Chhattisgarh Politics Raipur

पप्पू पर छापे के पीछे भाजपा की एक नेत्री की भूमिका!

– डॉ. रमन को फंसाने के लिए लिखी गई स्क्रिप्ट

 – पार्टी के बड़े नेताओं की भूमिका से भी इनकार नहीं
– चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ में चेहरा बदलने की तैयारी

  रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बेहद करीबी माने जाने वाले प्रदेश के लिकर किंग बलदेव सिंह (पप्पू) भाटिया के ठिकानों पर आयकर विभाग की दबिश ने शासन-प्रशासन को हैरान कर दिया जा रहा है पर जानकारों ने संकेत दिए हैं कि इस कार्रवाई के पीछे भाजपा की एक बड़ी नेत्री की अहम भूमिका है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के छत्तीसगढ़ प्रवास से पहले मुख्यमंत्री के करीबी शराब कारोबारी पर की गई आयकर कार्रवाई की स्क्रिप्ट दिल्ली में बैठे भाजपा के कुछ दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में लिखी गई है। इन नेताओं को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का राजनीतिक विरोधी माना जाता है और लगातार यह कोशिश की जा रही है कि अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन कर दिया जाए क्योंकि प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी है और एण्टी इनकम्बैन्सी के चलते प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने का भाजपा का सपना पूरा नहीं हो जाएगा।
बलदेव सिंह भाटिया को प्रदेश में बेहद प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता रहा है। शराब के कारोबार के अलावा उन्हें छत्तीसगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन और छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ में भी अहम पद दिए गए थे। डीपीएस स्कूल के अलावा उनका बॉटलिंग प्लांट भी छत्तीसगढ़ में ही संचालित होता है। हालांकि इसके प्रमाण नहीं पर पर आमजनों में यह चर्चा है कि बलदेव सिंह भाटिया के मुख्यमंत्री व उनके परिवार के साथ व्यावसायिक रिश्ते हैं। नोटबंदी के दौरान शासन-प्रशासन के कई नुमाइंदों के पुराने नोट खपाने में भाटिया ने महात्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
भाजपा नेत्री की चर्चा
दरअसल अमित शाह के अगले महीने होने वाले छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों का जायदा लेने पिछले दिनों उनके कोर ग्रुप के सदस्य अरविंद मेनन छत्तीसगढ़ आए थे और तब यह चर्चा थी कि वे इस बात की भी पड़ताल करेंगे कि लोकसभा के पिछले चुनाव में दुर्ग संसदीय क्षेत्र से भाजपा का पराजय का सामना क्यों करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में लोकसभा की 11 सीटें हैं, जिसमें दस पर भाजपा का कब्जा है। केवल दुर्ग संसदीय क्षेत्र से उसे हार झेलना पड़ा था। वहां से भाजपा प्रत्याशी सरोज पाण्डेय थीं, जिनके बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि वे डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक विरोधी हैं और छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं। तीन साल बाद अमित शाह की टीम के सदस्य अरविंद मेनन ने अगर दुर्ग संसदीय क्षेत्र में भाजपा की हार का विषय सामने लाया है, तो निश्चित रूप से उसके राजनीतिक मायने हैं।
मेनन के लौटते ही छापा
छत्तीसगढ़ आकर अरविंद मेनन को दुर्ग संसदीय क्षेत्र में भाजपा की पराजय के क्या कारण मिले, यह तो पता नहीं चल पाया परंतु उनके लौटते ही आयकर अफसरों की जम्बो टीम ने बलदेव सिंह भाटिया के ठिकानों को घेर लिया, जिन्हें मुख्यमंत्री का बेहद करीबी माना जाता है। भाटिया पर कार्रवाई का सीधा मतलब है कि केंद्र की भाजपा सरकार के निर्देश पर काम करने वाले आयकर अफसरों को पूरी टिप्स देकर छत्तीसगढ़ भेजा गया है ताकि वे भाटिया के साथ मुख्यमंत्री के सभी प्रकार के रिश्तों के प्रमाण एकत्र कर सकें।
प्रभावशाली है नेत्री
भाजपा की इस नेत्री के प्रभावशाली होने का यही प्रमाण है कि लोकसभा चुनाव हारने के बाद उसे अमित शाह ने अपनी टीम में महामंत्री बना लिया और कई बड़े राज्यों का प्रभारी बना दिया। छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिए रणीति बनाने वाले सौदान सिंह के वे बेहद करीब हैं और जैसी कि खबरें लगातार मिल रही हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के तीसरे कार्यकाल के कामकाज से सौदान सिंह खुश नहीं हैं और लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन कर दिया जाए। भाजपा की आंतरिक राजनीति की जानकारी रखने वालों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुख्यमंत्री से खुश नहीं हैं परंतु गृहमंत्री राजनाथ सिंह समेत भाजपा के अंदर काम करने वाली ठाकुर लॉबी डॉ. रमन सिंह को हटाने के पक्ष में नहीं है, लिहाजा नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा टल रहा है।
                                                                                           इसलिए बनाई रणनीति
डॉ. रमन सिंह को हटाने की राजनीतिक कोशिशों के विफल होने के कारण अब उन्हें हटाने के लिए यह नीति बनाई गई है और इसके लिए मुख्यमंत्री बनने की लालसा रखने वाली तेज-तर्रार नेत्री को आगे किया गया है। खबर है कि दिल्ली में डॉ. रमन सिंह विरोधी नेताओं की देखरेख में उसने यह स्क्रिप्ट लिखवाई और उसके बाद मुख्यमंत्री के करीबी बलदेव सिंह भाटिया पर आयकर की कार्रवाई कराकर यह साबित करने की कोशिश की गई कि मुख्यमंत्री के रिश्ते ऐसे लोगों से हैं, जो काला धन रखते हैं और कालाधन रखने वालों के प्रधानमंत्री मोदी घोर विरोधी हैं।
शराब बेचने के फैसले का भी विरोध
वैसे भी भाजपा का एक बड़ा तबका राज्य सरकार के शराब बेचे जाने के फैसले का विरोधी है। कैबिनेट व संगठन की बैठकों में पार्टी की कई वरिष्ठ नेता इस पर आपत्ति जता चुके हैं। सभी का कहना है कि भाजपा ने अपने घोषणापत्र में शराबबंदी की बात की थी। वह तो नहीं किया गया उलटे सरकार खुद शराब बेचने लगी है। इसका प्रदेशभर में भारी विरोध किया जा रहा है और इसका खामियाजा भाजपा को अगले चुनाव में भुगतना पड़ेगा। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी राज्य सरकार के इस फैसले से नाराज है और अब यह फीडबैक दिया गया है कि पप्पू भाटिया को व्यावसायिक फायदा पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने खुद शराब दुकानों का संचालन शुरू किया है। उसके बॉटलिंग प्लांट में शराब के सभी बड़े ब्राण्डों की बॉटलिंग होती है। सरकार के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में केवल पप्पू भाटिया ही शराब के कारोबार में बच गए हैं।


                                                                              अमित शाह पर सबकी नजर
बिसात पर डॉ. रमन सिंह के खिलाफ मोहरे बिछा दिए गए हैं, जिस पर अमित शाह के आने के बाद चाल चली जाएगी। देखने वाली बात यह है कि तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ में रहने के बाद अमित शाह किस नतीजे पर पहुंचेंगे। पहली बार छत्तीसगढ़ पहुंच रहे अमित शाह के पास छत्तीसगढ़ में हो चुके भ्रष्टाचार के बड़े मामले हैं, जिनके बारे में वे पूरी तहकीकात करेंगे। मंत्रियों व संगठन के नेताओं से चर्चा करेंगे और मुख्यमंत्री से चर्चा करने के बाद किसी नतीजे तक पहुंचेंगे। अमित शाह भले मिशन 19 के लिए निकले हैं परंतु प्राथमिकता में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव है। हालांकि वे छत्तीसगढ़ में आकर मुख्यमंत्री व राज्य सरकार के कामकाज की तारीफ ही करेंगे परंतु अपना फैसला तो वे दिल्ली जाकर ही सुनाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *