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मुखिया के मुखारी

इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                     रायपुर, 05 नवम्बर  2017
 
 
अश्लील सीडी काण्ड के खुलासे के बाद कुछ राष्ट्रीय न्यूज चैनलों ने पड़ताल कर जैसे ही यह ऐला किया कि अगले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ के कम से कम तीन मंत्रियों की अश्लील सीडी सार्वजनिक किए जाने की तैयारी की जा रही है, यह सुनकर बस्तर के एक मंत्री के हाथ-पैर फूल गए क्योंकि राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले इस बात को दावे के साथ कहते हैं कि इन तीन मंत्रियों में बस्तर का यह मंत्री जरूर होगा। 
जानकारों की इस राय के पीछे ठोस वजह भी है। मंत्री का अपनी ही पार्टी की एक महिला नेत्री के साथ जिस तरह की निकटता है, वह जगजाहिर है। सत्ता और संगठन में उसे पद दिलाने के लिए बस्तर का यह मंत्री जिस तरह लालायित रहता है, उससे साबित होता है कि दोनों के बीच एक नेता और कार्यकर्ता का रिश्ता नहीं है। मंत्री के पिता की पुण्य तिथि पर भाजपा की यह स्थानीय महिला नेता जिस तरह कमर मटकाकर नाचती है और कोई आपत्ति नहीं करता बल्कि मंत्री के साथ बैठकर पार्टीजन आनंद लेते हैं, उससे ही साबित होता है कि बस्तर भाजपा में किस तरह का काम चल रहा है। 
दरअसल मंत्री जिस समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसमें इस प्रकार के रिश्तों को अलग नजरों से नहीं देखा जाता है। उसे एक सामान्य बात माना जाता है लेकिन मंत्री जिस राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं, उसमे सचरित्र होना एक बड़ी योग्यता माना जाता है परंतु दुर्भाग्य की बात है कि प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके अधिकतर नेता इस समय चरित्र के संकट से ही जूझ रहे हैं। रोज किसी न किसी भाजपा नेता की सीडी बाजार में आने की चर्चाएं होती रहती हैं। 
बात हो रही थी बस्तर के मंत्री की, जिसके दामन पर पहले की पत्नी के स्थान पर साली को परीक्षा दिलाने का आरोप लगा हुआ है। अपनी नाक बचाने के लिए सरकार ने उसे भले ही बचा लिया हो लेकिन देर-सबेर इस मामले के दस्तावेज चीख-चीखकर अपनी सच्चाई का बयान करेंगे। लेकिन महिला नेत्री के साथ उसके नजदीकी रिश्तों की इबारत को बस्तर की हर दीवार पर लिखी गई है। सभी जानते हैं कि महिला नेत्री के कारण ही मंत्री ने उसके पति को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग का बड़ा टेकादार बना दिया। नलकूप खनन का जितना काम इस भाजपा नेत्री के पति को मिला, बस्तर में वैसे दूसरा उदाहरण देखने को नहीं मिलेगा। 
इतना ही नहीं जब भी सत्ता और संगठन में बस्तर को प्रतिनिधित्व देने की बात सामने आती है, मंत्री की तरफ से एकमात्र इसी महिला का नाम आगे बढ़ाया जाता है जैसे कि बस्तर में इस महिला के अलावा कोई दूसरी महिला है ही नहीं। सत्ता और संगठन के हर कार्यक्रम की जिम्मेदारी इसी महिला के कंधों पर रहती है क्योंकि बस्तर में मंत्री का दबदबा चलता है। स्वाभाविक रूप से निकटता के बिना ऐसा संभव नहीं है। 
खैर मंत्री की सीडी आए या न आए परंतु वे शक के रॉडार में जरूर हैं। भाजपा संगठन की मजबूरी है उन्हें झेलना क्योंकि वे जिस परिवार का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसकी अनदेखी करना भाजपा को बस्तर में मंहगा पड़ सकता है। इसलिए कम से कम अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव तक संगठन को उस मंत्री को बर्दाश्त करना ही पड़ेगा। यह बात अलग है कि राष्ट्रीय न्यूज चैनलों के दावों के अनुकूल अगर मंत्री की कोई सीडी सार्वजनिक कर दी गई तो समय से पहले उन्हें मैदान से बाहर बिठाना मजबूरी हो जाएगी और अगर ऐसा नहीं होता है तो अगला चुनाव इस मंत्री की विदाई जरूर कर देगा क्योंकि उनकी कार्यशैली से कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि जनमानस भी परेशान हो गया है। शायद यही वजह है कि अगले चुनाव में मंत्री क्षेत्र बदलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन फिलहाल तो यह संभव नहीं दिख रहा है क्योंकि जिस क्षेत्र से वे चुनाव लडऩे की कौशिश कर रहे हैं, वहां खुद को मुख्यमंत्री की बहू बताने वाली एक नेत्री ताल ठोंकर खड़ी हुई है। 
 
चोखेलाल
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