Chhattisgarh India Raipur

सलाखों के पीछे पनप रहा देश भक्ति का जज्बा, कैदी मां के नन्हे बच्चे भी मनाएंगे स्वतंत्रता दिवस

रायपुर। उम्र तीन साल हाथों में तिरंगा, तेज दौड़ लगाकर भागता गोलू (परिवर्तित नाम) अचानक ठिठक गया। सामने की उंची चार दीवारी उसे आजादी का एहसास करने से रोक रही है। कमोबेश यही कहानी रायपुर महिला जेल में बंदी अपनी मां के साथ रह रहे बच्चों की है। मांए विभिन्न गुनाहों में सजा भोग रही है। पर बच्चों में नन्ही उम्र में ही देश भक्ति का जज्बा दिखाई पड़ रहा है। हालांकि जेल प्रशासन बच्चों के स्वतंत्रता दिवस मनाए जाने के लिए पूरी मदद कर रहा है। लेकिन कैदी मां के इन नन्हे देश भक्तों के चेहरे से कुदरती मुस्कान गायब हो गई है।

कैदी मां की आंखे हुई नम

बाहर की दुनिया से अंजान इन मासूम बच्चों ने जेल की चार दीवारी की दुनिया ही देखी है। दीवाली, दशहरा, होली की तरह ही देश के महापर्व स्वतंत्रता दिवस को भी वे यही मनाएंगे। इन बच्चों में ६ साल तक के बच्चे है। गणतंत्र के सही मायने तो ये नही जानते पर किसी त्यौहार की तरह इसे मनाने के लिए तैयारी कर रहे है। इन बच्चों में से ज्यादातर ने इसी जेल की चार दीवारी में ही जन्म लिया है। आंखे खुलते ही बच्चों ने लोहे की सलाखें और चारो तरफ उंची उंची दीवारे देखी है। स्वतंत्रता दिवस मनाने बच्चों का उत्साह देखकर कैदी मांओ की आंखे भी खुशी के आंसूओं से नम हो गई। कैदी मां अपने गुनाहों की सजा के साए से अपने बच्चे को मुक्त कराना चाहती है।

बच्चों को सिखा रहे राष्ट्रगान

तोतली भाषा में जन गण मन गुनगुनाते बच्चे देश भक्ति का जज्बा दिखा रहे है। जेल अधिकारियों के अनुसार जैल में रह रहे बच्चें, देश के महापर्व को मनाए जाने के साक्षी बनना चाहते है। इसके लिए वे जेल के सिपाहियों की मदद से राष्ट्रगान सीख रहे है। इसके साथ ही महिला कैदी भी सास्कृतिक कार्यक्रम की तैयारी कर रही है। मां के साथ ही बच्चे भी रोज अभ्यास करते है। स्वतंत्रता दिवस को मनाने के नाम पर चेहरो पर रौनक आ जाती है।

 

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