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मुखिया के मुखारी

इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                     रायपुर, 12 दिसम्बर 2017
 
 
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह निश्चित रूप से बेहद परिपक्व और सधे हुए राजनेता बन चुके हैं। सही वक्त पर निशाना साधना उन्होंने सीख लिया है। इस बार भी उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस में उस वक्त निशाना साधा है जब कांग्रेस के अंदरखाने में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर मार-काट मची हुई है। मुख्यमंत्री ने केवल कांग्रेस के अंदर ही हाहाकार नहीं मचवाया है, कांग्रेस के धुर विरोधी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस सुप्रीमो अजीत जोगी को अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव में तीसरी शक्ति बताकर इस पार्टी का ओहदा बढ़ा दिया। यह बात अलग है कि अजीत जोगी खुद और अपनी पार्टी को प्रदेश की नम्बर एक पार्टी मानते हैं और पूरे भरोसे के साथ कहते हैं कि अगले सालांत तक प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार सत्तासीन हो जाएगी। 
बहरहाल मुख्यमंत्री ने अपने बयानों से कांग्रेस और छत्तीसगढ़ कांग्रेस को आपस में उलझा दिया है। प्रदेश कांग्रेस में पहले से ही मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खींचतान चल रही थी कि मुख्यमंत्री ने यह कहकर और परेशान कर दिया कि अगले चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले से इनकार नहीं किया जा सकता। सीधी लड़ाई के बजाए त्रिकोणीय मुकाबला निश्चित रूप से कांग्रेस के लिए परेशानी भरा रहेगा क्योंकि चौदह सालों से सत्ता से बाहर रहने के कारण उसके संसाधनों में भारी कमी आई है। कांग्रेस में जिला स्तर पर भी सिर फुटव्वल की स्थिति है। हर विधानसभा में दावेदारों की लम्बी-चौड़ी फेहरिस्त है। प्रत्याशी एक ही बनाया जाएगा। इसके बाद बाकी क्या करेंगे, बताने की जरूरत नहीं है। 
मुख्यमंत्री के बयान के बाद अजीत जोगी और उनकी पार्टी का मनोबल निश्चित रूप से बढ़ा होगा। हालांकि अजीत जोगी ने साफ कहा है कि वे मुख्यमंत्री की बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। वे प्रदेश की तीसरी ताकत नहीं बल्कि पहली ताकत हैं। उन्हें पता है कि प्रदेश की राजनीति उनके आसपास घूमती है। अजीत जोगी भी कांग्रेस की क्लास लेने से नहीं चूके। उन्होंने भी बहती हुई गंगा में हाथ धोते हुए कह दिया कि अगले चुनाव में कांग्रेस कहीं नहीं है। सीधा मुकाबला उनके तथा भाजपा के बीच में होगा, जिसके बाद प्रदेश में उनकी सरकार बनेगी। 
इस पूरे घटनाक्रम में प्रदेश कांग्रेस बचाव की मुद्रा में दिखी। प्रदेश अध्यक्ष इन पूरे मामलों में खामोशी ओढ़े रहे परंतु नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव अपनी पीड़ा छिपा नहीं पाए। हालांकि उन्होंने सच कहा कि सत्तारूढ़ दल और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के बीच बेहद नजदीकियां हैं और मुख्यमंत्री ने इस मोहब्बत को सार्वजनिक करके कांग्रेस के आरोपों की पुिष्ट कर दी है कि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस सत्तारूढ़ दल की बी टीम है। वैसे सिंहदेव की बातों में दम है और अतीत के पन्नों को पलटने से साफ दिखता है कि अपने दल के बड़े-बड़े नेताओं की अनदेखी करके राज्य की भाजपा सरकार ने कई बार अजीत जोगी की नियम-कायदों से बाहर जाकर मदद की है। दोनों के बीच एक बेहद नजदीकी रिश्ता है और दोनों ही एक-दूसरे के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं। 
बहरहाल मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस एक बार फिर आपस में उलझ गए हैं और यही वह समय है जब भाजपा अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर देगी। प्रदेश कांग्रेस में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर विवाद ने नेताओं के बीच एक अदृश्य लकीर खींच दी है। ऐसे तनाव भरे क्षण में प्रदेश कांग्रेस के नेता किस तरह की चुनावी तैयारी करेंगे, कितना एक-दूसरे का साथ देंगे, यह देखना प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव पन्नालाल पुनिया के लिए बेहद चुनौती भरा होगा। सत्तारूढ़ दल के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस भी अभी से जमकर खर्च कर रही है, इन दोनों के मुकाबले प्रदेश कांग्रेस की स्थिति बेहद कमजोर दिखाई देती है। हालांकि चुनाव अभी करीब सालभर दूर हैं और प्रदेश कांग्रेस को उम्मीद है कि गुजरात-हिमाचल प्रदेश के चुनाव और राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद प्रदेश में स्थिति सुधरेगी और तब वह पूरी ताकत के साथ मैदान पर उतरेगी। इसके बाद प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर बदलने का दावा प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेता कर रहे हैं। 
चोखेलाल
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