Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, 19 मई 17

प्रदेश के गृहमंत्री और उनके कार्यालय में काम करने वालों को यह भले न पता हो कि किस जिले के पुलिस अधीक्षक या अन्य कोई बड़ा अधिकारी बदल गया है पर इस बात की खबर जरूर रहती है कि किस विभाग में किराए के लिए वाहनों की जरूरत है। गृहमंत्री के कार्यालय से वाहनों के किराए का काम पूरी रफ्तार से किया जाता है। अगर वाहनों को किराए पर लेने का प्रस्ताव देने वाला गृहमंत्री का करीबी हो तो भला किस विभाग या अफसर की मजाल है कि वह इनकार कर दे।
यहां एक बार फिर पीए (निज सहायक) बनाने का कारखाना चलाने वाला सूर्या फाउण्डेशन विवादों में है। राज्य वनौषधि बोर्ड के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह के निज सहायक राहुल सिंह ने जो गुल खिलाया, उससे प्रदेश भाजपा और उसके नेता शर्मसार हैं। यह राहुल सिंह उसी सूर्या फाउण्डेशन का प्रॉडक्ट है, जहां से निकला एक अन्य नौजवान गृहमंत्री के कार्यालय में बैठकर वाहनों को किराए में देने के काम में मशगूल है। यह काम जिस तरीके से किया जा रहा है उससे यह साबित होता है कि इसमें या तो गृहमंत्री की सहमति है या फिर वे सबकुछ जानकर अनजान बैठे हैं। गृहमंत्री के बंगले से निकले आदेश से प्रदेश में बड़ी संख्या में प्राइवेट वाहन सरकारी विभागों में किराए पर चल रहे हैं और दिलचस्प बात यह है कि इन सबके किराए बाजार से बहुत अधिक हैं।
सवाल यह उठता है कि प्रदेश के मतदाताओं ने क्या इसलिए भाजपा को तीसरी बार सत्ता सौंपी थी कि मंत्रियों के बंगले से व्यवसाय किया जाए। एक मंत्री अपने एक पार्षद समर्थक को प्रिंटिंग से लेकर नाली-सड़क निर्मा के ठेके देता है तो एक मंत्री ने तो कमीशन वाले हर काम के लिए एक वैतनिक सहयोगी रख लिया है जो स्कूल शिक्षा व आदिमजाति कल्याण विभाग में होने वाली हर खरीदी को अपने लोगों को देता है और बदले में तीस प्रतिशत तक कमीशन मंत्री के पास पहुंचता है। इसी तरह एक मंत्री के बंगले से उसके सहयोगी स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हर वस्तुओं की खरीदी पर पूरी रुचि लेते हैं और बड़ी-बड़ी मशीनों की डील वहीं से होती है।
मुख्यमंत्री भले ही मंत्रियों से आग्रह करते रहें कि वे एक साल के लिए कमीशन लेना बंद कर दें परंतु मजाल है कि मुख्यमंत्री के इस आग्रह के बाद किसी मंत्री ने अपने किसी अफसर या सहयोगी से कड़ाई के साथ यह कहा हो कि अगर कमीशनबाजी की शिकायत मिली तो यह अंतिम शिकायत होगी। कमीशन बंद करने के लिए कसावट व इच्छाशक्ति की जरूरत है जो यहां के मंत्रियों में तो नहीं दिखती। अफसरों का कहना है कि कमीशन लेने के लिए मंत्री उन्हें विवश करते हैं। अगर उनके लिए बीस प्रतिशत कमीशन मांगेंगे तो खुद के लिए पांच प्रतिशत तो जरूर मांगेंगे। कमीशन खोरी का ही परिणाम है कि पार्टी के अंदर व्यभिचार बढ़ा है अन्यथा क्या रामप्रताप सिंह के निज सहायक की इतनी हिम्मत होती कि वह लड़कियों को लेकर फाइव स्टॉर सुविधाओं के साथ गोवा में मौज-मस्ती करता। क्या गृहमंत्री के बंगले से उनके सहयोगी (सूर्या फाउण्डेशन प्रॉडक्ट) खुले आम वाहनों को किराए पर देने का काम करते और इसके एवज में सरकारी विभागों से बड़ी रकम वसूलते।
यह सब रोकने के लिए सरकारी नुमाइंदों को सामने आना होगा। कार्यप्रणाली में पारदर्शिता व शुचिता दिखानी होगी, जिसकी बातें भाजपा करती रही है। सच्चाई यह है कि प्रदेश में पॉवर गेम चल रहा है और सूर्या फाउण्डेशन से निकले तथाकथित निज सहायक प्रदेश की फिजा खराब कर रहे हैं। इसकी सीधा असर राज्य सरकार व भाजपा संगठन पर पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में भाजपा नेताओं को अपने निज सहायकों की कार्यशैली की समीक्षा करनी चाहिए और इससे पहले कि राहुल सिंह की तरह कोई बड़ा बवंडर सामने आए, उनके बारे में फैसला कर लेना चाहिए। यह परिवर्तन भाजपा कार्यालय से लेकर मंत्रियों के बंगले तक दिखना चाहिए वरना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि अगला चुनाव मोबाइल (सोशल साइट्स) पर आधारित रहेगा। तो फिर वह दिन दूर नहीं जब चुनाव के करीब आते ही मोबाइल पर रोज इन निज सहायकों के कारनामों की गरमा-गरम खबरें रहेंगी और भाजपा नेता मुंह छिपाते दिखाई देंगे।

चोखेलाल
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