Chhattisgarh Raipur

दंगल में उतरने से पहले ही सरकार से चित हुए छत्तीसगढ़ के पहलवान!

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने खिलाडिय़ों के लिए नई खेल नीति तो बना ली है, मगर कुश्ती के खिलाडी अव्यवस्थाओं के कारण चारों खाने चित हो गए हैं। प्रदेश के पहलवान अव्यवस्था के आलम में खेल को जिंदा रखने प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इन खिलाडिय़ों को सुविधाएं तो दूर बेहतर मार्ग-दर्शन तक नसीब नहीं हो रहा है। कुश्ती के राष्ट्रीय खिलाड़ी रह गोलू भत्रे ने बताया कि रायपुर में 125 साल पुराना अखाड़ा है। इस अखाड़े के साथ साथ बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ में कुश्ती के खिलाडिय़ों, पहलवानों ने राज्य में ही नहीं बल्कि देश में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होनें बताया कि अव्यवस्था और सुविधाओं के अभाव के चलते प्रदेश में कुश्ती विलुप्त खेल की श्रेणी तक पहुंच गया है।
अखाड़े के सदस्य राजेश यदु ने कहा कि इस अखाड़े का बेहतरीन रिकॉर्ड रहा है। यहां पृथ्वीराज कपूर और प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद तक आ चुके हैं। सरकार से अब इस अखाड़े को संचालित करने के लिए कोई मदद नहीं मिलती। कुछ दानदाताओं और पहलवानों के चंदे से यह संचालित किया जा रहा है।
खेल विभाग के सचिव आर प्रसन्ना का कहना है कि जिन खेल संघों को केंद्र सरकार, राज्य सरकार और ओलंपिक एसोशिएशन से मान्यता प्रदान हैं उन्हें ही सरकारी सहायता दी जाती है। कुश्ती के कई राष्ट्रीय खिलाड़ी आज भी बेरोजगार घूम रहे हैं। छत्तीसगढ़ का इतिहास रहा है कि कभी यहां के राजमहलों में दंगल का आयोजन होता था, लेकिन अब पहलवान और पहलवानी दोनों ही बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं।

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