Uncategorized

मुखिया के मुखारी

इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                     रायपुर, 30 दिसम्बर 2017
 
तालाब की खुदाई शुरू नहीं हुई और मेंढकों ने तय करना शुरू कर दिया कि वे कहां रहेंगे….कुछ यही स्थिति इन दिनों प्रदेश कांग्रेस की है। चुनाव की तैयारियां और प्रत्याशियों का चयन करने में ताकत झोंकने के बजाए प्रदेश कांग्रेस का पूरा अमला यह तय करने में लगा हुआ है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। वे इस मुद्दे पर इतनी गंभीरता के साथ चर्चा कर रहे हैं, डिनर डिप्लोमेसी कर रहे हैं, मानो मुख्यमंत्री पद के हर दावेदार की विधानसभा चुनाव में जीत तय है। कांग्रेस के जो बड़े नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं, अतीत में वे भी हार का स्वाद चख चुके हैं और इस बार तो वे भाजपा के साथ छत्तीसगढ़ सुप्रीमो अजीत जोगी के निशाने पर हैं। ऐसी स्थिति में उनका विधानसभा तक पहुंच पाने का रास्ता बेहद कंटीला हो गया है। 
प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेता इन दिनों खुद की ब्रांडिंग करने में लगे हैं। यह जताने की कोशिश में लगे हैं कि पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबियों में उनका भी शुमार है। अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद राहुल गांधी ने देशभर में पार्टी के चुनाव अधिकारी के रूप में काम करने वाले सभी नेताओं को शुक्रिया कहने के लिए बुलाया। स्वाभाविक है कि छत्तीसगढ़ के भी एक-दो नेता इसमें शामिल थे, परंतु इस बात को इस तरह प्रचारित किया गया कि राहुल गांधी ने उन्हें न्योता भेजा है। उनसे संगठनात्मक चर्चा करना चाहते हैं। सभी जानते हैं कि प्रदेश में कांग्रेस का संगठन बेहद कमजोर है। अधिकतर जिलों में अध्यक्ष नहीं हैं और जहां हैं भी तो वे या तो बेहद निष्क्रिय हैं अथवा जिले कार्यकारी अध्यक्षों की बदौलत चल रहे हैं। 
बहरहाल बात हो रही थी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की। एक समाज विशेष की बैठक में पार्टी की एक नेत्री ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को अगले मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट क्या कर दिया, पूरी पार्टी में तूफान खड़ा हो गया। पार्टी के एक नेता विधानसभा के अंदर कहते हैं कि वे भी मुख्यमंत्री का मुखौटा पहनना चाहते हैं, तो दूसरे नेता दावा करते हैं कि उनका समाज भी चाहता है कि मुख्यमंत्री वे ही बनें। एक अन्य नेता ज्योतिष के पास पहुंचकर अपना और अपने पार्टी के भविष्य का बारे में पूछताछ करते हैं। इस कुकुरहाव के बीच आखिरकार प्रभारी महासचिव को कूदना पड़ता है और कहना पड़ जाता है कि मुख्यमंत्री का चेहरा सामने किए बिना ही कांग्रेस चुनाव मैदान पर उतरेगी। स्पष्ट बहुमत हासिल होने के बाद निर्वाचित विधायक और पार्टी हाईकमान प्रदेश का नेतृत्व तय करेंगे। 
पार्टी के प्रभारी महासचिव भले कितनी भी समझाइश दें लेकिन प्रदेश कांग्रेस के कुछ महत्वाकांक्षी नेता अब नए सिरे से सक्रिय हो चले हैं। उन्हें लगने लगा है कि पार्टी जैसे ही उन्हें चुनाव मैदान पर उतारेगी, जीत तय है और उसके बाद मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। हो सकता है वे सही सोचते हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की दुश्मन पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने कांग्रेस के आधा दर्जन ऐसे नेताों को सूचीबध्द किया है, जिन्हें वे हर हाल में चुनाव हराने की कोशिश करेंगे। संभव हुआ तो कांग्रेस के उन नेताओं को पराजित करने के लिए भाजपा और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस पर्दे के पीछे से हाथ भी मिला सकती है। यह स्थिति कांग्रेस के उन दिग्गज नेताओं के लिए बेहद भारी रहेगी क्योंकि सामान्य भाषणों में भाजपा और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के नेता कह चुके हैं कि कांग्रेस के अमुक नेता को इस बार किसी भी कीमत पर चुनाव नहीं जीतने दिया जाएगा। निश्चित रूप से उन्होंने इसके लिए रणनीति बनाई होगी या बना रहे होंगे। इसके बाद भी कांग्रेस के दिग्गज नेता मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए हुए हैं तो कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि सपने देखने में कोई प्रतिबंध नहीं है। 
एक ओर भाजपा ने मैदानी इलाके से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं और होली तक पार्टी की तरफ से प्रत्याशियों को संकेत भी मिल जाएंगे। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस भी प्रत्याशी चयन के दौर से गुजर रही है लेकिन इन दोनों के विपरीत प्रदेश कांग्रेस के नेता मेरे-तेरे के चक्रव्यूह से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। ब्लॉक व जिला स्तर पर प्रत्याशियों की तलाश अब तक शुरू नहीं हो पाई है। बड़े नेताओं को तो मुख्यमंत्री का पद दिख रहा है और उसी को लेकर भीतर ही भीतर खींचतान कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस का सरकार बनाने का सपना टूटने में पलभर की देर नहीं लगेगी। ज्योतिष भले कांग्रेस की सरकार बनने का दावा करे लेकिन सच तो यह है कि भविष्यवाणी भी तभी सफल होगी, जब उसके लिए प्रयास किए जाएं। कांग्रेस ने ऐसा कोई भी महान काम नहीं किया है कि मतदान के दिन प्रदेशवासी घर से निकल-निकलकर पंजे का बटन दबाकर कांग्रेस को एकतरफा जितवा दें। इसके लिए उन्हें अभी से प्रयास करना होगा तब चुनावी टक्कर हो पाएगी अन्यथा भाजपा को वॉक-ओवर तो मिलना ही है। 
 
चोखेलाल
——————
आपसे आग्रह: कृपया चोखेलाल की टिप्पणियों पर नियमित रूप से अपनी राय व सुझाव दें, ताकि इसे बेहतर बनाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *