Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, ०2 मई 17
ऐसा लगता है कि प्रदेश कांग्रेस पर शनिदेव की वक्र दृष्टि पड़ गई है। प्रदेश कांग्रेस के सबसे बड़े नेता भारी संकट में दिख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि उन पर शनिदेव ही नहीं राहू भी कुपित हो गए हैं क्योंकि पहले अंतागढ़ टेप काण्ड की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी गई। कांग्रेस इससे उबर भी नहीं पाई थी कि बड़े नेता पर सरकार ने वक्र नजर डाली और जांच-पड़ताल के बाद यह साबित कर दिया कि उनके परिजनों ने सत्तर एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जा कर रखा है।
राजस्व में एक लब्ज है नजरी आंकलन। जब फसल अंकुरित होती है तो क्षेत्र के पटवारी और राजस्व निरीक्षक सरकार को यह रिपोर्ट देते हैं कि कितनी फसल का अनुमान है। यहां यह संदर्भ इसलिए जरूरी है कि सत्तारूढ़ दल नजरी आंकलन करने के बाद यह मानकर चल रहा है कि इस समय जमीन पर कांग्रेस के मुकाबले अजीत जोगी भारी दिख रहे हैं। दोनों फैसलों पर नजर डाली जाए तो परोक्ष रूप से फायदा अजीत जोगी को ही होता दिखाई पड़ रहा है। शायद अब कांग्रेस यह फिर से कहे कि उसने तो बार-बार कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और अजीत जोगी के बीच साठगांठ है।
अंतागढ़ टेपकाण्ड के बाद ही कांग्रेस नेतृत्व ने पहले अति जोगी को पार्टी से निष्कासित किया था क्योंकि टेप में चुनाव के दौरान बात करने वालों में जिन लोगों की आवाज आ रही थी, उसमें एक आवाज अमित जोगी की बताई गई। अमित जोगी के निष्कासन के बाद अजीत जोगी ने भी कांग्रेस को बॉय-बॉय कह दिया और अपनी नई पार्टी बना ली। इस मामले पर हाईकोर्ट में कांग्रेस की तरफ से याचिका दायर की गई, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया, जो यह साबित करता है कि याचिका के साथ वे प्रमाण नहीं लगाए गए थे, जिनकी आवश्यकता थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अजीत जोगी अब कांग्रेस हाईकमान से यह कह सकते हैं कि प्रदेश कमेटी के कुछ नेताओं ने उन पर झूठे लांछन लगाए हैं। इससे हाईकमान के सामने जहां जोगी का कद मजबूत होगा वहीं प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं का वजन कम होगा और यह बात साबित होगी कि प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेता द्वेषवश बदले की भावना से काम कर रहे हैं। हो सकता है कि उनको नुकसान भी उठना पड़े।
दूसरा मुद्दा भी अजीत जोगी ने ही सामने लाया। भले ही सरकारी महकमे ने उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराए हों, लेकिन अजीत जोगी और उनके सहयोगी बार-बार छाती ठोंक-ठोंककर यह कहते रहे हैं कि प्रदेश कांग्रेस के एक बड़े नेता व उनके परिजनों ने जमीन पर कब्जा कर रखा है। हालांकि इस बड़े नेता से इस्तीफा नहीं मांगा गया लेकिन अजीत जोगी ने यह जरूर कह दिया कि कांग्रेस की स्थिति अब क्षेत्रीय दलों से भी छोटी हो गई है क्योंकि जिन पर प्रदेश में कांग्रेस चलाने की जिम्मेदारी है, जिन्हें विपक्ष की भूमिका निभाने का जनादेश मिला हुआ है, वे जमीन पर कब्जा करने में लगे हुए हैं। अजीत जोगी के आरोपों की पुष्टि सरकार ने भी कर दी है, जिसके बाद अजीत जोगी व उनके साथियों को संजीवनी मिल गई है। अब वे पूरी ताकत से कांग्रेस के उस नेता के खिलाफ भिड़ गए हैं, जिसने जोगी पिता-पुत्र को कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाया था। इन दोनों की जंग के बीच सत्तारूढ़ भाजपा अपनी चुनावी तैयारी में पूरी ताकत से लगी हुई है क्योंकि उसे चौथी बार सत्ता पर कब्जा करना है।
कांग्रेस के पास बचाव में कुछ कहने को नहीं बचा है क्योंकि सरकार ने यह सार्वजनिक कर दिया है कि कांग्रेस के एक बड़े नेता व उनके परिवार ने जमीन पर कब्जा कर रखा है। अब कांग्रेस के इस नेता की तरफ से एक मार्मिक चिट्ठी सोशल मीडिया और अन्य मीडिया के पास पहुंची है, जिसके बचाव में कम और सरकार के खिलाफ अधिक बातें लिखी हुई हैं। खुद को किसान पुत्र बताते हुए इस नेता ने प्रदेशवासियों के साथ भावनात्मक रूप से खेलने की कोशिश की है कि वे तो खेतों में काम करने वाले किसान पुत्र हैं और उसके पैर सदैव कीचड़ से सने रहते हंै। खैर सभी ने अपनी बात कह दी है और अब गेंद मतदाताओं के पाले में है। राजनीतिक लड़ाई के बीच उसे बुरे और अति बुरे के बीच फैसला करना है क्योंकि अच्छआ तो कोई है नहीं।

चोखेलाल
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