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मुखिया के मुखारी

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इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, 22 अप्रैल 17
   
आखिरकार भाजपा ने मान ही लिया कि छत्तीसगढ़ में पिछले साढ़े तीन साल में ऐसा कोई काम नहीं किया गया है, जिसको लेकर वोट मांगने मतदाताओं के पास जाया जा सके। इसीलिए तय किया गया है कि अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगे जाएंगे। प्रदेश की भाजपा सरकार की जी-हुजूरी करने वालों के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है क्योंकि राज्य सरकार के कामकाज की सही समीक्षा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कर ली है। उसे यकीन हो गया है कि राज्य सरकार की कार्यशैली ऐसी नहीं है कि जिसकी बदौलत प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने का दावा किया जा सके।
    रायगढ़ में हुई भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के महामंत्री सौदान सिंह ने एक बात कहकर चौंका दिया। उन्होंने कहा कि भाग्य के भरोसे बार-बार जीत नहीं मिलती है। अर्थात उन्होंने परोक्ष रूप से सबको समझा दिया कि पहली बार विद्याचरण शुक्ल और उसके बाद दो बार अजीत जोगी की अघोषित मदद से सत्ता हासिल करने के बाद भाजपा जब चौथी बार मैदान पर उतरेगी तो राह कंटकों से भरी होगी। इस बार अजीत जोगी मदद करने के लिए नहीं होंगे। फिर सरकार ने ऐसा कुछ भी चमत्कारिक नहीं किया है, जिसके कारण मतदाता चौथी बार भाजपा को मौका दे। सौदान सिंह ने एक बारीक नब्ज भी पकड़ी है। मंजे हुए रणनीतिकार हैं, उन्हें पता है कि प्रदेश भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता अपने विधायक, मंत्री व सांसदों से खार खाए बैठे हैं सो उन्हें फुसलाना जरूरी है। इसलिए एक मंत्र दे दिया कि लोक सुराज की तर्ज पर अब पार्टी संगठन अभियान चलाएगा। अफसरों के साथ बैठकर मंत्री प्राथमिकता के साथ कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान करेंगे।
    यह सब माथा-पच्ची इसलिए की गई क्योंकि पार्टी के बड़े नेता जानते हैं कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की निर्वाचित सरकार नहीं बल्कि नौकरशाह सरकार चला रहे हैं। किसी मंत्री की इतनी हैसियत नहीं है कि वह अपने किसी कार्यकर्ता के लिए किसी अफसर से भिड़ सके। प्रदेश में वही हो रहा है, जो कुछ अफसर चाहते हैं। खबर तो यहां तक है कि हाल ही में कोरिया और सूरजपुर कलक्टरों को इसलिए हटा दिया गया क्योंकि मुख्यमंत्री सचिवालय के एक अफसर को वे नापंसद थे। आमतौर पर ये अफसर मुख्यमंत्री के साथ लोक सुराज अभियान में नहीं जाते हैं, लेकिन एख एजेंडे के तहत वे मुख्यमंत्री के साथ कोरिया और सूरजपुर गए और लौटते हुए हवाई जहाज में अपनी आदत के अनुसार मुख्यमंत्री के कान में न जाने क्या कहा कि जमीन पर पैर रखते ही मुख्यमंत्री ने दोनों जिलों के कलक्टरों को हटाने का ऐलान कर दिया। दोनों ही कलक्टर गैर सवर्ण थे, लिहाजा ना-पसंद स्वाभाविक थी।
    बात हो रही थी भाजपा के अंदरखाने की। कार्यसमिति की बैठक में सरकार के जिन मंत्रियों ने अपने विभागों के कामों का प्रेजेंटेशन दिया, उसको देखकर पार्टी के बड़े नेता नाखुश हो गए। उन्होंने एक ही सवाल किया कि क्या इन कामों के आधार पर भाजपा प्रदेश में चौथी बार सरकार बना सकती है? इस सवाल के जवाब में मंत्री निरुत्तर हो गए क्योंकि उन्हें भी पता है कि जिन कामों का वे बखान कर रहे हैं, उससे वोट तो नहीं मिल सकते। यह सब देखने के बाद ही बड़े नेताओं ने यह व्यवस्था दी कि राज्य सरकार की ब्रांडिंग करना छोडि़ए और नरेंद्र भाई मोदी पर भरोसा कीजिए क्योंकि राज्य सरकार के भरोसे तो बहुमत का जादुई आंकड़ा जुटा पाना असंभव है। बस नरेंद्र मोदी ही हैं, जिनके नाम का जादू अगर उत्तर प्रदेश की तरह चल गया तो बल्ले-बल्ले वरना…….। उसके बाद तो बस आराम ही आराम है। बेटे-बेटियों की शादी कीजिए, घर-परिवार के साथ रहिए व अपने अन्य शौक पूरा कीजिए।

                                        चोखेलाल
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