Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                 ०7 अप्रैल 17

प्रदेश की संसदीय व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है और यह सवाल खड़ा करने वाला कोई और नही बल्कि प्रदेश के संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्रकार हैं। लोकसुराज अभियान के तहत बिलासपुर पहुंचे मंत्री चंद्राकर ने अफसरों की बैठक में कह दिया कि विधानसभा में मंत्रियों की तरह (गलत) जवाब मत दीजिए क्योंकि सरकार को रिजल्ट चाहिए। मंत्री चंद्राकर के इस बयान से साबित हो गया कि विधानसभा में मंत्री गलत जवाब देते हैं। ऐसा करके वे सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि प्रदेश की जनता को गुमराह करते हैं।
वैसे अगर बड़े परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो मंत्री चंद्राकर ने गलत नहीं कहा है। सब जानते हैं कि राज्य सरकार विधानसभा में कभी भी किसी भी मुद्दे पर संतोषजनक या सही जवाब नहीं देती है क्योंकि विपक्ष के अधिकतर सवाल सरकार को घेरने वाले रहते हैं, जिससे बचने के लिए सरकार के मंत्री विपक्ष को भ्रमित करने वाला जवाब देते हैं। विपक्ष और पूरे प्रदेश को पता रहता है कि सरकार असत्य कह रही है परंतु विधानसभा के कायदे-कानूनों के कारण कोई इस बात को बोल नहीं पाता है। विधानसभा सत्र के दौरान केवल सरकारी पैसों की बरबादी होती है और उस दौरान पूरा प्रशासन ठप रहता है।
जहां तक संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर का सवाल है तो वे बेहद विवादित रहे हैं। विवादों से उनका नजदीक का रिश्ता रहा है। हालांकि कई बार उन्होंने खुद को सुधारने की कोशिश की परंतु उनमें बुनियादी दिक्कत है, लिहाजा अपने कार्यों व व्यवहार से अक्सर वे सरकार को परेशानी में डाल देते हैं। यहां फिर मीडिया की भूमिका आलोचनात्मक रही क्योंकि उसे मंत्री चंद्राकर के इस बयान की गंभीरता समझ नहीं आई वरना समझदार मीडिया होती तो इस मामले में छत्तीसगढ़ की पूरी संसदीय व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर देती। विधानसभा अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर मंत्री चंद्राकर आ जाते पर वाह रे मीडिया, उसे तो मुख्यमंत्री की ब्रांडिंग करने के अलावा प्रदेश में क्या हो रहा है, इसको देखने की फुरसत ही नहीं है।
मंत्री का अफसरों को यह कहना कि विधानसभा में मंत्रियों की तरह जवाब मत दो, जो कर रहे हो, वह बताओ क्योंकि सरकार को रिजल्ट चाहिए, अपने आप में बेहद गंभीर मामला है और इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करने की जरूरत है। यह बात अलग है कि पूछताछ होने पर मंत्री चंद्राकर अपनी सफाई में ऐसा कुछ कह देंगे, जिससे मामला रफा-दफा हो जाएगा परंतु यह प्रदेश की विधानसभा की विश्वसनीयता का सवाल है, जिस पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। विपक्ष को इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेने की जरूरत है और इस बयान पर घेरने की आवश्यकता है।
दरअसल पूरा मामला अहंकार का है। सभी जानते हैं कि बीते साढ़े तेरह साल से सरकार चलाते-चलाते भाजपा के मंत्री अंहकारी हो गए हैं। उन्हें लगने लगा है कि अब उनका कोई विकल्प नहीं है। इसलिए वे एक ही लाठी से जनता, कार्यकर्ता और सरकारी महकमे को हांकने लगे हैं। उन्हें लगता है कि प्रदेश के मतदाताओं के सामने ठोस विकल्प नहीं है, लिहाजा वे सिर्फ भाजपा को ही वोट देंगे पर इतिहास गवाह है कि हमेशा अहंकार का अंत हुआ है। भाजपा के कुछ नेता इस स्थिति को भांप चुके हैं और समय-समय पर कार्यकर्ताओं को इसका आभास कराते रहते हैं पर सत्ता के मद में चूर अजय चंद्राकर जैसे मंत्री इसकी अनदेखी करते आ रहे हैं और अब तो उन्होंने विधानसभा जैसे लोकतंत्र के प्रदेश के सबसे बड़े मंदिर को भी शक के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है जो यह प्रमाणित करता है कि भाजपा के इन अहंकारी मंत्रियों के लिए कायदे-कानून वहीं तक हैं, जहां तक उनका स्वार्थ जुड़ा हुआ है। बाकी समय वे इन सबको अपने जूते की नोंक पर रखते हैं। यह स्थिति सत्तारूढ़ दल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
            चोखेलाल
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