Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                     रायपुर, 04 सितम्बर 2017

रायपुर पुलिस इन दिनों बेहद परेशान है और उसके अफसर अनुभवी अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं क्योंकि मामला ही ऐसा है कि अगर उसमें ईमानदारी के साथ काम कर दिया जाए तो एक मंत्री का विववाद में फंसना तय हैं। पुलिस अफसर उस घड़ी को कोस रहे हैं कि छह साल से फरार डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल का संचालक अचानक क्यों पकड़ा गया। अब पकड़ ही लिया है तो उसकी जांच-पड़ताल भी करनी होगी। उसकी चल-अचल सम्पत्तियों को भी सूचीबध्द करना होगा। ऐसे में उसके महंगे सामानों को किसने दबाया, उन्हें भी बुलाकर पूछताछ करनी होगी तभी तो अदालत में चालान पेश किया जा सकेगा।
दरअसल डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल के इस संचालक ने एक अखबार भी शुरू किया था, जिसमें शहर के नामी-गिरामी पत्रकारों को मोटी तनख्वाहों पर रखा गया था। सुखद बात यह थी कि बेहद कम समय में ही अखबार ने अपनी पहचान बना ली थी लेकिन बीच में हादसा हुआ और अखबार संचालक को शहर छोड़कर भागना पड़ा। स्वाभाविक है, अखबार बंद हो गया और संचालक के लेनदारों ने अपने-अपने तरीके से वसूली करनी शुरू कर दी। अखबार की सबसे बड़ी सम्पत्ति मशीन थी, जिसे किसने गायब किया, इसका खुलासा पुलिस ने अब तक नहीं किया है और आशंका है कि वह ऐसा करेगी भी नहीं।
चोखेलाल के पास इसकी पुष्ट जानकारी है कि वह मशीन स्कूल संचालक के एक ऐसे करीबी ने उठाकर औने-पौने दाम पर बेच दी है जो एक मंत्री का करीबी है और उसका भाई एक मण्डल में बड़ा पदाधिकारी है। निश्चित रूप से उस व्यक्ति ने मंत्री की सरपरस्ती में और संभव है कि मंत्री की रुचि को देखकर ही मशीन को वहां से उठाया था। अब स्कूल संचालक के पास उस व्यक्ति के कितने पैसे कर्ज के रूप में थे, यह तो पुलिस पूछताछ में ही सामने आ पाएगी परंतु बड़ा सवाल यह है कि मशीन उठाकर मिट्टी के मोल बेचने वाले व्यक्ति ने अगर धोखे से भी मंत्री का नाम ले लिया तो यह तय है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस मंत्री का बुरा हश्र तय है। वैसे भी यह मंत्री इंदिरा प्रियदर्शिनी महिला व्यवसायिक सहकारी बैंक में गड़बड़ी करने के आरोपी मैनेजर के बयान पर फंसा हुआ है। वह तो पुलिसवालों की कृपा है कि इस मामले को उन्होंने दबा-छिपाकर रखा है अन्यथा कानून तो सबके लिए एक ही है।
इन तमाम घटनाक्रमों को देखते हुए यह तो तय माना जा रहा है कि आने वाले दिन इस मंत्री के लिए अच्छे तो नहीं हैं क्योंकि अगर पुलिस ने ईमानदारी दिखाई तो प्रदेश भाजपा में मंत्री समेत वे तमाम लोग बे-नकाब हो जाएंगे जो मुख्यमंत्री निवास में साफ-सफाई का ठेका लेने से लेकर रियल इस्टेट के क्षेत्र में खुले आम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कोई गृह निर्माण मंडल से नियम विरुध्द लाखों रुपए का बंगला खरीद लेता है तो कोई ओडिसा से व्यवसाय करने के लिए छत्तीसगढ़ आकर यहां अपनी राजनीति चमकाने में जुटा हुआ है। भाजपा नेताओं का यह माफिया सत्ता के आसपास अपना प्रभाव बना चुका है, जिससे पुलिस निष्पक्ष जांच करने से कतरा रही है। हो सकता है कि डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल के संचालक की अन्य सम्पत्तियों के बारे में पुलिस खुलकर बताए परंतु अखबार की मशीन के बारे में वह चुप्पी साध ले।
पुलिस अगर सिर्फ अखबार की मशीन के बारे में ही पता कर ले और उसकी कहानी के तार जोड़ ले तो आज के कई सफेदपोशों का काला चेहरा सामने आ जाएगा परंतु पुलिस में इतना साहस नहीं है। वह मंत्री और भाजपा के इन खाटी नेताओं पर हाथ डालने से पहले कई बार सोचेगी। अखबार के दफ्तर से मशीन उठाकर जहां उसे बेचा गया है, वहां भी लाखों रुपए का वारा-न्यारा किया गया है। बस पुलिस हौसला करे..यह मामला प्याज की तरह है, जिसकी हर परत को उतारने के बाद धोखाधड़ी के गोरखधंधे के चौंकाने वाले तथ्य निकल कर आएंगे क्योंकि यह तो तय है कि एक स्कूल संचालक बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के व्यवसाय में बड़ा जोखिम नहीं ले सकता है। उसे राजनीतिक सरपरस्ती हासिल थी और सरपरस्ती देने वालों में इस मंत्री का नाम सर्वोच्च में था क्योंकि स्कूल संचालक के आसपास वही लोग होते थे जो उस मंत्री के दरबारी माने जाते थे।

                                                चोखेलाल
——————
आपसे आग्रह: कृपया चोखेलाल की टिप्पणियों पर नियमित रूप से अपनी राय व सुझाव दें, ताकि इसे बेहतर बनाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *