Chhattisgarh Raipur

छत्तीसगढ़ को मिला बाबाजी का ठुल्लू

मनीष के. मिश्रा
रायपुर। ग्यारह संसदीय क्षेत्रों में से दस में जीत का तोहफा देने वाले प्रदेश के ढाई करोड़ छत्तीसगढिय़ों को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने आज फिर से छला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडलीय कुनबे में तेरह नए मंत्रियों को शामिल किया, लेकिन उनके मापदण्ड में छत्तीसगढ़ का एक भी भाजपा सांसद खरा नहीं उतर पाया। वैसे प्रधानमंत्री मोदी ने जिन तेरह सांसदों को अपना मंत्री बनाया है, उनकी योग्यता और प्रतिभा के सामने छत्तीसगढ़ का एक भी सांसद बराबर का नहीं है लेकिन बात राज्यों के महत्व की है। छत्तीसगढ़ में भाजपा के तेरह सांसद (दस लोकसभा व तीन राज्य सभा) हैं, लेकिन भारत सरकार में शामिल होने के उनके रास्ते फिलहाल बंद हो चुके हैं।
जैसी आशंका थी, वैसा ही हुआ। वैसे मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार की खबरों के बीच यह संभावना जताई जा रही थी कि पिछड़ा वर्ग से रमेश बैस की कैबिनेट में वापसी हो सकती है। वे सात बार से लोकसभा में रायपुर का प्रतिधिनित्व कर रहे हैं। अटल विहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में वे मंत्री बी रहे हैं। एक लिहाज से वे छत्तीसगढ़ भाजपा में सबसे अनुभवी राजनेता हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी व पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अपेक्षाओं पर वे खरे नहीं उतर पाए। राजनीति के जानकारों के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सौदान सिंह उन्हें केंद्र में भेजने के पक्षधर नहीं थे क्योंकि रमेश बैस की छवि राज्य सरकार विरोधी बताई जाती है। रमेश बैस के बाद महासमुंद सांसद चंदूलाल साहू को लेकर भी छत्तीसगढ़ को उम्मीद थी क्योंकि वे भी पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि होने के अलावा लोकसभा के पिछले चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को शिकस्त देकर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा था. परंतु वे भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।
पिछड़ा वर्ग से धोखा
प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 48 प्रतिशत है और इसके चार सांसद (रमेश बैस, चंदूलाल साहू, लखनलाल साहू और बंसीलाल महतो) हैं। तीन रोज पहले ही पार्टी के प्रदेश प्रभारी अनिल जैन से छत्तीसगढ़ आकर ऐलान किया है कि अगले साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा के चुनाव से पहले भाजपा कांग्रेस को पिछड़ा वर्ग के मुद्दे पर घेरेगी। इसके लिए पार्टी ने इमोशनल दांव खेलने का फैसला करते हुए तय किया है कि भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाताओं को बताएंगे कि भारत सरकार के समक्ष प्रस्तावित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में कांग्रेस गतिरोध पैदा कर रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इस मुद्दे से पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के बीच कांग्रेस की विरोधी छवि बनेगी, जिसका फायदा विधानसभा के अगले चुनाव में भाजपा को मिल जाएगा।
दांव पड़ा उलटा
तीन रोज पहले खेला गया दांव अब भाजपा को उलटा पड़ता हुआ दिख रहा है क्योंकि मोदी सरकार के विस्तार में जिस तरह छत्तीसगढ़ और खासकर पिछड़ा वर्ग की अनदेखी की गई है, उससे इस समुदाय में भाजपा के प्रति आक्रोश बढ़ता दिख रहा है। कांग्रेस इसे छत्तीसगढ़ में बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।
अमित सर की क्लास में सभी फेल
दरअसल मोदी सरकार के विस्तार में छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व न मिलने की बात तो तीन महीने पहले उसी दिन तय हो गई थी, जब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह तीन दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ आए और उन्होंने सांसदों की क्लास लेकर उनका बौध्दिक परीक्षण किया। अमित शाह के सामने छत्तीसगढ़ का कोई भी सांसद मोदी सरकार की योजनाओं के बारे में नहीं बता पाया। भारत सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए सांसदों के प्रयास को भी अमित शाह ने अपर्याप्त माना। पार्टी अध्यक्ष ने उसी दिन तय कर लिया था कि मोदी सरकार में शामिल किए जाने की क्षमता कम से कम छत्तीसगढ़ के वर्तमान सांसदों में तो नहीं है।
निष्क्रिय सांसद
छत्तीसगढ़ में भाजपा के तेरह सांसद हैं। इनमें लोकसभा में रमेश बैस, चंदूलाल साहू, बंशीलाल महतो, कमला पाटले, कमलभान सिंह मरावी, अभिषेक सिंह, विक्रम उसेंडी, दिनेश कश्यप, विष्णुदेव साय व लखनलाल साहू है। राज्यसभा सदस्यों में रणविजय सिंह, भूषणलाल जांगड़े तथा रामविचार नेताम शामिल हैं। प्रदेश भाजपा की गतिविदियों से लेकर संसद तक इन सांसदों की आवाज कभी भी सुनाई नहीं देती है। किसी भी सांसद के हिस्से में इन साढ़े तीन सालों में उल्लेखनीय काम दिखाई नहीं देता है। लोकसभा और राज्यसभा में जनहित के मुद्दों को उठाने में भी सभी सांसद कमजोर साबित हुए हैं। शायद यही वजह है कि लोकसभा के अगले चुनाव में पार्टी नेतृत्व ने इन सभी सांसदों को डेंजर जोन में रखा है।
सिर्फ एक मंत्री
मोदी सरकार में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि के रूप में केवल विष्णुदेव साय हैं, जिन्हें राज्यमंत्री का दर्जा हासिल है। मंत्री बनने के साढ़े तीन साल बाद भी उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय कम नहीं किया है।

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