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प्राइवेट सेक्टर में भी 20 लाख तक टैक्स फ्री ग्रैच्यूटी बिल मंजूर

नई दिल्ली। लोकसभा ने गुरुवार को पेमेंट ऑफ ग्रैच्यूटी अमेंडमेंट बिल 2017 को मंजूरी दे दी। इसमें प्राइवेट सेक्टर और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्वायत्त संगठनों के कर्मचारियों के ग्रैच्यूटी की अधिकतम सीमा में वृद्धि होगी, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएस (पेंशन) नियमावली के अधीन शामिल नहीं हैं।
आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग और पीएनबी धोखाधड़ी मामले समेत अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के भारी हंगामे के बीच सदन ने इस विधेयक को ध्वनि मत से मंजूरी प्रदान कर दी। इसके तहत केंद्र सरकार में निरंतर सेवा में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर मैटरनिटी लीव की अवधि (26 सप्ताह) को अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है। लोकसभा में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने पेमेंट ऑफ ग्रैच्यूटी अमेंडमेंट बिल 2017 को पारित करने के लिए पेश किया।

पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी बिल में संशोधन

अभी 10 या इससे अधिक लोगों को नियोजित करने वाले निकायों के लिए पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी बिल 1972 लागू है, जिसके तहत कारखानों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेल कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में लगे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने 5 वर्ष की नियमित सेवा प्रदान की है। अधिनियम की धारा 4 के अधीन ग्रैच्यूटी की अधिकतम सीमा वर्ष 2010 में 10 लाख रुपये रखी गई थी। सातवें वेतन आयोग के कार्यान्वयन के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रैच्यूटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया था।

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