Uncategorized

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति रायपुर, 17 जून 17

दूध से मक्खी निकालने वाली कहावते तो सभी ने सुनी होगी परंतु यह होता कैसे हैं इसका उदाहरण राजनांदगांव के भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं से बेहतर कोई नहीं बता सकता है क्योंकि कुछ महीने पहले तक वहां एक मंत्री का डंका बजता था। मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में राजनांदगांव पहुंचकर वह मंत्री इस तरह की दादागिरी करता था कि पार्टी के नेता व कार्यकर्ताओं के साथ मीडिया कर्मी भी उससे त्रस्त हो गए थे।

कहते हैं कि अति का अंत होता ही है और एक दिन सभी के सब्र का बांध टूट गया जब मंत्री ने एक प्रेस कांफ्रेंस में यह जताने की कोशिश की कि उन्होंने भी अतीत में पत्रकारिता की है। कालजयी विद्वान गजानन माधव मुक्तिबोध और पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के शहर के पत्रकार भला मंत्री की इस बात को कहां सुनने वाले थे। तत्काल उन्हें आइना दिखा दिया। बड़े-बड़े मीडिया समूहों का प्रतिनिधत्व करने वाले पत्रकारों ने मंत्री से कहा कि प्रिंटिंग प्रेस को संचालित करना पत्रकारिता में नहीं आता और फिर दसवीं तक पढ़ाई करने वाला कोई भी व्यक्ति किस स्तर का पत्रकार होगा, यह बताने की जरूरत नहीं है। इतना सुनते ही मंत्री के पास अपमानित होने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।
बात यहीं खत्म नहीं हुई। मीडिया के अलावा पार्टी नेताओं ने भी मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राजनांदगांव प्रवास के दौरान पार्टी के जिस कार्यकर्ता के घर जाकर मंत्री उसका नमक खाते थे, उसी को भारतीय युवा मोर्चा में बड़ा पद दिलाने के लिए उन्होंने ताना-बाना बुना, जो पार्टी के स्थानीय नेताओं को रास नहीं आया और उन्होंने उस व्यक्ति को मोर्चा के प्रदेश संगठन में पदाधिकारी बनने से रोकने के लिए पूरा जोर लगाया दिया। राजनांदगांव में पार्टी का हर कार्यकर्ता खुद को मुख्यमंत्री का करीबी मानता है और इसमें बहुत हद तक सच्चाई है। बात मुख्यमंत्री के कानों तक पहुंची। उन्हें बताया गया कि मंत्री किस तरह की दादागिरी कर रहे हैं। उनके वृतांत मुख्यमंत्री के सुनाए, बताए और दिखाए गए। उसके बाद मंत्री का करीबी युवा मोर्चा में पदाधिकारी नहीं बन सका और यहीं से मंत्री की राजनांदगांव के विदाई की स्क्रिप्ट लिखी गई।
कहते हैं कि अब मंत्री राजनांदगांव की तरफ मुंह करके सोते भी नहीं हैं क्यों वहां उन्होंने जिस तरह से जिला प्रशासन को चलाया और अपने स्वभाव के अनुरूप पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं से नौकरों की तरह व्यवहार किया, उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। मुख्यमंत्री ने उन्हें राजनांदगांव से बे-दखल कर दिया। इसके बाद से ही उन्होंने रायपुर में अपने निर्वाचन क्षेत्र में ध्यान लगाना शुरू कर दिया। एक समय मुख्यमंत्री के नाक के बाल माने जाने वाले इस मंत्री से अब सभी ने दूरी बना ली है अन्यथा वह समय था कि पार्टी का कोई बी बड़ा कार्यक्रम होता था या मुख्यमंत्री निवास में कृष्ण जन्माष्टमी का भी कार्यक्रम होता था, पूरी व्यवस्था इसी मुख्यमंत्री के इसी दत्तक पुत्र मंत्री के हाथों में रहती थी लेकिन अपनी विवादित कार्यशैली के कारण इस मंत्री ने अपने साथ सरकार और पार्टी की भी जमकर फजीहत कराई है।
दरअसल प्रदेश भाजपा की गुटीय राजनीति में यह मंत्री उस गुट का माना है, जिसके पास पार्टी के आर्थिक सम्बंधित काम होते हैं। इस गुट का वर्चस्व पार्टी के प्रदेश कार्यालय कुशाभाउ ठाकरे परिसर से लेकर विधानसभा अध्यक्ष के बंगले तक है। संगठन में इस मंत्री के सर्मथकों की भरमार है। अगर पड़ताल की जाए तो सर्वाधिक ठेकेदार व दलाली करने वाले पार्टी के अधिकतर छुटभैये नेताओं के सरपरस्त यही मंत्री माने जाते हैं। मीडिया मैनेजमेंट का काम इसी मंत्री के पास है। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी और यह मंत्री आपसी साठगांठ करके संगठन व सरकार को खूब चूना लगा रहे हैं। मीडिया मैनेजमेंट के नाम पर हर महीने पार्टी के प्रदेश मीडिया विभाग को लाखों रुपए मिलते हैं लेकिन उसे कहां खर्च किया जाता है, इसके बारे में कोई न पूछता है और न कोई बताता है। कहने का मतलब यह है कि यह मंत्री और उसका गिरोह पार्टी को दीमक की तरह खोखला कर रहा है परंतु पार्टी के शीर्ष नेताओं को यह सब नहीं दिख रहा है क्योंकि प्रदेश में अभी भाजपा के पक्ष में बयार बह रही है।
चोखेलाल
——————
आपसे आग्रह: कृपया चोखेलाल की टिप्पणियों पर नियमित रूप से अपनी राय व सुझाव दें, ताकि इसे बेहतर बनाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *