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मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति रायपुर, 2० मई 17

करीब सवा दशक से बे-लगाम नौकरशाही की बात करने वाले राज्य सरकार के मंत्री अब जाते-जाते यह कोशिश कर रहे हैं कि नौकरशाही पर उनकी नियंत्रण हो जाए। हालांकि इसकी शुरुआत अपने उग्र तेवर के लिए मशहूर पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने की पर बहती हुई गंगा पर कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी हाथ धोने की कोशिश की।

लोकसुराज अभियान के तहत यहां-वहां घूम-घूमकर छोटे अफसरों को धमकाने की कोशिश में लगे मंत्रियों को हिम्मत दी ननकीराम कंवर ने, जो अपनी कार्यशाली के कारण मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं। अपराधियों व माफियाओं के खिलाफ उन्होंने जो अभियान चालाया वह सरकार को रास नहीं आया। खासकर लोहा और कोयले का खेल खेलने वाले ननकीराम के निशाने पर रहे। लोहे और कोयले के बड़े खिलाड़ी राज्य सरकार के प्रिय पात्रों में रहे हैं। इन पर सख्त कार्रवाई सरकार को कभी पसंद नहीं आई और ननकीराम कंवर ने इन बसे खिलाफ मुहिम छेड़ रखी थी। सरकार को मुश्किल में डालने वाले इस मंत्री को धीर-धीरे किनारे किया गया और भाजपा का यह पुराना नेता आज फिर संघर्ष कर रहा है। आदिवासियों के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले ननकीराम कंवर ही किसी कलक्टर को धमकाने का साहस कर सकते हैं। वर्तमान मंत्री तो बस सिपाही, बाबू और पटवारी तक ही सीमित हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने उन्हें अधिकार नहीं दिया है कि वे किसी राजपत्रित अधिकारी को धमकाएं। मंत्रियों ने भी यह अधिकार लेने की कोशिश नहीं की क्योंकि अगर कोशिश की तो हश्र ननकीराम कंवर की तरह हो सकता है।
बहरहाल सरकार की योजनाओं में ढिलाई करने का आरोप लगाते हुए ननकीराम कंवर ने जिस तरह जिले के कलक्टर को सार्वजनिक रूप से धमकाया, उससे मंच पर बैठे एक आदिवासी मंत्री की रूह कांप गई। हालांकि कलक्टर की छवि तेज-तर्रार अफसर की है परंतु ननकीराम कंवर ने जिन प्रमाणों के साथ अपनी बात कही, उससे कलक्टर निरुत्तर हो गए। ननकीराम कंवर को गुस्सा इसलिए आया क्योंकि कार्यक्रम में कलक्टर गलत जानकारी दे रहे थे। दुखद पहलू यह था कि मंच पर बैठे राज्य सरकार के आदिवासी मंत्री इसे सुन रहे थे। उन्हें तो यह भी नहीं पता चल पाया कि कलक्टर गलत जानकारी दे रहे हैं। उन्हें न अपने विभाग के काम से मतलब है और न ही इसमें उनकी कभी कोई दिलचस्पी रही है। केवल विरासत की बदौलत सत्ता में भागीदार बनकर वे अपने पुरखों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते रहते हैं।
खैर ननकीराम कंवर ने जो तेवर दिखाए, उसका असर राजधानी तक देखा गया। अगले दिन उसी जिले में लोक सुराज अभिया के तहत पहुंचे मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने उसी कलक्टर के सामने ननकीराम कंवर जैसे तेवर दिखाए। हालांकि जो वीडियो फुटेज जारी किया गया है उसमें मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के तेवर ननकीराम कंवर जैसे तो नहीं हैं परंतु उनके समर्थकों ने यह अवश्य प्रचारित किया कि मंत्री ने कलक्टर को फटकारा। सच्चाई कुछ और है। स्थानीय विधायक की कलक्टर के साथ पटरी नहीं बैठ रही है। विधायक मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के स्वजातीय हैं। लोक सुराज अभियान में विधायक भी मंत्री के साथ थे और यह अवसर था जब कलक्टर को नीचा दिखाया जा सकता था। हुआ भी वही। विधायक की मौजूदगी में मंत्री अग्रवाल ने कलक्टर के सामने एक छोटे से अफसर को जमकर फटकार कर माहौल बनाने की कोशिश की और जब कलक्टर अपने अफसर के बचाव में आए तो मंत्री अग्रवाल ने उन्हें बेहद धीमे स्वर में कहा किआप बहस मत कीजिए, मैं जो कह रहा हूं करिए…। विधायक का तो काम हो गया परंतु इस बात की गूंज राजधानी में सुनाई देने लगी है। जनप्रतिनिधियों के इस व्यवहार पर छत्तीसगढ़ आईएएस एसोसिएशन को आपत्ति है। हालांकि सार्वजनिक रूप से तो एसोसिएशन ने कुछ नहीं कहा है लेकिन पूर्व व वर्तमान मंत्रियों की बात मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है। संभव है दोनों को संयमित आचरण करने की हिदायत मुख्यमंत्री की तरफ से मिल जाए।

चोखेलाल
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