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मुखिया के मुखारी

 
इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                 रायपुर, 06 जनवरी 2018
 
 
प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के एक कद्दावर मंत्री ने यह कहकर राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है कि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के चुनावी मैदान पर रहने से भाजपा को फायदा होगा। मंत्री के इस बयान ने कांग्रेस की उस आशंका पर मुहर लगाई है जिसमें कांग्रेस यह लगातार कह रही है कि अजीत जोगी के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ही भाजपा की बी-टीम है। 
जब से प्रदेश में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस का उदय हुआ है, इस बात पर लगातार चर्चा होती रही है कि इससे फायदा किसको होगा। अजीत जोगी का यह राजनीतिक दल निश्चित रूप से कांग्रेस के लिए वोट काटू होगा क्योंकि राजनीति का सामान्य समीकरण है कि कोई बी नेता अगर पार्टी छोड़ता है तो वह पार्टी के नहीं अपने वोट साथ ले जाता है। अजीत जोगी के साथ उनके वोट अगर शिफ्ट होते हैं तो इसकी सीधा फायदा भाजपा को होगा और उसी बात को सरकार के मंत्री ने कहा है। 
लेकिन कांग्रेस ने अब इसे हथियार बना लिया है और अब उसके नेता कहने लगे हैं कि वे तो पहले ही जानते थे और कहते थे कि अजीत जोगी की पार्टी भाजपा की बी-टीम है। भाजपा के कुछ बड़े नेताओं की सरपरस्ती में अजीत जोगी ने नया राजनीतिक दल बनाया और अब इसके माध्यम से वह कांग्रेस का चुनावी गणित बिगाडऩे में तुली हुई है। कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के कुछ नेता पहले पर्दे के पीछे से भाजपा की मदद करते थे लेकिन अब दुश्मनों का चेहरा सामने आ गया है। इसलिए उनसे निपटने में आसानी होगी। 
पिछले दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें यह साबित होता है कि पर्दे के पीछे भाजपा और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस मिल-जुलकर राजनीति कर रहे हैं। शिक्षाकर्मियों ने बड़ा आंदोलन किया। रातों-रात न जाने क्या जादू करके सरकार ने उनकी हड़ताल मिनटों में खत्म करा दी। कांग्रेस लगातार इसका खुलासा करने की मांग करती रही परंतु छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने खामोश होकर सत्तारूढ़ दल का साथ दिया। ताजा घटनाक्रम झीरम घाट में हुए नरसंहार का है, जिसमें कांग्रेस लगातार कह रही है कि उसके पास इसके प्रमाण हैं कि यह केवल नक्सल हमला नहीं था, एक राजनीतिक साजिश थी लेकिन इस प्रमाण को वे कहां और किसको दें। इसके लिए कांग्रेस लगातार सीबीआई जांच कराने की मांग कर रही है। ऐसे में कांग्रेस का साथ देने के बजाए छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के नेता यह सवाल पूछ रहे हैं कि कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में भूपेश बघेल क्यों नहीं गए। वे संदेह जता रहे हैं कि इस नरसंहार की पूर्व सूचना भूपेश बघेल के पास थी। कुल मिलाकर प्रदेश में जो तस्वीर दिखाई दे रही है उसको देखकर यही लग रहा है कि कांग्रेस के मुकाबले दो शक्तियां खड़ी हो चुकी हैं। चुनाव परिणाम क्या आता है, अभी से कुछ कह पाना मुश्किल है लेकिन राजनीतिक टीकाकारों ने संभावना जताई है कि स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस अगर भाजपा को सहयोग करके सरकार बनवा दे तो इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए। 
बहरहाल चुनाव अभी कुछ महीने दूर हैं। इन महीनों में राजनीतिक घटनाक्रमों में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी क्योंकि दिल्ली में कांग्रेस की राजनीति करने वाले कुछ लोगों का मानना है कि चुनाव से पहले कांग्रेस का छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस से गठजोड़ हो सकता है क्योंकि भारत निर्वाचन आयोग ने अब तक अजीत जोगी के राजनीतिक दल को मान्यता प्रदान नहीं की है और न ही उनके दल को अब चत कोई चुनाव चिह्न नहीं मिल पाया है। ऐसी स्थिति में वोट बचाने के लिए कांग्रेस के कुछ बड़े नेता गठजोड़ कराने की कोशिश करेंगे और भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि अजीत जोगी फिर से कांग्रेस का दामन थाम लें क्योंकि इससे भाजपा को बड़ा नुकसान होने की आशंका है। 
विधानसभा चुनाव तक प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर क्या होगी, इसके बारे में अभी से कोई भी कुछ भी नहीं बता सकता है। केवल बदलते हुए घटनाक्रमों पर नजर रखने से ही भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है क्योंकि सभी जानते हैं कि अजीत जोगी का सपना  फिर से मुख्यमंत्री बनने का है। लेकिन राहें बेहद मुश्किल हैं। सभी 90 सीटों पर प्रत्याशी उतारना और उसके बाद बहुमत का जादूई आंकडा हासिल करने के पीछे सधी हुई रणनीति की आवश्यकता होगी। हालांकि उनके प्रयासों में कोई कमी नहीं दिख रही है लेकिन छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा के तीन चुनावों के परिणामों को देखकर तो नहीं लगता कि प्रदेश के मतदाता कांग्रेस और भाजपा के अलावा किसी तीसरे पर भरोसा कर पाएंगे। 
 
चोखेलाल
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