Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, 13 मई 17

सभी को पता है कि शेरा फिल्म स्टार सलमान खान का बॉडी गॉर्ड है। वह सिर्फ बॉडी गॉर्ड ही नहीं बल्कि सलमान खान का राजदार भी है। कमोबेश यही स्थिति छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री व मंत्रियों की है। जिस तरह राक्षस की जान तोते पर रहने की कहानी बचपन में पढ़ी थी, वैसी स्थिति यहां भी हैं। मुख्यमंत्री व मंत्रियों की जान उनके निज सहायकों पर बसती है।
पिछले साल सामान्य प्रशासन विभाग ने एक परिपत्र जारी कर कहा था कि मंत्रियों के निज सहायकों की नियुक्ति शासन करेगा और इसके लिए पूरी जांच-पड़ताल की जाएगी। इस परिपत्र का मंत्रियों ने जमकर विरोध किया और मुख्यमंत्री से कहा कि उन्हें अपनी पसंद का निज सहायक ही चाहिए क्योंकि वे क्षेत्र के लोगों व समस्याओं को अच्छी तरह समझते हैं। सच तो यह है कि निज सहायक ही जानते हैं कि मंत्री के लिए कहां-कहां से वसूली करनी है और किस तरह खपाना है।
निज सहायकों का मामला अभी इसलिए फिर से गरम है क्योंकि पिछले दिनों राज्य वनौषधि बोर्ड के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह के निज सहायक राहुल सिंह की घिनौनी करतूत सामने आई है। इसके बाद निज सहायकों के बारे में जानकारियां आनी शुरू हो गई हैं। निज सहायकों के बारे में जानकारी रखने वालों का कहना है कि अधिकतर मंत्रियों के निज सहायकों ने बकायदा एक गैंग बना रखा है, जो अपने-अपने मंत्रियों से ऐसे काम करा लेते हैं जिसको करा पाना किसी अधिकारी के लिए संभव नहीं है। एक मंत्री का निज सहायक दूसरे मंत्री के निज सहायक से काम कराता है और यह क्रम लगातार चल रहा है।
दरअसल अधिकतर मंत्रियों व संगठन के पदाधिकारियों के पास ऐसे निज सहायक हैं जो एक ही स्कूल से पढ़क निकले हैं और सभी का काम यहां के लोगों की मदद करना नहीं बल्कि पैसा कमाना है। चूंकि वे दूसरे प्रांतों से आकर यहां नौकरी कर रहे हैं इसलिए उनकी इस प्रदेश के लोगों या पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति कोई सीधी जिम्मेदारी नहीं है।
इन निज सहायकों को सूर्या फाउण्डेशन नामक एक स्वयंसेवी संगठन प्रशिक्षण देता है, जिसके सम्बंध भाजपा के बड़-बड़े नेताओं के साथ हैं। इस फाउण्डेशन से प्रशिक्षित युवकों को निज सहायक बनाए जाने के लिए दिल्ली से भाजपा नेता सिफारिश करते हैं। दर्जनों युवक यहां मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं, जिन्हें सरकार के गुप्त कामकाजों की भी जानकारी होती है। इनका भौतिक सत्यापन किए बिना ही काम पर रख लिया जाता है परिणामस्वरूप राहुल सिंह जैसे निज सहायक निकलते हैं, जिससे पूरी पार्टी को शर्मसार होना पड़ता है। मंत्री भी इन बाहरी नौजवानों को निज सहायक बनाने के लिए उत्साहित रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बाहरी नौजवान अगर उनके कुछ राज जान भी लिया तो स्थानीय स्तर पर कोई नुकसान नहीं होगा। इसलिए वे इन बाहरी नौजवानों पर भरोसा करते हैं और जितने की अनैतिक कार्य करते हैं, उसमें इनको ही सामने रखा जाता है।
बहरहाल राहुल सिंह का मामला सामने आने के बाद सरकार एक बार फिर निज सहायकों को लेकर गंभीर हो गई है क्योंकि अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। दो-चार मंत्रियों के निज सहायकों के अगर इसी तरह के किस्से सामने आ गए तो भाजपा की भारी किरकिरी होगी इसलिए संगठन के माध्यम से मंत्रियों तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि बाहरी निज सहायकों को धीरे-धीरे बाहर का रास्ता दिखाया जो जैसा कि रामप्रताप सिंह ने राहुल सिंह के साथ किया है।

                                    चोखेलाल
——————
आपसे आग्रह: कृपया चोखेलाल की टिप्पणियों पर नियमित रूप से अपनी राय व सुझाव दें, ताकि इसे बेहतर बनाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *