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देवादा में महक रही गांधी के आजादी आंदोलनों की सुगंध, गांव में जन्में हैं १४ स्वतंत्रता सेनानी

रायपुर।
दुर्ग के पाटन तहसील में छोटा सा गांव है देवादा। खासियत यह है कि यहां की माटी में देशभक्ति की खुश्बू महकती है। इस वीर भूमि ने महात्मा गांधी के आह्वान पर देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया। अकेले यहां १४ स्वतंत्रता सेनानी जन्में हैं। हालांकि, अब जीवंत यादों के रूप में इनमें से सिर्फ महादेव पांडे ही हैं। लेकिन बापू के शहीद दिवस के मौके पर इनकी वीरगाथाओं को याद करके हर गांव वाला खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

ये हुए स्वतंत्रता सेनानी
यहां छेदी लाल दुबे, रामधीन दुबे, द्वारिका प्रसाद दुबे, राम खिलावन दुबे, बेनी प्रसाद दुबे, दौलत राम साहू, रामलाल वर्मा, चुनमू राम वर्मा, रामेश्वर प्रसाद वर्मा, लखन लाल वर्मा, असवाराम वर्मा, हीरासिंह निर्मल, केजउ कोटवार व महादेव पांडे जैसे वीरांे को जन्म दिया है।

यादों के लिए बना स्मारक
गांव की वीर गाथा महज किस्से-कहानियों तक सिमट नहीं जाए, इसके लिए ग्रामीणों ने यहां शहीद स्थली बनाई है। यहां के चेतन लाल वर्मा, विष्णु प्रसाद, गुलजार वर्मा, जगनू वर्मा, सुरेश शर्मा, बसंत वर्मा, भोला वर्मा ने इसमें एक स्मारक बनाया, जिसमें सेनानी रामाधीन दुबे की मूर्ति की स्थापना की गई। फिलहाल इसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संघ ने अपनी देखरेख में ले लिया है। वीर भूमि होने के कारण इस गांव को गौरव ग्राम भी घाषित किया गया है।

यहां भी हैं वीरांगना
स्वतंत्रता सेनानियों की पत्नियों का देश की आजादी के लिए जज्बा किसी वीरांगना से कम नही था। स्वतंत्रता सेनानी छेदी लाल दुबे के आंदोलन में पग-पग पर साथ निभाने वाली उनकी पत्नि दुलारी बाई कहती हैं, तब आजादी पाने का जुनून सभी के जहन में था। मुझे डर रहता कि इस जंग में मेरी मांग का सिंदूर मिट सकता है, लेकिन देशप्रेम के जज्बे के आगे यह डर बोना साबित हुआ। उम्रदराज होने के बाद भी उनके अंदर देश प्रेम की मजबूत अमिट छाप दिखाई पड़ती है।

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