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मुखिया के मुखारी

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इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति             रायपुर, ०6 जून 17

प्रदेश कांग्रेस ने फिर साबित कर दिया कि उसके पास प्रभावशाली रणनीति बनाने वालों का टोंटा है। शायद ही उदाहरण देखने को मिले कि विरोधी दल का अध्यक्ष तीन दिनों के लिए छत्तीसगढ़ प्रवास पर आ रहा है और कांग्रेस उसके स्थान पर राज्य सरकार का विरोध करेगी। प्रदेश कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उसके निशाने पर नहीं हैं। उसके निशाने पर प्रदेश सरकार रहेगी और कमीशनखोरी के मुद्दे पर वह राज्य सरकार को घेरेगी। इस मुद्दे पर कांग्रेस पहले भी राज्य सरकार को घेर चुकी है लेकिन उसे व्यापक जनसमर्थन नहीं मिल पाया।
भाजपा अध्यक्ष शाह इस सप्ताह तीन दिन छत्तीसगढ़ में गुजारेंगे। कांग्रेस के लिए बेहद सुनहरा मौका था कि तेज-तर्रार अमित शाह के सामने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनके मंत्रियों की कलई खोल देती। इससे कांग्रेस का जनाधार बढ़ता और भाजपा में बैचेनी का आलम होता परंतु कांग्रेस ऐसा कुछ नहीं कर पाई। अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा सरकार को घेरने का कांग्रेस ने जो एजेण्डा तय किया है, निश्चित रूप से वह प्रभावहीन साबित होगा। प्रदेश के शहरों में रैलियां करने और नेशनल हाईवे को जाम करने से उसे आम लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ा सकती है। यह तो तय है कि इस विरोध से कांग्रेस को राजनीतिक माइलेज तो नहीं मिलेगा।
दरअसल दिल्ली से लेकर राज्यों तक कांग्रेस कन्फ्यूज है। केरल में कांग्रेस के नेता बीफ पार्टी करते हैं और बीफ खाते हैं वहीं छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी गाय को माता मानते हैं। यह कन्फ्यूजन कांग्रेस की कार्यशैली में भी दिखता है। भाजपा को कभी भी गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि तेरह साल के अपने शासनकाल में उसने कांग्रेस को रोज ही मुद्दे दिए हैं। कभी नक्सलवाद रोकने में असफल तो कभी बड़े-बड़े घोटाले। ताजा मामला प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री रहे राज्य वनौषधि बोर्ड के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह के निज सहायक राहुल सिह का था, जिसने वनौषधि बोर्ड की संविदा में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी को नियमित कराने का झांसा देकर गोवा की सैर कराई और जमकर अय्याशी की। इस पूरे मामले में कांग्रेस और उसका महिला संगठन चुप्पी साधे रहा। किससे क्या मैनेजमेंट किया गया, अब तक बात सामने नहीं आई है।
होना तो यह चाहिए कि प्रदेश कांग्रेस को एक मजबूत रणनीति बनाकर अमित शाह के सामने जाना चाहिए ताकि उन्हें बताया जा सके कि उनकी पार्टी की सरकार हर मोर्च पर असफल है। उन्हें बताना चाहिए कि भाजपा का प्रदेश सरकार को आमजन से कोई वास्ता नहीं है। पूरा सरकारी अमला भ्रष्टाचार के आगोश में डूबा हुआ है और सत्ता संचालित करने वाले भी इससे अछूते नहीं हैं। यही वह छत्तीसगढ़ है, जहां के आईएएस अधिकारिी रिश्वत लेना ही नहीं, सीबीआई को रिश्वत देने का साहस भी रखते हैं। बस्तर से लेकर सरगुजा तक कांग्रेस जहां भी हाथ डालेगी, ऐसा मामला जरूर मिल जाएगा जो सरकार हिलाने के लिए काफी होगा। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार शराब का व्यवसाय कर रही है। खुले आम लोगों को शराब पीने के लिए प्रेरित कर रही है….क्या यही मुद्दा भाजपा सरकार के खिलाफ जनाक्रोश भड़काने के लिए पर्याप्त नहीं है? लेकिन सरकार ने बड़ी चतुराई के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को उनके पारिवारिक जमीन विवाद में उलझाकर इस विरोध की धार को भोथरा कर दिया है। कांग्रेस के पास राजा को मारने का सुनहरा अवसर आया था, लेकिन उनसे अपना निशाना प्यादे पर लगाया है। यह सब कांग्रेस में रणनीतिकारों में कमी व कम सोच के कारण हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस में ऐसा कोई तेज-तर्रार नेता नहीं है, जिसकी दहाड़ से भाजपा के प्रदेश कार्यालय में हड़कम्प मच जाए। अधिकतर नेता मैनेज हो जाते हैं और जो बचते हैं उनकी आवाज में इतना दम नहीं है जिससे महानदी भवन (राज्य सचिवालय)की दीवारों में कम्पन होने लगे।

चोखेलाल
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