Chhattisgarh

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                 8 मार्च 17

क्रिकेट के शौकीनों को अच्छी तरह याद होगा कि जब बरसों पहले भारत के धाकड़ बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के तिहरा शतक जड़ा था, तब उन्हें मुलतान का सुलतान कहा जाने लगा था। इसके बाद सुलतान शब्द लगभग खो गया था, परंतु पिछले साल सल्लू मियां (सलमान खान) सुलतान बनकर अचानक आ गए तो लोगों को यह शब्द याद आ गया, लेकिन छत्तीसगढ़ के लोगों को यह पता नहीं था कि एक सुलतान उनके आसपास भी है, जिसके हवाई जहाज की आवाज रोज सुबह-शाम उन्हें सुनाई देती है।
चोखेलाल ने इस सुलतान की मीमासा की है। दरअसल सुलतान का मतलब राजा होता है, जो अपनी प्रजा की सुख-सुविधाओं का ख्याल रखता है। दरबार-ए-आम लगाकर लोगों की पीड़ाएं न केवल सुनता है बल्कि उनका हरण भी करता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सुलतान की बात ही निराली है। उसे किसी ने सुलतान नहीं कहा बल्कि उसने खुद को ही सुलतान कह दिया। (छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एक शेर पढ़ा, जिसमें उन्होंने खुद को सुलतान बताया)। अब यह बताइए कि सुलतान की तरह मुख्यमंत्री कब दरबार-ए आम लगाते हैं। कभी जनदर्शन के माध्यम से वे दर्शन दे दिया करते थे, लेकिन दिव्यांग नौजवान योगेश साहू के अग्निस्नान करने के बाद यह भी लगभग बंद कर दिया गया। जिलों के दौरों में इस सुलतान से केवल वही लोग मिल पाते हैं, जो स्थानीय प्रशासन तय करता है। हां, उसके दरबार-ए-खास के लोग तय हैं, जिनकी सलाह पर वे राज्य सत्ता का संचालन करते हैं। चाणक्य कह चुके हैं कि अगर आपका सलाहकार कृष्ण की तरह होगा को आप अर्जुन होंगे और नेत्रहीन कौरवों के राजा दुर्योधन के सलाहकार शकुनी थे। राज्य सत्ता को देखकर चोखेलाल के पाठक अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां के सुलतान के सलाहकार कौन हैं।
अब बात होगी सुलतान के काम की तो इतिहास में कहीं भी ऐसे सुलतान का जिक्र नहीं है, जो जमीन या शराब का धंधा करता रहा हो, लेकिन छत्तीसगढ़ के सुलतान ने इतिहास को गुलाटी खिलाते हुए यह सब करना शुरू कर दिया है। जमीन का धंधा (गृह निर्माण मंडल, नया रायपुर विकास प्राधिकरण व रायपुर विकास प्राधिकरण) तो वे कर ही रहे हैं अब उनमें शराब बेचने का शौक चढ़ा है, लिहाजा सभी ठेकेदारों को प्रदेश से भगा दिया है और वे अब खुद बड़े ठेकेदार के रूप में काम करने की तैयारी कर रहे हैं। निश्चित रूप से यह सब काम राज्य सत्ता या सुलतान का नहीं है परंतु लोकतंत्र में बहुमत का आदर होता है औ्र जिसको जनादेश मिलता है पूरे राज्य की जिम्मेदारी होती है, वह उसके आदेश की अनुपालना करे। राज्य के निवासियों को यह अधिकार नहीं होता कि राज्य सरकार के आदेशों की अवमानना करे। ऐसा करने वालों के खिलाफ ताकत दिखाने की परम्परा रही है, जो इस समय छत्तीसगढ़ में फल-फूल रही है।
बहरहाल सुलतान ने अपने बजट में प्रदेश के गरीब परिवारों व नौजवानों को स्मार्ट फोन का सपना दिखाया है। प्रदेश में ऐसे स्थानों की कमी नहीं है, जहां नमक जैसी सामान्य वस्तु नहीं मिलती है। दवाइयों के अभाव में लोग मर रहे हैं। लाश उठाने के लिए कभी चारपाई तो कभी साइकिल के कैरियर का उपयोग कर रहे हैं, वहां स्मार्ट फोन का सपना दिखाना प्रदेश के गरीबों से एक घटिया किस्म का मजाक है, लेकिन सुलतान को तो वाहवाही से मतलब है। उसे तो दिल्ली में नम्बर बढ़ाने से मतलब है। स्मार्ट मोबाइल देने की घोषणा करे दिल्ली में यह साबित करने की कोशिश की जाएगी कि प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ को डिजिटल स्टेट बनाया जा रहा है और दिल्ली वाले, वे तो वही देखेंगे, जो उन्हें सुलतान दिखाएगा।
                                            चोखेलाल
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