Jagdalpur

नक्सलियों ने की पूर्व माओवादी आंदो उर्फ हांदो मरकाम की हत्या

जगदलपुर : पूर्व माओवादी आंदो उर्फ हांदो मरकाम की हत्या कर दी गई हैं। उन्हें धारदार हथियार से नक्सलियों ने मार दिया। साल 2015 में खून खराबे से दूर रहने के लिये हांदो मरकाम ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था। आंदो मरकाम ग्राम सांगवेल के कोलेंग पारा के रहने वाले थे। ये गांव मारडूम थाना क्षेत्र में आता हैं।

पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में कुछ जमीदारों को मारकाट के किसानों को उनका हक दिलाने के नाम पर इस हिंसक आंदोलन की शुरुआत हुई थीं।

हिंसा के रास्ते कुछ भी हासिल नही किया जा सकता हैं। नक्सलवाद के जनक रहें नेताओं ने आत्महत्या कर ली, दारू पीकर मर गए या फिर पुलिस के हाथों मारे गए।

आंध्रप्रदेश के कोंडापल्ली सितारमैय्या ने लोगों को ख्वाब दिखाया कि बन्दूक की नली से सत्ता निकलेगी। और इन्हीं खोखली विचारों के साथ बस्तर में घुसकर अमन पसंद आदिवासियों की जिंदगी में आग लगा दिया। इस आग में आम आदिवासी जल रहा है, झुलस रहा हैं।

नक्सलियों के बहकावे में आकर हथियार उठाने वाले ग्रामीण अब शान्ति की तलाश में हैं। वे खून खराबे की जिंदगी से तौबा कर रहें है। लेकिन खुद को आदिवासियों का कथित हितैषी बताने वाले माओवादी ही उनकी जान के दुश्मन बन गये हैं। “जो हमारा नहीं वो गद्दार हैं” की तर्ज़ पर ग्रामीणों को पीट पीट कर मारा जा रहा हैं। उनकी गला रेतकर हत्या करने का सिलसिला जारी हैं।

हमारे सुरक्षा बल के जवान इन हत्यारों से जोरदार तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन सिर्फ इतने भर से काम नहीं चलने वाला हैं। नक्सलियों और उनके समर्थकों की पहचान करके उन्हें सबक सिखाया जाना जरूरी हो गया हैं। समाज की जिम्मेदारी हैं कि वे सामने आये और इन हिंसक घटनाओं का जोरदार ढंग से विरोध करें।

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