Chhattisgarh Politics

छत्तीसगढ़ में भाजपा की स्थिति ‘अधजल गगरी छलकत जाय’ जैसी

छत्तीसगढ़ भाजपा की स्थिति इन दिनों ‘अधजल गगरी छलकत जाय’ जैसी हो गई है। वजह, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह समझ नहीं पड़ रहा है कि प्रदेश के कार्यकर्ता और मतदाताओं की मंशा क्या है। एक तरफ तीन पंचवर्षीय पूरा करने की ओर अग्रसर हैं, तो यह लग रहा है कि सरकार के प्रति भरोसा कायम होगा, दूसरी तरफ दिमागी फितूर यह भी है कि सरकार के खिलाफ बीते दो कार्यकाल की अपेक्षा इस मर्तबे कहीं ज्यादा विरोध के स्वर उभरे हैं। इस वजह से प्रदेश भाजपा के शीर्ष पदों पर आसीन लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। अभी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सरकारी अभियान लोक सुराज के बहाने प्रदेश में भाजपा की स्थिति का मुल्यांकन करने में जुटे हुए हैं। उनका अभियान खत्म होते ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने अपना दौरा कार्यक्रम तय कर लिया है। कुल मिलाकर यह डेमेज कंट्रोल करने की रणनीति है। पर सवाल यह है कि इन शीर्षस्थ भाजपाईयों की यह कोशिश कितनी रंग लाएगी।
एक पखवाड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कौशिक का प्रदेश दौरा 25 दिनों का होगा। वे 21 मई से 15 जून तक प्रदेश के सभी जिलों का दौरा करेंगे। इन 25 दिनों में 15 दिन कार्यकर्ता सम्मेलन के लिए होगा, जिसे समयदानी का नाम दिया गया है। इस दौरान वे जिला स्तरीय, मंडल स्तरीय और बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं के साथ वक्त साझा करेंगे। बता दें कि भाजपा के कार्यकर्ताओं में काफी ज्यादा नाराजगी है। इसका नजारा कई मर्तबे देखने में भी आया है। अनुशासन के दबाव की वजह से जो लोग मुखर नहीं हो पाए, वे खामोशी से विरोध कर रहे हैं। इस बात से मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष दोनों अवगत हैं।
भाजपाध्यक्ष जून में आएंगे प्रवास पर
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जून में प्रदेश दौरा करने की मंशा जाहिर की है। पहली बार है जब भाजपाध्यक्ष शाह दो-चार घंटों के लिए नहीं, बल्कि तीन दिन बिताने के लिए छत्तीसगढ़ आने वाले हैं। इस प्रवास के दौरान वे बूथ स्तर पर जाकर वास्तविकता का जायजा लेंगे। शाह के प्रवास के दौरान कार्यकर्ताओं का विरोध खुलकर सामने न आए, इस बात की चिंता मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष दोनों को सता रही है, जिसकी वजह से प्रदेशाध्यक्ष कौशिक ने प्रदेश व्यापी दौरे की तैयारी की है।
गुस्से में कार्यकर्ता-मतदाता दोनों
प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन के नेतागण लाख इस तथ्य को नकार लें कि उनको लेकर विरोध की स्थिति नहीं है, पर सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता। हकीकत यही है कि भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता न केवल संगठन से बल्कि सरकार के रवैये से काफी ज्यादा खफा हैं। भाजपा प्रवक्ता रटी-रटाई जबान से केवल इंकार करना जानते हैं। यही आलम प्रदेश के मतदाताओं का है। उन्हें संगठन की गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं, पर सरकार के खिलाफ आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में चौथी पारी का दावा कर चुके शीर्षस्थ नेताओं की नींद उड़ी हुई है।

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