Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, ०3 मई 17

प्रदेश के कुख्यात आईएएस अधिकारी बाबूलाल अग्रवाल पर सीबीआई की कार्रवाई के बाद यह लगने लगा  था कि नौकरशाहों में भय होगा तथा वे गलत तरीके से कमाई करना बंद कर देंगे। वे जरूर सोचेंगे कि जिस तरह से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आमादा है, उस हिसाब से अगर वे पकड़े जाते हैं को इतनी भीषण गर्मी में तिहाड़ जेल में रहना पड़ जाएगा।
पर सबको पता है कि छत्तीसगढ़ में नौकरी करने वाला हर छोटा-बड़े नौकरशाह दुस्साहसी है। उसे पता है कि राज्य सरकार की जांच एजेंसियों में इतनी ताकत नहीं है कि वे उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकें। अगर कभी छापा-वापा पड़ भी गया तो राज्य सरकार पहले उन्हें निलम्बित नहीं करेगी और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति भी नहीं देगी। इसलिए भ्रष्टाचार रोकने के लिए राज्य सरकार की एजेंसियों में पदस्थ अधिकारी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें हश्र अच्छी तरह पता है।
नौकरशाहों के दुस्साहस का एक नतीजा अभी तब सामने आया, जब आयकर अफसरों ने छत्तीसगढ़ का रुख किया और अखिल भारतीय वन सेवा के एक अफसर के ठिकानों पर छापा मारा। कहने को तो यह अधिकारी वन सेवा के हैं परंतु राज्य निर्माण के बाद वे अपने विभाग में कब पदस्थ रहे हैं शायद उन्हें भी याद नहीं होगा। बीते दस-बारह सालों से वे प्रतिनियुक्ति पर हैं और हर उस विभाग में पदस्थ रहे जहां कमाई की भरपूर संभावना रही है। छत्तीसगढ़ के एक रसूखदार अफसर का उन पर वरदहस्त है और उनकी बदौलत ही वे कभी नगरीय प्रशासन तो कभी हाउसिंग बोर्ड और कभी आवास व पर्यावरण विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उनकी बे-ताहाशा कमाई में कौन-कौन भागीदार हैं यह तो वन सेवा का यह अधिकारी बता सकता है परंतु यह तय है कि जिस रसूखदार अफसर की सरपरस्ती में उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलती रही है, वह उस काली कमाई का हिस्सेदार अवश्य होगा।
यहां आयकर की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि अक्सर जो दिखाई देता है वास्तव में होता उससे ज्यादा है। वन सेवा के अफसर के ठिकानों पर छापा मारकर यह तो साबित हो गया कि उसकी पत्नी व बेटा राजधानी के सबसे महंगे इलाके वीआईपी रोड पर एक भव्य मैरिज गॉर्डन संचालित करते हैं, जहां शहर के रईसजादों की पार्टियां होती हैं या उन्हें वहां पार्टियां करने के लिए विवश किया जाता है पर आयकर अफसरों को यह पड़ताल करना चाहिए कि जिस रसूखदार अफसर की सिफारिश से इस अफसर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रही हैं, उसकी क्या भूमिका है। इस छापे में महत्वपूर्ण बात यह रही कि संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले दो भाई भी लपेटे में आ गए क्योंकि वे उस मैरिज गॉर्डन में गीत-संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत करते थे।
आयकर अफसरों के पास सुनहरा अवसर है, जब वे प्रदेश में भ्रष्टाचार के पोषक सबसे बड़े अफसर को बे-नकाब कर सकते हैं। इस अफसर के पास भले की पिता-दादा की अरबों रुपए की सम्पति हो, लेकिन अगर उसका सर्विस रिकॉर्ड खंगाला जाए तो वह विवादों से भरा पड़ा है। उसने अपने भाई को प्रॉपर्टी ब्रोकिंग के काम पर लगाया और अपनी बहन को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिलाकर एक सरकारी कॉलेज का प्रिंसिपल बनवा दिया। वैसे आयकर विभाग अगर ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करे तो सरकार को नया प्रशासनिक प्रमुख करने में कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि आईएएस अफसरों की ओडिया लॉबी कोशिश में है कि भले छह महीने के लिए ही सही, प्रदेश के प्रशासनिक प्रमुख का दायित्व किसी ओडिया अफसर को जरूर मिल जो।

चोखेलाल
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