Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, ०6 मई 17

जिद करना अच्छी बात है बशर्ते उसका उद्देश्य अच्छा हो। छत्तीसगढ़ में बच्चेनुमा एक मंत्री की जिद से सरकार चलाने वाले अक्सर परेशान हो जाते हैं। चूंकि उनके पिता अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने से भाजपा के पितृपुरुष माने जाते हैं लिहाजा पार्टी संगठन व सरकार के लोगों से अक्सर उन्हें यह विशेषाधिकार मिल जाता है तभी तो वे कभी मंत्री पद से इस्तीफा दे देते हैं और कभी कह देते हैं कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग नहीं सम्भालना है। सब उनकी मर्जी से ही चल रहा है।
बचपन में सभी ने अपनी दादी-नानी से एक कहानी जरूर सुनी होगी कि चंद्रमा पाने की जिद करने वाले एक बच्चे के सामने उसकी मां से पानी से भरी एक थाली रख देती है, जिसमें चंद्रमा की परछाई देखकर बच्चा खुश हो गया और मां उसे व्यस्त कर अपने काम पर लग जाती है। निश्चित रूप से वह सतयुग का बालक रहा होगा पर यह बच्चा तो कलयुग का है। जिद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। कुछ महीने पहले जिद पकड़ ली कि वह शराब बेचना चाहता है। सबने समझाया, डांटा-फटकारा, होने वाले नुकसान के बारे में बताया पर बच्चा है तो जिद पर अड़ा रहा। अब तो थाली में चंद्रमा की परछाई दिखाकर उसे बहलाया भी नहीं जा सकता था, लिहाजा उसकी जिद पूरी की गई और इन दिनों वह शराब बेच रहा है। ऐसा करते हुए उसे लोगों की कोई परवाह नहीं है। उसे तो बस अपने खजाने से मतलब है।
पर इस बच्चे की जिद अब प्रदेश की ढाई करोड़ आबादी को भारी लगने लगी है क्योंकि शराब बेचने के अलावा उस जिददी बच्चेनुमा मंत्री के पास प्रदेश को साफ-सुथरा रखने का जिम्मा भी है। नगरीय प्रशासन जैसे भारी-भरकम विभाग की जिम्मेदारी भी उसके पास है, लेकिन उसने अपना पूरा ध्यान शराब बेचने में लगा रखा है परिणास्वरूप स्वच्छ भारत अभायन के सर्वे में छत्तीसगढ़ का नाम खोजने से भी नहीं मिल रहा है। प्रदेश की भाजपा सरकार और स्थानीय निकायों में बैठे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए यह स्थिति निश्चित रूप से शर्मनाक है। खासकर भाजपा के लिए तो यह आत्मचिंतन का विषय है कि जिस प्रदेश की जनता ने उसे तीसरी बार जनादेश देकर सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी है, उस पर लगातार भरोसा जताया है, वह सरकार प्रदेश वासियों को साफ-सुथरी सड़कें, नालियां और वातावरण तक नहीं दे पाई है। स्वच्छता में रहने का अधिकार तो देश के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को दिया है और सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक नागरिक को स्वच्छता, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य व शिक्षा उपलब्ध कराए परंतु इन सबसे अलग राज्य सरकार का ध्यान जमीन बेचने, शराब बेचने, बिजली बेचने और कमीशनखोरी में लगा हुआ है।
प्रदेशवासियों के लिए यह कितनी शर्मनाक बात है कि उनके प्रदेश का एक शहर भी साफ-सफाई के मापदंंडों पर खरा नहीं उतर पाया। खासकर रायपुर को तो अव्वल आना चाहिए था क्योंकि यह राजधानी के अलावा उन सभी लोगों का भी शहर है जो यहां राजनीति करके ऊंचाइयां हासिल करते हैं। बिलासपुर तो नगरीय प्रशासन मंत्री का निर्वाचन क्षेत्र है, वहां की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। मंत्री का पूरा ध्यान शराब बेचने और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी (भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष) को कमजोर करने में लगा रहता है। जब रायपुर-बिलासपुर की यह दुर्दशा है तो सुदूर रायगढ़, कोरबा, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे नगरीय इलाकों की क्या स्थिति होगी, सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है।
अब गेंद सरकार के पाले में है क्योंकि आम छत्तीसगढिय़ा के बारे में यह तय हो गया है कि उसे गंदगी में रखा जा सकता है। वह साफ-सफाई नहीं कर सकता तो सरकार क्या कर रही है। सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए कहां खर्च किए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर न जाने कितने करोड़ फूंक दिए गए। इसके बाद भी प्रदेश फिसड्डी साबित हुआ तो यह बात प्रमाणित हो रही है कि सरकार और नगरीय निकायों में बैठा हर निर्वाचित जनप्रतिधि कमीशनखोरी के जाल में फंसा हुआ है और केवल अपने लिए काम कर रहा है। वह आम छत्तीसगढिय़ा की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहा है क्योंकि गंदगी में रहकर एक आम नागरिक का जीवन शनै:-शनै: खत्म होता जा रहा है और इसके जिम्मेदार प्रदेश के सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। यही वह समय है जब केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार की जवाबदेही तय करे और राज्य सरकार अपने जिद्दी बच्चेनुमा मंत्री को कठघरे में खड़ा कर कार्रवाई करे।

चोखेलाल
——————
आपसे आग्रह: कृपया चोखेलाल की टिप्पणियों पर नियमित रूप से अपनी राय व सुझाव दें, ताकि इसे बेहतर बनाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *