Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                 22 मार्च 17

दो रोज पहले हुई कैबिनेट की बैठक में मंत्री पाण्डेय के प्रवचन से सरकार की चूलें हिलने लगी हैं। मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने जिस तरह के तेवर दिखाए, उसको देखकर शराब बेचने की रणनीति बनाने वाले बंगले झांकने लगे हैं और सरकर के अंदरखाने में यह बात कही जाने लगी है कि अगर सरकार को यू-टर्न लेने की जरूरत पड़ी तो ठीकरा मदिरा मंत्री अमर अग्रवाल के सिर पर फोड़ दिया जाएगा।
राज्य सरकार के शराब बेचने के फैसले को अधिकतक मंत्री व प्रदेश के शीर्ष नेता स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। अलग-अलग मंचों पर ये सभी सरकार के इस फैसले का विरोध करते रहे हैं, लेकिन मंत्री अमर अग्रवाल के कहने पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह शराब बेचने पर अड़े हुए हैं। सड़कों पर हो रहे प्रदर्शन से मंत्रियों और भाजपा विधायकों को अपना भविष्य साफ दिखने लगा है क्योंकि खासकर महिलाएं इस फैसले के खिलाफ खड़ी हो चुकी हैं। सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्रदेश में एक वातावरण बन चुका है। हाल ही में होली अवकाश के दौरान अपने क्षेत्रों में गए विधायकों व मंत्रियों को इस विरोध का आभास हो गया और उसके बाद हुई कैबिनेट की बैठक में मंत्री पाण्डेय ने विचारोत्तेक प्रवचन देकर यह कह दिया कि अगला चुनाव जितेना की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री व मदिरा मंत्री को ले लेनी चाहिए क्योंकि प्रदेश में उत्तरप्रदेश की तरह फायरब्राण्ड योगी आदित्यनाथ जैसा कोई चेहरा नहीं है। डॉ. रमन सिंह का जो चेहरा है, उससे प्रदेश के लोग ऊब चुके हैं। इसके अलावा भाजपा के किसी मंत्री या विधायक में यह दम नहीं है कि वह अपने दम पर चुनाव जीत ले।
मंत्री पाण्डेय व अमर अग्रवाल के बीच हुई तीखी बहस के दौरान मुख्यमंत्री की भूमिका एक मूक दर्शक की रही। हालांकि मंत्री पाण्डेय का कुछ देर के लिए मंत्री रमशिला साहू ने साथ अवश्य दिया     लेकिन बाकी मंत्री इसलिए खामोश रहे क्योंकि उन्हें चुनाव हारना मंजूर है पर रमन डॉक्टर को नाराज करना उन्हें मंजूर नहीं है। मंत्री पाण्डेय ने बड़ी ही साफगोई के साथ कहा कि वे जानते हैं कि उनके कहने पर सरकार अपना फैसला नहीं बदलेगी परंतु शराब बेचने के फैसले का विरोध करके वे अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। ऐसा करके वे अपने क्षेत्र की जनता को बता सकते हैं कि सरकार के इस फैसले के साथ वे नहीं हैं। दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर कैबिनेट में होने वाले विवादों को छिपाया जाता है लेकिन इस विवाद को मंत्रियों के खुलकर मीडिया को बताया। कहने का मतलब यह है कि भले ही बैठक में मंत्रियों ने चुप्पी साध रखी हो पर बाहर निकलते ही वे मुखर हो गए और अनौपचारिक रूप से मीडिया को इस विवाद की जानकारी देकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में अपनी भूमिका निभा दी।
कैबिनेट की बैठक में विरोध करने के बाद भी मंत्री पाण्डेय खामोश नहीं रहे। उन्होंने दिल्ली में बैठे पार्टी के शीर्ष नेताओं को इसका जानकारी दी और संभव है कि अगले दो-चार दिनों में वे अपने राजनीतिक मित्र बृजमोहन अग्रवाल, शिवरतन शर्मा, नारायण चंदेल और अजय चंद्राकर के साथ कार्यवाही का पूरी विवरण लेकर दिल्ली जाएं और फिर वहां जो आग लगाई जाएगी, उसकी गरमाहट से राज्य सरकार के ओहदेदार कितना झुलसेंगे यह तो अगले सप्ताह ही पता चलेगा परंतु यह तय है कि तेरह सालों तक तरह-तरह के अच्छे-बुरे काम करने वाली राज्य सरकार पहली बार अपनों को शिकंजे में कसती जा रही है और सरकार की यह जिद कहीं उसके लिए भारी न पड़ जाए।

                                        चोखेलाल
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