नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ वोडाफोन इंडिया की अपील पर दूरसंचार नियामक ट्राई से जवाब मांगा। उस आदेश में सेल्युलर और फिक्स्ड लाइन परिचालकों के बीच एक-दूसरे के नेटवर्क पर कॉल को लेकर लगने वाला शुल्क (इंटरकनेक्शन यूजेज चार्जेज-आईयूसी) नियत करने के लिए अपनाई गई परामर्श प्रया के खिलाफ दायर कंपनी की याचिका खारिज कर दी गई थी। न्यायाधीश एस रवीन्द्र भट्ट और सुनील गौड़ ने इस बारे में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का रख जानना चाहा और मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की।
गौरतलब है कि आईयूसी के तहत वह दूरसंचार कंपनी भुगतान करती है जिसके नेटवर्क से कॉल किया गया है। कंपनी यह राशि उस दूरसंचार कंपनी को देती है जहां कॉल समाप्त होती है। शुल्क फिलहाल दूरसंचार इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क नियमन 2015 के तहत निर्धारित होता है। एकल न्यायाधीश की पीठ ने चार सितंबर को वोडाफोन इंडिया लि. की याचिका खारिज कर दी थी। कंपनी की यह याचिका ट्राई द्वारा जारी आईयूसी पर परामर्श दस्तावेज के खिलाफ थी। याचिका में दावा किया गया था कि अगर डेटा उनके साथ साथ साझा नहीं किया जाता, पूरी परामर्श प्रया ट्राई कानून एवं अन्य कानून के तहत प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here