Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, ०7 मई 17

लम्बे समय से भाजपा की राजनीति में सक्रिय नेताओं के लिए गोविंदाचार्य और संजय जोशी अनजाने नाम नहीं हो सकते हैं। एक समय भाजपा की राजनीति में इन दोनों को बेहद रसूखदार माना जाता था लेकिन दोनों के साथ ऐसी घटनाएं हुईं जिसके बाद दोनों ही भाजपा से दूर चले गए। भाजपा की आंतरिक राजनीति में इन दोनों की नेताओं का कोई तोड़ नहीं था पर दोनों एक ही भूल कर बैठे, जिसका दुष्परिणाम वे आज तक भुगत रहे हैं।
ऐसा नहीं कि इन घटनाओं को जानने के बाद भाजपा या उसके अनुषांगिक संगठनों के नेताओं ने इन सबसे तौबा कर ली हो। इन दिनों सोशल मीडिया में एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने सत्ता से जुड़े लोगों की नींद उड़ा रखी है। तस्वीर में एक नौजवान एक युवती के साथ बेहद उत्तेजक स्थिति में है। इस नौजवान के बारे में बताया जाता है कि वह नॉर्थ-ईस्ट का रहने वाला है, जिसका लालन-पालन संघ से जुड़े एक बड़े व प्रभावशाली नेता कर रहे हैं। बचपन से ही वह उनके साथ रहता है। वैसे भी संघ में नौजवानों को सहायक बनाने की परम्परा रही है। संघ से जुड़े यह नेता अभी एक निगम में बड़े पदाधिकारी हैं और सत्ता व संगठन में खासा रसूख रखते हैं।
दरअसल यह उत्तेजक तस्वीर गोवा के एक होटल की है, जहां मंत्रालय में काम करने वाले दो कर्मचारियों के साथ यह नौजवना एक युवती को लेकर गया था। युवती रायपुर के एक निजी विश्वविद्यालय की छात्रा बताई जा रही है। चोखेलाल के पास यह तस्वीर है, जिसे देखकर बड़ी सहजता से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सत्ता के ग्लैमर में यह युवती उस नौजवान के चंगुल में फंस गई है। यह पहला मौका नहीं है जब संघ से जुड़े इस बड़े नेता के दत्तक पुत्र से ऐसी हरकत की है। दो-चार महीने पहले ही राजधानी पुलिस ने उसे नशे में धुत्त एक युवती के साथ आधी रात को सड़क पर हंगामा करते हुए पकड़ा था। थोड़ी ही देर में नौजवान के रसूख का पता चल गया, जिसके बाद मामले को रफा-दफा किया गया। किसी को कानों-कान खबर नहीं होने दी गई पर युवती के पिता उस नेता के पास पहुंच गए और शादी के लिए दबाव बनाने लगे। उन्हें भी डरा-धमकाकर भगा दिया गया।
भाजपा से जुड़े नेता उन बातों से तौबा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनका चाल और चरित्र प्रभावित होता है। सत्ता में एक दशक से अधिक गुजारने के बाद पार्टी के अधिकतर नेता और उनके गुर्गे वे सभी शौक करने लगे जिन्हें सामंती कहा जाता रहा है। भाजपा में यह व्यवस्था है कि सत्ता और संगठन में संतुलन बनाने के लिए आरएसएस के एक बेहद जिम्मेदार पदाधिकारी हो संगठन महामंत्री बनाया जाता है। इसके लिए एक ही शर्ते है कि उसे अविवाहित होना चाहिए। छत्तीसगढ़ में भी इस परम्परा का पालन किया गया। यह बात अलग है कि कतिपय शिकायतों के बाद उस संगठन महामंत्री को हटाना पड़ा, जिसके बाद सरकार ने उसे एक निगम का पदाधिकारी बनाकर खुश करने की कोशिश की। पर बात यहीं खत्म नहीं होती। कहानी की शुरुआत तो अब होगी।
अब सवाल यह किया जा सकता है कि इसमें संगठन महामंत्री रहे संघ के उस नेता की क्या गलती है तो जवाब यह है इस नौजवान को बचपन से लेकर अब तक पालने-पोसने के बाद उसने इस तरह की हरकत की तो इसके लिए संरक्षण किसका है। बिना संरक्षण के इस तरह किसी युवती को बहला-फुसलाकर गोवा ले जाना क्या आसान काम है? शायद नहीं क्योंकि अगर यही कृत्य कोई सामान्य व्यक्ति कर देता तो शायद वह अब तक सीखचों के पीछे होता पर यहां तो मामला सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े एक प्रभावशाली नेता का है। संविधान में तो उन्हें यह सब करने की अघोषित आजादी मिली हुई है। पार्टी में पारदर्शिता और शुचित की बात करने वालों के लिए यह तस्वीर एक बड़ी चुनौती है कि वे कार्रवाई करें वरना उन्हें जवाब देना चाहिए कि कमीशनखोरी पर पार्टी के एक सामान्य कार्यकर्ता ने जब एक फोटो वायरल की तो उस पर कार्रवाई क्यों की गई। समानता व शुचिता होना ही नहीं दिखना भी चाहिए।

चोखेलाल
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