MANNU CHANDEL

कवर्धा-लॉकडाउन के चलते शराब की सभी दुकानें बंद हैं , लेकिन बावजूद इसके धड़ल्ले से चोरी – छिपे ऊंचे दामों पर शराब की अवैध बिक्री हो रही है । अवैध शराब कारोबारी ब्लैक में लोगों को दस गुने दामों तक शराब बेच रहे हैं । इस तरह की कईं शिकायतें chhattisgarh. co ने समाचार के माध्यम से खुद आबकारी अधिकारियों तक पहुँचाया भी, लेकिन अब इस मामले को गंभीरता से न लेकर अधिकारी सेल्फ आईसोलेशन में है । सरकार ने कोरोना कॉल में शराब की बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है। बावजूद इसके कोई न कोई जुगाड़ लगाकर लोग शराब खरीदने के जतन में लगे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में अंग्रेजी शराब, देशी व महुवा को चोरी-छिपे बेचने के मामले में भी सामने आ चुके हैं, जिनमें पुलिस ने कुछ नाममात्र मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी भी की। लेकिन अब सरकार के नए आदेश को लेकर सुराप्रेमियों में खुशी की लहर है कवर्धा के ग्रीन जोन में होने से लॉक डाऊन के नियमो का पालन करते हुए सरकार 4 मई से शराब दुकाने खोल सकती है।

मध्यप्रदेश से रोज आ रही अवैध अंग्रेजी शराब…
छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश से लगे बॉर्डर में प्रदेश के कुछ बड़े ठेकेदारों शराब दुकाने चल रही है जिसके चलते उन्होंने कवर्धा व कवर्धा के रास्तों को तस्करी का मार्ग बनाया हुआ है जिले के सीमा से संटे गांव पुटपुटा,नेउर,पोलमी,धवाईपनी,
चिलफी,रेंगाखार, दलदली,आमाखोडरा,जामुनपनी के रास्ते बेखौफ तस्करी होती है या वहां शराब सहज ही उपलब्ध है जिसे अपने रिस्क में लाया जा सकता है।

सील तोड़ स्टॉक निकालकर बेचने की आशंका…
chhattisgarh.co ने बार- बार समाचार के माध्यम से आबकारी विभाग को जताया कि सील बन्द ताले को खोल सरकारी दुकानों से ही शराब का स्टॉक निकालकर उसे मुंहमांगे दामों पर बेचा जा रहा है। विभाग के सक्रिय अधिकारियों ने इस मामले को भी अब तक गंभीरता से नही लिया।

जिले में अब तक सील बन्द दुकानों की जांच नही….
लॉकडाऊन के समय जब दुकानों में सील लगा तब अंतिम सिल्क या क्लोजिंग स्टॉक की चेकिंग बीच मे अब तक आबकारी विभाग की जिम्मेदारी अधिकारियों में नहीं की है निश्चित रूप से अगर जिले के समस्त दुकानों की सूक्ष्मता से जांच की जाए तो चौकाने वाले खुलासे हो सकते है।

सफेदपोश व अधिकारियो की है मिलीभगत…
लॉकडाऊन के दौरान शहर में देखा गया है कि कद्दावर मंत्री के करीबी जनप्रतिनिधि के द्वारा बेतहाशा बेख़ौफ़ होकर अवैध शराब बिक्री की गई सब कुछ जानने के बाद भी अधिकारियों ने उसके ऊपर कोई भी कार्यवाही नहीं की निश्चित रूप से इसमें नेताओं व अधिकारियों की मिलीभगत की पुष्टि होती है!

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