Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, ०9 मई 17

यह तो वेद-पुराणों में लिखा है कि अगर गणपति की पूजा कर ली गई तो यह मान लिया जाता है कि 33 करोड़ देवी-देवताओं की पूजा कर ली गई है। इसी तरह छत्तीसगढ़ में माना जाता है कि भाई साहब के दरबार में माथा टेके बिना सत्ता सुख नहीं पाया जा सकता है। पिछले दस सालों में हर दो-चार महीनों में यह खबर आती है कि प्रदेश में नेतृत्व बदलने की तैयारी चल रही है। ऐसी खबरें भाजपा के उन नेताओं की महत्वाकांक्षाओं को बढ़ा देती है, जो मुख्यमंत्री निवास में रहने का सपना देखते रहते हैं। लेकिन यह उनका दुर्भाग्य ही है कि हर बार उनके सपने टूट जाते हैं।
कहा जाता है कि असफलता बताती है कि सफलता के लिए ईमानदारी के साथ कोशिशें नहीं की गई हैं इसलिए भाजपा के कुछ नेता अभी से इस कोशिश में लग गए हैं कि अगर भाजपा को चौथी बार सरकार बनाने का जनादेश मिलता है तो वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अपना दावा ठोंक सकें। धमतरी में रविवार को कार्यालय उद्घाटन के मौके पर आमंत्रित अतिथियों को देखकर तो यही लग रहा था कि वहां के विधायक-मंत्री भाई साहब को हर तरह से प्रभावित करने में लगे थे ताकि अगली बार मौका मिलने पर वे पिछड़ा वर्ग का कॉर्ड फेंक सकें।
प्रदेश में भाजपा के अनेक दिग्गज नेता हैं। मुख्यमंत्री हैं, प्रदेश अध्यक्ष हैं, संगठन महामंत्री हैं और इन सबसे ऊपर पार्टी के प्रभारी महासचिव हैं परंतु इन सबको किनारे करके धमतरी में भाई साहब को बुलाया गया और उतने ही आदर और सम्मान के साथ मैडम को भी आमंत्रित किया गया जबकि मैडम यह अच्छी तरह जानती हैं कि जिस मंत्री ने उन्हें बुलाया है वह कभी भी उनका नहीं हो सकता क्योंकि दुर्ग जिले की लड़ाई में वे जिनके खिलाफ हैं, वह इस मंत्री का करीबी दोस्त है। वैसे धमतरी के इस मंत्री के बारे में सभी जानते हैं कि वह अपने फायदे के लिए बरसों पुरानी दोस्ती को दांव पर लगाने में पीछे नहीं हटने वाला है।
बहरहाल धमतरी में हुए कार्यक्रम की खूब चर्चा हुई। सोशल मीडिया में ऐसी तस्वीरें वायरल की गईं, जिसमें मंत्री भाई साहब और मैडम के करीब दिख रहे हों। यानी उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की जमीन तय करने की पूरी कोशिश की गई परंतु ऐसा करने वालों को अब तक हुए चुनावों के परिणामों पर नजर जरूर डाल लेनी चाहिए। रिकॉर्ड बताता है कि इस मंत्री ने कभी भी लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीता है। कभी कुरुद और कभी धमतरी से चुनाव लडऩे वाले इस मंत्री के बारे में कहा जाता है कि कुर्सी पर बैठते ही इसका आचार-विचार व व्यवहार बदल जाता है। पार्टी के जो कार्यकर्ता दुर्दिनों में उसके साथ होते हैं, कुर्सी मिलते ही उन कार्यकर्ताओं की हैसियत नौकरों से बदतर हो जाती है। केवल जातीय समीकरण के कारण यह मंत्री अब तक दो बार चुनाव जीता है लेकिन मंत्री बनते ही उसके नाम के साथ इतने विवाद जुड़ गए कि भाजपा नेतृत्व को भी उसको मंत्री बनाने का अफसोस होने लगा।
खैर पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेताओं को सुपरशीट करके भाई साहब और मैडम को अपने जिले के कार्यक्रम में आमंत्रित करके मंत्री ने जो कूटनीति की है, उसकी चर्चा बड़े नेताओं के बीच होने लगी है। हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर इस मंत्री के विवाद की कोई खबर अगले कुछ दिनों में मीडिया या सोशल मीडिया में आ जाए क्योंकि भाजपा की यही रणनीति है कि आगे बढऩे वाले किसी भी नेता के पैर काटकर उसे बौना बनाने में क्षणभर की देर नहीं लगाई जाती। बृजमोहन अग्रवाल, अमर अग्रवाल, प्रेमप्रकाश पाण्डेय, रमेश बैस, सोहन पोटाई, करुणा शुक्ला, देवलाल दुग्गा जैसे कई नाम इस सूची में शुमार हैं। अब देखना होगा कि भाई साहब और मैडम की यह फील्डिंग उस मंत्री को कहां तक ले जाती है। इतना तो तय है कि इस कार्यक्रम के बाद वह मंत्री अपने मित्र मंत्रियों के करीबियों की सूची से जरूर हटा दिया गया होगा।

                                    चोखेलाल
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