Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                                रायपुर, 21 जुलाई 17

(एक पाठक की राय पर)

छत्तीसगढिय़ा नौजवान एक बार फिर संकट में हैं। हजारों की संख्या में छत्तीसगढिय़ा नौजवानों के सामने रोजी-रोजी का संकठ खड़ा हो गया है। इनमें से अधिकतर अपनी नौकरी से हाथ धो चुके हैं और बड़ी संख्या में छत्तीसगढिय़ा नौजवान नौकरी गंवाने की कगार पर हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार की औद्योगिक नीति कागजों पर बिलकुल स्पष्ट है। इसमें छत्तीसगढ़ में कल-कारखाने लगाने वालों को स्थानीय नौजवानों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी देने की अनिवार्यता है। खासकर उत्तर छत्तीसगढ़ में बड़े-बड़े कारखाने हैं। कोयले की खदानें हैं, पॉवर प्लांट्स है, जिसमें छत्तीसगढ़ के नौजवान बड़ी संख्या में अपनी योग्यता के अनुसार नौकरी कर रहे हैं। जैसा कि हर उद्योग में होता है…समय-समय पर छंटनी की जाती है। पहले नोटबंदी और अब जीएसटी के कारण इन उद्योगों में छंटनी चल रही है और यह दुखद पहलू है कि छंटनी के निशाने पर हर बार छत्तीसगढिय़ा रहते हैं। कोरबा के एक पॉवर प्लांट में काम करने वाले एक छत्तीसगढिय़ा नौजवान ने चोखेलाल से इस संवेदनशील मुद्दे को सरकार के समक्ष रखने का आग्रह किया है। इस नौजवान को भरोसा है कि चोखेलाल के माध्यम से सरकार उत्तर छत्तीसगढ़ के विभिन्न उद्योगों में नौकरी करने वाले हजारों नौजवानों की आवाज जरूर सुनेगी और उन्हें राहत दिलाएगी।
इस नौजवान ने चोखेलाल को बताया है कि उत्तर छत्तीसगढ़ के अधिकर पॉवर प्लाण्ट्स में इन दिनों छंटनी की जा रही है और इससे सर्वाधिक प्रभावित छत्तीसगढ़ के कामगार नौजवान हैं। आर्थिक मंदी का वास्ता देकर उन्हें नौकरी से हटाया जा रहा है। हजारों नौजवान फिलहाल नोटिस पीरियड में हैं। इस बात का अफसोस नहीं है कि छत्तीसगढिय़ा नौजवानों को नौकरी से निकाला जा रहा है, दुख तो इस बात का है कि नौकरी से निकाले जाने वाले केवल छत्तीसगढिय़ा हैं। बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से आकर नौकरी करने वालों को हटाने के बारे में प्रबंधन सोच भी नहीं रहा है। कोरबा के इस नौजवान की आशंका है कि उत्तर छत्तीसगढ़ में उत्पादन कर रहे अधिकतर पॉवर प्लांट्स अपने उद्योगों को छत्तीसगढ़ मु्क बनाना चाह रहे हैं।
इस नौजवान के अनुसार इसकी पूरी जानकारी उत्तर छत्तीसगढ़ के हर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी है लेकिन किसी ने अब तक छत्तीसगढिय़ा नौजवानों की नौकरियों को बचाने के लिए किसी भी प्रकार का प्रयास नहीं किया है। रायपुर में बैठी सरकार तक इन पीडि़तों का पहुंच पाना संभव नहीं है, जहां से राहत मिल सकती है। हालांकि इसकी उम्मीद भी कम है क्योंकि इस उद्योगों को राज्य सरकार का ही संरक्षण प्राप्त है।
उद्योगों के लिए पहले अपनी जमीन और फिर अपने प्रदेश की हवा, पानी और बिजली देने वाले इन नौजवानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। हर नौजवान को अलग-अलग कारणों से नोटिस दिया जा रहा है जिससे उन्हें श्रम या अन्य अदालतों से रात न मिल सके। पॉवर प्लांट प्रबंधन अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिए योजनाबध्द तरीके से काम कर रही है ताकि एक दिन उनके उद्योग छत्तीसगढिय़ा नौजवानों से बिलकुल मुक्त हो सके।
यह वक्त है जब राज्य की भाजपा सरकार व अन्य राजनीतिक दलों को इन नौजवानों के साथ खड़ा होना चाहिए क्योंकि इन नौजवानों की बदौलत ही हजारों परिवार जी रहे हैं। नौकरी जाने के बाद हालात बे-काबू हो सकते हैं, जिससे उस क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो सकती है। आज पूरी दुनिया में घूम-घूमकर मुख्यमंत्री प्रदेश में जिस औद्योगिक शांति की बात करते हैं, उसमें दाग लगने में देर नहीं लगेगी। पीडि़त नौजवान अगर संगठित हो गए और उन्हें किसी बड़े श्रमित संघ का संरक्षण प्राप्त हो गया तो उत्तर छत्तीसगढ़ के पॉवर प्लांट्स की जीवन अधिक नहीं रहेगा और फिर दुनिया भर में औद्योगिक शांति के मामले में छत्तीसगढ़ को बदनाम होते वक्त नहीं लगेगा। शायद यह समय है, जब राज्य सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और छत्तीसगढिय़ा नौजवानों के हक में उद्योगों से लड़ाई लडऩी चाहिए, नौजवानों की नौकरी वापस दिलानी चाहिए ताकि अपने परिवार की खुशहाली के लिए किए जा रहे उनके प्रयास सार्थक हो सकें।
                                                    चोखेलाल
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