Chhattisgarh Raipur

सीएम बताएं सुभाष मिश्रा अफसर है या व्यवसायी!

रायपुर। शपथपत्र देकर अगर कोई अफसर खुद को व्यवसायी बताए और सरकारी विभाग उसकी पड़ताल किए बिना उसे मान ले तो इसका दोष किसे दिया जाए। बात थोड़ी अव्यवहारिक जरूर लगती है परंतु प्रदेश के रजिस्ट्रार फर्म्स एण्ड सोसाइटी ने एक सरकारी अफसर को व्यवसायी मान लिया और उसकी एक संस्था का पंजीयन भी कर दिया। पंजीयक प्रमाणपत्र देते हुए यह भी नहीं देखा गया कि संस्था का पोस्टल एड्रेस एक सरकारी बंगला है, जहां से संस्था को संचालित करने की बात कही गई है। अब इसमें सीधा सवाल मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से पूछा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष जिस सुभाष मिश्रा से वे मिलते हैं वह सरकारी अफसर है या व्यवसायी।
राज्य में नियम कायदों के उल्लंघन का एक और मामला सामने आया है, जिसमें एक राजपत्रित अधिकारी अपने ही आवास से एक सोसायटी का संचालन कर रहा है और वह स्वयं उसमें अध्यक्ष भी है। यह सिविल सेवा आचरण नियम का सरासर उल्लंघन है फिर भी इस संस्था को शासन से अनुदान भी मिलता रहा है।
राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजना ‘हमर छत्तीसगढ़’ के नोडल अधिकारी सुभाष मिश्रा ने अपने शासकीय आवास के पते का उल्लेख करते हुए रजिस्ट्रार फम्सज़् एंड सोसायटी में एक सोसायटी फरवरी 2015 में पंजीकृत करवाई। आरटीआई से एक्टीविस्ट आशीष देव सोनी को हासिल दस्तावेज बताते हैं कि उन्होंने इसमें अपने शासकीय आवास बी-टाइप सिविल लाइन रायपुर का उल्लेख किया है।
उपजीविका कॉलम में लिखा व्यवसाय
दिलचस्प तो यह है कि रजिस्ट्रेशन के समय दिए जाने वाले दस्तावेज में उन्होंने इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि वे शासकीय सेवक है,बल्कि उपजीविका कॉलम में व्यवसाय लिखा है। यही नहीं इस सोसायटी के 9 सदस्यों में वे स्वयं, उनकी पत्नी, उनकी दोनों पुत्रियां, उनके सगे भतीजे के साथ उनके अभिन्न मित्र जो कि बैंक कर्मी हैं और तीन अन्य लोग शामिल हैं। (देखें फोटो) उपजीविका कॉलम में इन सभी का पेशा व्यवसाय ही दर्ज है, जबकि एक बैंक कर्मी है तो एक अन्य भी शासकीय सेवक है।
खुद ही सोसायटी का अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ डॉट को मिले दस्तावेज बताते हैं कि शासकीय आवास से चलाई जा रही इस सोसायटी के अध्यक्ष भी सुभाष मिश्रा स्वयं हैं, संस्कृति विभाग से जारी एक पत्र में बकायदा उन्हें इस सोसायटी के अध्यक्ष के रुप में उल्लेखित किया गया है। जबकि  छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के नियम 16 (क) (ख) में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी शासकीय सेवक उप नियम (2) के उपबंधों के अध्यध्यीन रहते हुये शासन के पूर्व अनुमोदन के बिना (क) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से कोई कारोबार या व्यापार नहीं करेगा एवं (ख) कोई अन्य सेवा नहीं करेगा / एनजीओ नहीं चला सकता है। वहीं जानकारों की मानें तो शासकीय सेवक ऐसी जगहों की सदस्यता तो अनुमति लेकर ग्रहण कर सकते हैं लेकिन पद नहीं ले सकते हैं, लेकिन सुभाष मिश्रा तो राजपत्रित अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष होते हुए भी इस सोसायटी के अध्यक्ष पद पर हैं।
राज्य शासन ने जानकर भी आंखें मूंदी
उपरोक्त सभी बातें राज्य शासन के आला अधिकारी भी जानते हैं लेकिन वे जानकर भी अनजान बने हुए हैं। सूत्र इसके पीछे कारण यह बताते हैं कि इस महीने रिटायर हो रहे अपर मुख्य सचिव एमके राउत के साथ उनकी करीबी रिश्ते हैं और राउत की सरपरस्ती में वे नाना प्रकार के काम करते रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *