Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                 3 मार्च 17

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट और मानव अधिकार आयोग से फटकार सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि सुकमा एसपी इंदिरा कल्याण एलेसेला ने सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, वह घोर आपत्तिजनक व निंदनीय है। भारत के संविधान ने किसी भी वर्दीधारी को यह अधिकार नहीं दिया है कि व्यवस्था के खिलाफ आवाज मुखर करने वालों को वाहनों के नीचे कुचलकर मार दिया जाए।
पिछले दिनों जब विधानसभा परिसर में राज्य सरकार के एक सचिव आईएएस अधिकारी बेहद आपत्तिजनक तरीके से कांग्रेस के विधायक प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल से भिड़ गए थे, तभी चोखेलाल ने लिखा था कि यह सब संस्कारों की कमी का परिणाम है। राज्य सरकार ने अपने अफसरों और मंत्रियों को ऐसे संस्कार दिए हैं कि वे नियम-कायदों व सम्मान को भूल चुके हैं। लोकतंत्र में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का स्थान सर्वोच्च होता है और कार्यपालिका को उनके अनुसार ही काम करना होता है परंतु छत्तीसगढ़ की नौकरशाही प्रदेश सरकार को जूते की नोंक पर रखती है। अगर ऐसा नहीं होता तो मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एन. बैजेंद्र कुमार श्री श्री रविशंकर जैसे अध्यात्म गुरु के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी करने से घबराते। हालांकि विवाद बढ़ते देखे उन्होंने एक चतुर आईएएस अफसर की तरह यू टर्न ले लिया परंतु यह तो पब्लिक है, सब जानती है।
इसी तरह आईपीएस एसआरपी कल्लूरी को सरकार ने भले ही बस्तर से हटा दिया हो लेकिन उनका बस्तर मोह अभी तक खत्म नहीं हुआ है। उनके पास कामकाज नहीं है लिहाजा उन्होंने अपना पूरा ध्यान बस्तर में लगा रखा है। आईपीसी में एक धारा होती है, जिसमें किसी को अपराध के लिए उकसाने के आरोप में कार्रवाई की जा सकती है। कल्लूरी इन दिनों बस्तर के अफसरों को उकसाने के प्रयास में लगे हैं। अघोषित तौर पर वे आज भी बस्तर के अफसरों को निर्देश दे रहे हैं। इसी का परिणाम है कि एक ऑटोमोबाइल्स के शो रूप के उद्घाटन के मौके पर बस्तर पहुंचे कल्लूरी के सामने सुकमा एसपी इंदिरा कल्याण एलेसेना ने यह विवादित बात कही। उन्होंने ईशा खण्डेलवाल और शालिनी गेरा का नाम लेकर कहा कि इस तरह के सामाजिक कार्यकर्ताओं को वाहनों से कुचलकर मार देना चाहिए। जिस समय एलेसेना ने यह बात कही, उस समय सामने बेला भाटिया बैठी थीं, जिनकी शिकायत पर मानव अधिकार आयोग ने राज्य सरकार को फटकार लगाई थी और उसके बाद सरकार को कल्लूरी को बस्तर से विदा करना पड़ा था। कानून के जानकारों का मानना है कि इस बात के बाद एलेसेना के खिलाफ एफआईआर की जानी चाहिए क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्या करने की बात कही है।
अफसर इस तरह की बातें इसलिए कहते हैं क्योंकि उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त होता है। सिविल सेवा अधिनियम में अफसरों के लिए एक मर्यादा तय की गई है लेकिन देखा यह गया है कि सरकार में बैठे मंत्री और कुछ बड़े अधिकारी अपने स्वार्थ के लिए उन मर्यादाओं को तोड़ते रहते हैं, इसलिए अफसर उद्दंड हो चुके हैं। अब लगता नहीं है कि उन्हें काबू में करन पाना मुख्यमंत्री के बस की बात है। तेरह साल में भाजपा सरकार ने जो संस्कार दिए हैं, उसे अब काटने का समय आ गया है और अब रोज ही अफसर अपनी हरकतों से सरकार की फजीहत कराते रहेंगे।
    चोखेलाल
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