Chhattisgarh

क्या भूपेश की किस्मत में नहीं है सीएम हाउस की चौखट लांघना?

रायपुर। वक्त ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए क्या तय कर रखा है यह तो या उपरवाला जानता है या फिर उनकी पार्टी के आलाकमान, लेकिन पिछले 14 साल में पहली बार सीएम हाउस की चौखट लांघने जा रहे भूपेश की किस्मत ने दगा दे दिया है।

रअसल भूपेश को आज शाम सीएम हाउस जाना था, क्योंकि उनके मांगे जाने पर सीएम डॉ रमन सिंह ने उन्हें मुलाकात के लिए आज शाम का वक्त दिया था, जगह मुकर्रर हुई थी सीएम हाउस। इस तरह पिछले 14 साल में पहली बार आज भूपेश सीएम हाउस में कदम रखते। अब इसे संयोग कहें, दुर्योग कहें या भूपेश की किस्मत कहा जाए। सीएम के साथ मुलाकात का समय तो वही रहा लेकिन जगह बदल गई। अब यह मुलाकात मंत्रालय में होने जा रही है।

राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद “अगर” कांग्रेस की सरकार बनती है तो निश्चित तौर पर पीसीसी अध्यक्ष होने के नाते भूपेश की दावेदारी सीएम पद के लिए स्वाभाविक होगी। ऐसे में आज के घटनाक्रम को देखें तो यह सवाल उठता है कि जब 14 साल बाद सीएम हाउस की चौखट लांघने से उन्हें उनकी किस्मत ने रोक दिया तो क्या उनकी किस्मत में सीएम हाउस में रहना लिखा है?

वैसे भी कांग्रेस का ही एक धड़ा आए दिन यह कहते रहता है कि जल्द ही बदलाव की बयार बहेगी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदल दिए जाएंगे, हालांकि कांग्रेस में किसी पद पर किसी के होने का कोई भरोसा नहीं रहता कि वह कब तक रहेगा। सब कुछ आलाकमान की मर्जी पर निर्भर रहता है। संभव है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर जब भूपेश सीएम पद की शपथ लेने नई अचकन की फिटिंग चेक कर रहे हों, उसी वक्त अचानक आलाकमान का फरमान आ जाए कि सीएम भूपेश नहीं कोई और बनेगा। यह तस्वीर भी छत्तीसगढ़ पहले देख चुका है, जब राज्य नया-नया बना ही था  वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री (स्व) विद्याचरण शुक्ल और उनके समर्थक पूरे तौर पर निश्चिंत थे कि सीएम शुक्ल ही बन रहे हैं, लेकिन अचानक आलाकमान का फरमान लेकर पूर्व सांसद अजीत जोगी अवतरित हो गए थे और अब वे छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री कहलाते हैं।

बहरहाल! आज कई कांग्रेसी यही कहते फिर रहे हैं, कि भूपेश की किस्मत में सीएम हाउस की चौखट लांघना नहीं लिखा है, आज का ही उदाहरण देख लिया जाए।

 

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