Chhattisgarh Jagdalpur

बच्चों का निवाला छीनकर अफसरों को रिश्वत!

-एक आदिवासी हॉस्टल की ग्राउण्ड रिपोर्ट
– आदिवासी बच्चों के हिस्से का चावल बेचकर अफसरों को दी जाती है घूस
– तीन महीने में एक बार दिया जाता है पांच रुपए का तेल
– बच्चों की गुहार…निकालिए इस नरक से
– भाजपा सरकार के तेरह साल में बदहाल बस्तर

करमजीत कौर
जगदलपुर।
 जिस बस्तर में विकास की गंगा बहाने का दावा भाजपा की प्रदेश सरकार बीते तेरह सालों से कर रही है वहां की दुर्दशा की एक बानगी बस्तर विकासखण्ड में एनएच पर ही स्थित एक आदिवासी छात्रावास में देखने को मिली, जहां आदिवासी बच्चों के हिस्से के चावल को बेचकर वहां के अधिकारी अपने आला अफसरों को रिश्वत देते हैं। शर्मनाक पहलू यह है कि वे इस बात को स्वीकार भी करते हैं और कहते हैं कि यह परम्परा सालों से चली आ रही है जिसको आगे बढ़ाया जा रहा है। मोतीलाल नेहरू बालक छात्रावास के हालात इतने खराब हैं कि वहां के बच्चे अब गुहार लगाने लगे हैं कि उन्हें इस नरक से बाहर निकाला जाए। दिलचस्प बात है कि जिन नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जवांगा में अरबों रुपए खर्च करके एजुकेशन हब बनाया गया है, उसी बस्तर के बच्चों को खाने के लिए लाले पड़ चुके हैं।
मोतीलाल नेहरू बालक छात्रावास पहुंचकर वहां की स्थितियों को देखने और बच्चों से बात करने के बाद जो तथ्य सामने आए वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। यह स्थिति कम से कम उस सरकार के लिए बेहद शर्मनाक है जो तेरह सालों से प्रदेश में काम कर रही है। बस्तर के अधिकतर आदिवासी छात्रावासों व पोटा कैबिनों की लगभग एक समान स्थिति है।
असुरक्षित छात्रावास 
नेशनल हाइवे पर स्थित इस छात्रावास में सरहदी दीवार नहीं है। छात्रावास में 117 आदिवासी बच्चे रहते हैं, जो सरहदी दीवार के बिना हमेशा असुरक्षित रहते हैं। छात्रावास के आसपास मवेशियों का जमावड़ा रहता है और उनकी गंदगी को साफ करने का जिम्मा इन्हीं बच्चों का होता है।

 आधा पेट नाश्ता और स्वादहीन खाना

 

छात्रावासी बच्चों ने बताया कि उन्हें नाश्ते में रोज सिर्फ पोहा ही नसीब होता है और वह भी मात्रा में बहुत थोडा़ होता है जिससे उनका पेट भी नहीं भरता। हर दिन पानी जैसी दाल और आलू-लौकी की सब्जी खानी पड़ती है। एक सौ साठ सीटों वाले इस छात्रावास की रसोई में सड़े हुए कद्दू और आलू मिले। थोड़ी सी सब्जी और पानी जैसी दाल थी। बच्चों को पापड़ नहीं मिलता है और अचार भी एक्सपायरी डेट का मिलता है। यहां तक कि हास्टल में एक्सपायरी डेट की दवाइयां भी छात्रों द्वारा बाहर फेंकी गई।
हर हफ्ते दो सौ रुपए सब्जी 
छात्रावास के 117 बच्चों के लिए हर सप्ताह सिर्फ दो सौ रुपए की सब्जियां खरीदी जाती हैं। इसमें अधिकतर समय लौकी और आलू होते हैं। दोनों वक्त खाने में यही परोसा जाता है। कभी- कभी बैंगन की सब्जी भी मिल जाती है।
तीन महीने में पांच रुपए का तेल
बच्चों ने बताया कि सिर पर तेल लगाने के लिए उन्हें पांच रुपए की तेल की शीशी और एक साबुन दिया जाता है। यह तेल और साबुन से तीन महीने गुजारने होते हैं। यदि बीच में यह खत्म हो जाए तो उन्हें अपने पैसे से खरीदना पड़ता है।
खेल सामग्री भी नहीं
बच्च्चों ने बताया कि वहां खेलने के लिए कोई खेल सामग्री नहीं है जिसकी वजह से वे स्कूल से लौटने के बाद वे बोर हो जाते हैं। कई बार वे इस बारे में अधाीक्षक से कह चुके हैं लेकिन वे सुनते ही नहीं हैं।
रात में होती है शराबखोरी
बस्तर का यह छात्रावास शाम होते ही शराब का अड्डा बन जाता है। बच्चों के सामने ही अधीक्षक और चपरासी मिलकर रसोई में शराब का सेवन •रते है। चपरासी तो शराब में लगभग हर वक्त धुत्त रहता है और बच्चों के साथ गाली-गलौच •रता है। चपरासी से जब बात की गई तब भी वह शाम को शराब का सेवन किए हुए था।
हर हफ्ते बेचते हैं चावल

छात्रावास अधीक्षक खेमराज सिंह तोमर


जिन बच्चों नाम से सरकार लाखों का अनुदान भेजती है उनको भूखे पेट रखकर उनके हिस्से का चावल बेचा जा रहा है। बच्चों ने बताया कि प्रत्येक गुरुवार को छात्रावास के पिछले हिस्से से पांच-छह बोरी चावल बेचा जाता है। अधीक्षक बच्चों से कहते हैं कि बेचे हुए चावल के पैसों से खर्चा पूरा करना पड़ता है। इस मामले में छात्रावास अधीक्षक खेमराज सिंह तोमर का कहना है कि जो पहले से चला आ रहा है, बस उसी को आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले भी सभी चावल बेचते थे इसलिए वे भी चावल बेचते हैं। छात्रावास अधीक्षक ने यह भी कहा कि वे हर महीने सहायक आयुक्त पैसे देते हैं। यहां सभी लोग मैनेज हैं। कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सभी की मिलीभगत है। मीडियावाले भी क्या कर लेंगे।
हमारी उम्मीद मत तोडऩा
छात्रावास के बच्चों का कहना है कि अधिकारी आते है और अधीक्षक के रूम से ही पैसे लेकर चले जाते हैं। कई बार अपनी व्यथा उन्हें बताने का प्रयास किया गया लेकिन किसी ने नहीं सुनी। हमें आप लोगों से बड़ी उम्मीदें है इसलिए हमने अपनी व्यथा आपको सुनाईहै। हमारा विश्वास मत तोडऩा। हमारे लिए सारी सुविधाएं मुहैया करवा दो और अधीक्षक बदलवा दो।

जांच के आदेश
निश्चित रूप से छात्रावासों में कई तरह की दिक्कतें हैं लेकिन मोतीलाल नेहरू बालक छात्रावास के बारे में मिली शिकायतें गंभीर हैं। बस्तर एसडीएम से कहा जा रहा है कि पूरे मामले की जांच करें और रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
धनंजय देवांगन
कलक्टर, बस्तर

 

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