Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, ०3 जून 17

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार अद्भुत होने के साथ-साथ जादूई भी है। उसने किसी जादूगर की तरह हवा में डण्डा घुमाया और पूरा प्रदेश शराब कोचियो से मुक्त हो गया, शराब की अवैध बिक्री थम गई। मीडिया में प्रकाशित विज्ञापनों से तो यही संदेश जा रहा है। इस विज्ञापन में सरकार सीना ठोंककर कह रही है कोचियों पर लगाम लगाई जा चुकी है और अवैध शराब का व्यापार खत्म हो चुका है। इस शानदार काम के लिए प्रदेश के मदिरा मंत्री अमर अग्रवाल निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं क्योंकि उनकी ही सरकार जो काम तेरह सालों में नहीं कर पाई, उसे उन्होंने मात्र दो महीनों में कर दिया।
राज्य सरकार कैसा काम कर रही है, इसके बारे में तो अगले साल के अंत तक पता चल जाएगा पर यह बात बिलकुल सच है कि सरकार आत्ममुग्ध है। सरकार चलाने वालों को लगता है कि उनसे बेहतर काम कोई नहीं कर सकता है। उनकी योजनाओं में कोई छेद नहीं है। अगर ऐसा होता तो आज राशन दुकानों में अनाज का पूरा भण्डारण होता, अस्पतालों में दवाइयों के लिए लोग भटकते हुए नहीं दिखते, सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए मारामारी होती, पीने के पानी के लिए लोगों को मीलों तक पैदल नहीं चलना होता और हर हाथ के पास काम होता। चोखेलाल अपने पाठकों से यह जरूर जानना चाहेगा कि क्या ऐसी स्थिति है? केंद्र की भाजपा सरकार से जब कामकाज का हिसाब मांगा जाता है तो यही जवाब मिलता है कि इतने बड़े देश के लिए तीन साल बेहद कम हैं तो सवाल यह उठता है कि देश के छोटे राज्यों में गिने जाने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के लिए भी क्या तेरह साल कम हैं?
बात शुरू हुई थी शराब के अवैध व्यापार के बंद होने व प्रदेश के शराब कोचियों से मुक्ति से। सरकार के वर्तमान दावे से तो यह साबित हो गया कि तेरह साल तक सरकारी संरक्षण में शराब कोचियों का बोलबाला रहा तथा शराब की अवैध बिक्री होती रही। सुप्रीम कोर्ट ने अगर नेशनल हाईवे से पांच सौ मीटर तक शराब दुकानों पर अगर रोक नहीं लगाती तो यह काम अनवरत चलता रहता। यह बात अलग है कि राज्य सरकार ने कई नेशनल हाईवेज को जिला स्तर पर बदल कर सुप्रीम कोर्ट की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की है परंतु केवल दो महीनों में राज्य को शराब कोचियों से मुक्ति व शराब की अवैध बिक्री बंद करने का सरकारी दावा किसी के गले के नीचे नहीं उतर पा रहा है। सब जानते हैं कि सरकार का यह दावा असत्य है।
प्रदेश के छोटे कस्बों या ग्रामीण इलाकों की बात छोडि़ए, राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के किसी भी बड़े शहर में चौबीसों घण्टे मनपसंद ब्राण्ड की शराब उपलब्ध है। मदिरा मंत्री भले आत्ममुग्ध हों लेकिन उन्हें इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए। सरकारी अमला ही शराब उपलब्ध करा रहा है और मंत्रीजी खुद की पीठ थपथपा रहे हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि लिकर लॉबी बहुत सशक्त है और जहां से सरकार सोचना बंद करती है, इस व्यवसाय से जुड़े लोग वहां से सोचना शुरू करते हैं। सरकार के सिस्टम में लीकेज है। अगर ऐसा नहीं होता तो अनाज राशन दुकानों तक पहुंचता और दवाइयों के लिए इस प्रदेश में किसी को भटकना नहीं पड़ता।
मंत्रीजी क्या बता पाएंगे कि क्या किसी जिले के कलक्टर ने रात नौ बजे के बाद जाकर किसी शराब दुकान का भौतिक सत्यापन करने के बाद यह पाया है कि वह बंद है या कलक्टर ने किसी शराब दुकान का औचक निरीक्षण करके स्टॉक का वेरीफिकेशन किया है। किसी को परवाह नहीं है क्योंकि शराब सभी को चाहिए। गरीब तबके से लेकर एलिट क्लास तक के लोगों के लिए शराब जरूरत बन गई है। सरकार भले दावा करे कि प्रदेश कोचियों से मुक्त हो गया है या अवैश शराब की बिक्री बंद हो गई है, सब असत्य बात है। सच्चाई यह है कि शराब की अवैध बिक्री प्रारंभ से ही गैरकानूनी है, कोचियों पर कार्रवाई के प्रावधान पहले से ही हैं और अगर सरकार इस पर अभी कड़ाई कर रही है तो इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा सरकार के शुरू के तेरह सालों में कोचियों व शराब की अवैध बिक्री करने वालों को सरकार का संरक्षण था।
अब सामने चुनाव हैं इसलिए शराबबंदी की दिशा में एक कदम बढ़ाकर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की जा रही है परंतु अब प्रदेश की जनता समझ चुकी है कि यह सरकार सपने दिखाने के अलावा कुछ नहीं कर सकती अन्यथा आज गरीबों के अनाज को लूटने वाले अफसर जेल में होती। महिलाओं के गर्भाशय निकालने वाले व आंखों की रोशनी छीनने वाले सीखचों के पीछे होते। जिस प्रदेश की सरकार उस सड़क को मजबूत नहीं बना पाई, जिस पर जवानों ने अपना खून बहा दिया है, उस सरकार से नेकनीयती की उम्मीद करने बेमानी होगा।
चोखेलाल
——————
आपसे आग्रह: कृपया चोखेलाल की टिप्पणियों पर नियमित रूप से अपनी राय व सुझाव दें, ताकि इसे बेहतर बनाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *