए बिना ही मंगलवार को मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया।
वापस की रिश्वत की रकम
कल रात मृतक के परिजनों से सात हजार रुपए रिश्वत लेने वाले पुलिसवाले आज सुबह उनके घर पहुंचे और पूरी सात हजार रुपए की राशि को वापस कर दिया। इससे यह प्रमाणित होता है कि लाश के बदले पुलिसवालों से मृतक के परिजनों से रिश्वत ली थी। कांग्रेस व आदिवासी नेता शंकर सिंह ठाकुर ने बताया कि पुलिस का मानवता के खिलाफ चेहरा देखने को मिला है। पुलिस को इस बात की जानकारी मिल गई थी कि आदिवासी समाज आक्रोशित हो चुका है और आंदोलन की तैयारी कर रही है लिहाजा वह बैकफुट पर आ गई। उन्होंने मृतक का पोस्टमार्टम नहीं कराने पर पुलिस की भूमिका पर संदेह जताया है।

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