Bilaspur Chhattisgarh

बिलासपुर जिला सहकारी बैंक में बिना टेंडर 18 करोड़ की खरीदी

–  सीईओ अभिषेक तिवारी के कार्यकाल में हुई खरीदी

– ताक पर रख दिए गए नियम-कायदे

बिलासपुर। जिला सहकारी बैंक बिलासपुर में सीईओ अभिषेक तिवारी के कार्यकाल में स्टेशनरी खरीदी व  प्रिंटिंग बिना टेंडर के 18 करोड का खरीदी उजागर हुआ है, यह बात जाँच रिपोर्ट में सामने आई है| इस मामले के एक जाँच अधिकारी द्वारा बताया गया कि देवेन्द्र पाण्डेय के कार्यकाल साल 2010-11 से 2014-15 तक के जाँच के दौरान कुछ बिल वर्तमान में भुगतान से सामने आई है। किन्तु वर्तमान कार्यकाल का जाँच करने का आदेश नही है। इसलिए वर्तमान जाँच को बंद कर दिया गया। जाँच अधिकारी के मुखिया स्वयं बैंक के संचालन के लिए जवाबदार होने से जाँच रोक दी गई है, जिसका कारण अभिषेक ति वारी के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालना है|

अभिषेक तिवारी द्वारा किए जा रहे भष्टाचार की परत अब खुलने लगी हैं, जबकि तिवारी अपने राजनैतिक रसूख के कारण अपने पद पर जमे हुए है। सीईओ अभिषेक तिवारी के कार्यकाल में स्टेशनरी खरीदी व प्रिंटिंग बिना टेंडर के 18 करोड की खरीदी जाँच रिपोर्ट में सामने आई है| 2015 से अब तक एक बार भी स्टेशनरी खरीदी के लिए टेंडर नही बुलाया गया। सहकारी संघ, सहकारी प्रिटिंग प्रेस तथा प्राइवेट फर्मो से लगातार करोडो रुपये की खरीदी की जा रही है। जिला सहकारी बैंक बिलासपुर क 54 ब्रांच एवं 298 समितियों तथा 470 धान खरीदी केन्द्रों के लिए 2015 से अब तक दो सालो में 18 करोड़ की स्टेशनरी खरीदी तथा प्रिंटिंग बिना टेंडर के कराई जा चुकी है। इन फर्मों से मौखिक आदेश के आधार पर स्टेशनरी सामान का आर्डर दिया जाता है जिसमे क्लिप फाइल, लेश फाइल,कार्बन, लेस, कोरा कागज़, कम्पुटर पेपर,पेन, पेंसिल, रबड़, गम, पेड़, पेड़इंक, कंप्यूटर,प्रिंटर,यूपीस, जनरेटर के विभिन्न पार्ट्स शामिल है। वही प्रिंटिंग आर्डर भी मौखिक दिया जाता है। प्रिंटिंग आर्डर में कागज़ की मोटाई, साइज़ तथा वजन की गुणवत्ता का जिक्र होता है किन्तु इन बातो का कोई उल्लेख नही है।

बता दें कि बैंक के पासबुक जमा स्लिप, विथडॉवल फार्म,  विभिन्न रजिस्टर, समिति के लिए देनिक बही, स्टाक पंजी, सदस्यता पंजी, परमिट बुक, पासबुक, चालान बुक, भी बिना गुणवत्ता के प्रिंटिंग कर खरीदी किया जा रहा है। कंप्यूटर पेपर जहाँ 150 रुपये में मिलता है उसको 205 रुपये में, लेस 40 रुपये में मिलने वाला 98 में, कार्बन 80 में मिलने वाला में 210, में हर महीने लाखो रुपये की खरीदी सेकड़ो की मात्रा में कर बैंक को चुना लगाते हुए खुला भष्टाचार किया जा रहा है।धान खरीदी केन्द्रों के लिए अवाक रजिस्टर, टोकन रजिस्टर, तोल रागिस्टर, खरीदी पंजी, पावती पंजी, धान परिवहन पंजी, तथा विभिन्न बुक के करोडो रुपये की खरीदी श्री अभिषेक तिवारी द्वारा पसंदीदा फर्मो खरीदी कर मोती कमीशन वसूला जा रहा है। जहाँ बैंक पासबुक अन्य जिला सहकारी बैंक में 3 रुपये प्रति नग में छपता है वही पास बुक बिलासपुर बैंक में अभिषेक तिवारी द्वारा 9 रुपये नग में छपाया जा रहा है। खुलकर किसानो के पैसे की लूट हो रही है।

सामान खरीदी के नियमो को रखा ताक पर

सहकारिता (छतीसगढ़ शासन) क्रय अधिनियम अनुसार जहाँ एक से अधिक सहकारी समिति है वहां टेंडर के माध्यम निम्न दर भरे गए समिति स्टेशनरी सामान तथा प्रिंटिंग करना होता है। वह भी पहले नियमानुसार क्रय आदेश जारी होता है क्रय आदेश में स्पष्ट उल्लेख होता है कि कौन कौन सा सामान किस किस क्वालिटी का खरीदी किया जाता है। क्रय आदेश जारी होने बाद फार्म द्वारा सामान की सप्लाई की जाती है। जिसका सत्यापन वरिष्ट अधिकारी द्वारा किया जाता है सामान के सत्यापन उपरांत बिल का भुगतान होता है। वही किस किस को सामान दिया वह भी पंजी में अंकित कर प्राप्तकर्ता से पावती ली जाती है।अभी हाल में ही जिला सहकारी बैंक दुर्ग के सीईओ गुप्ता को सहकारी प्रिंटिंग प्रेस से 15 प्रतिशत कमीशन मागने पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने रगे हाथ पकड़कर जेल भेज दिया।

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