Chhattisgarh dhamtari

मां-बाप की मौत, अनाथ हुए तीन बच्चे

धमतरी। छह साल पहले तीन बच्चों के सिर से प्रकृति ने पिता का साया छिन लिया, सर्पदंश से पिता की अकाल मौत हो गई। इसके बाद मेहनत मजदूरी कर मां घर की बागडोर सम्हाल रही थी, लेकिन तीन बच्चों का भरण-पोषण करते वह ऐसी बीमार पड़ी कि उसकी भी सांसे थम गई। अब मां-बाप इस दुनिया में नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों ने दरियादिली दिखाई और अनाथ हो चुके बच्चों के लिए खाने-पीने का इंतेजाम तो कर दिया है, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। ऐसे में अनाथ बच्चों को बेहतर शिक्षा-दीक्षा दिलाने और उनके उज्जवल भविष्य के लिए महिला जनपद सदस्य तीनों बच्चों को लिए कलेक्टोरेट पहुंची थी। जिन्होंने प्रशासन से बच्चों को आवासीय विद्यालय में पढ़ाई कराने की मांग रखी है।
नगरी ब्लाक के गौरव ग्राम बेलरगांव के रहने वाले संतोष नेताम 15 वर्ष, संतोषी 14 वर्ष, सुरेन्द्र नेताम 12 वर्ष ने चर्चा करते हुए बताया कि 6 साल पहले उनके पिता तिहारू राम नेताम की सर्पदंश के चलते मौत हो गई। पिता की मौत के बाद उनकी मां शारदा देवी ही मेहनत-मजदूरी कर तीनों बच्चों का भरण पोषण करती थी। इस बीच मां का हाथ बंटाने और परिवार की गाड़ी हॉकने के लिए संतोष ने आठवीं तक पढ़ाई के बाद शिक्षा से नाता तोड़ दिया। पढ़ाई छुटने के बाद कम उम्र में ही संतोष मेहतन मजदूरी करने लगा है। मां-बाप की मौत के बाद अब उसके कंधे पर छोटे-भाई बहन की जिम्मेदारी आ गई है। जिसे सम्हालने के लिए वह अभी मजबूत नहीं हुआ है। जनपद सदस्य श्रीमती हेमलता कैलाश प्रजापति ने बताया कि 2 अप्रैल को शारदा देवी की मौत के बाद ग्रामीणों ने अंतिम क्रियाक्रम और मृत्यु भोज के लिए आपस में चंदा किया था। जिसमें से बची चांवल-दाल से फिलहाल तीनों अनाथ बच्चे अपना गुजारा कर रहे है। जिन्हें किसी मसीहा का इंतजार है, जो उनकी इस दयनीय स्थिति में मद्द कर सके। फिलहाल इन बच्चों के आवेदन को कलेक्टर डॉ. सीआर प्रसन्ना ने पूरी संजीदगी के साथ लिया है और आदिम जाति कल्याण विभाग के अफसरों को बच्चों को आवासीय विद्यालय में रखकर शिक्षा दिलाने के निर्देश दिये है।
मकान भी हो चुका है जर्जर
बताया गया है कि तीनों बच्चों का आशियाना भी बेहद जर्जर स्थिति में है, जो बारिश के दिनों में कभी भी ढह सकता है। ऐसे में इन बच्चों को पक्का मकान दिलाने के लिए भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए आवेदन किया गया है।

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