Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                 ०1 अप्रैल 17

छत्तीसगढ़ में भाजपा के लोकसभा में दस तथा राज्यसभा में तीन सांसद हैं और इन सभी का भविष्य फिलहाल अंधकारमय दिख रहा है। शायद यह पहला अवसर रहा होगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों से वन-टू-वन बातचीत की है। इस बातचीत के माध्यम से वे सांसदों को तौलना चाह रहे थे, उनकी कार्यक्षमता व कार्यशैली के अलावा केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी के बारे में वे निश्चिंत हो जाना चाहते थे ताकि दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में इन पर फिर से दांव लगाया जा सके।
करीब एक घण्टे की क्लास में प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों को तौल लिया। जिस तरह की खबरें आ रही हैं, उसके मुताबिक प्रधानमंत्री इन सांसदों के भरोसे दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी नहीं हैं और बहुत जल्द प्रदेश भाजपा को इन सभी का विकल्प तैयार करने का संदेश मिल जाएगा। नरेंद्र मोदी लोकसभा के अगले चुनाव की तैयारियों में अभी से जुट गए हैं और अब वे अपनी पसंद के प्रत्याशियों को मैदान पर उतारेंगे तकि फिर से निर्वाचित होकर वे देश में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकें लेकिन उनके इस फार्मूले में छत्तीसगढ़ के वर्तमान भाजपा सांसद खरे नहीं उतर रहे हैं। शायद इसी वजह से उन्हें इन सांसदों से सवाल करना पड़ा गया कि वे ही बताएं कि दो साल बाद उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट क्यों दिया जाए और टिकट दे दिया गया, तो वहां के मतदाता उन्हें वोट देकर क्यों जिताएं? प्रधानमंत्री के इन सवालों का किसी भी सांसद के पास जवाब नहीं था।
दरअसल छत्तीसगढ़ से भाजपा को लगातार जनादेश मिल रहा है परंतु निर्वाचित जनप्रतिनिधि जन अपेक्षाओं में खरे नहीं उतर पा रहे हैं। कारण कई हो सकते हैं परंतु आज के समय में मतदाता अपने विधायक, सांसद, पार्षद या अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधि से रिजल्ट की अपेक्षा रखता है। प्रधानमंत्री के सामने प्रदेश के भाजपा सांसदों ने जिस तरह के गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिए, उससे प्रधानमंत्री के सामने छत्तीसगढ़ की छवि अच्छी नहीं बनी। प्रधानमंत्री इसलिए भी नाराज हो गए क्योंकि अस्वस्थ्यता का वास्ता देकर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सांसद पुत्र अभिषेक सिंह बैठक में शामिल नहीं हुए। शायद उन्हें भय था कि प्रधानमंत्री उनसे कहीं पनामा मामले के बारे में कुछ न पूछ लें।
इस बैठक के बाद यह तो तय हो गया कि लोकसभा के अगले चुनाव में छत्तीसगढ़ में भाजपा के अधिकतर नए चेहरे मैदान पर दिखेंगे और वे निश्चित तौर पर कई पैमानों पर तौले गए होंगे। ठोंक-बजाकर प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा। इस बात का आभास वर्तमान भाजपा सांसदों को हो चुका है और बैठक के बाद वे लोकसभा चुनाव का मोह छोड़कर विधानसभा का चुनाव लडऩे की जुगत करने में जुट गए हैं। ऐसा करते समय वे अपनी जाति व समाज का वास्ता देने से नहीं चूकेंगे लेकिन भाजपा का वर्तमान नेतृत्व बेहद संजीदगी व गंभीरता के साथ प्रत्याशियों का करेगा क्योंकि हाल ही में सम्पन्न उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिस साहस के साथ एक समुदाय विशेष के किसी भी नेता को टिकट नहीं दिया और वहां प्रचंड बहुमत से विजय हासिल की, वह फार्मूला यहां भी लागू किया जा सकता है और अगर इसे यहां लागू कर दिया गया तो छत्तीसगढ़ में जाति की राजनीति करने वालों को घर में बैठना पड़ जाएगा और फिर राज्य विधानसभा और लोकसभा में योग्य व शिक्षित जनप्रतिनिधि जा सकेंगे जो प्रदेश व प्रदेशवासियों के विकास के लिए परिणान्मुखी का कर सकेंगे।

                                            चोखेलाल
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