रायपुर। झीरम में हुए राजनीतिक नरसंहार के पीछे हुए षडयंत्र की जांच की मांग पर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह एक बार फिर तिलमिला गए हैं। उनकी इस तिलमिलाहट पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि अपने शासन काल में तो रमन सिंह ने षडयंत्र की जांच करवाई नहीं और अब जब राज्य सरकार इसकी जांच करना चाहती है, तो वे तिलमिला रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इस तिलमिलाहट के पीछे कुछ तो वजह होगी। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि रमन सिंह जब यह पूछ रहे हैं कि राज्य द्वारा गठित एसआईटी क्या एनआईए और न्यायिक आयोग से बड़ी है, तो वे कांग्रेस के उस आरोप को अंदेखा कर रहे हैं।

एनआईए ने षडयंत्र की जांच की नहीं और न्यायिक आयोग की कार्यसूची में षडयंत्र की जांच है ही नहीं। शुक्ला ने पूछा है कि क्या वजह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद एनआईए की जांच की दिशा बदल गई और षडयंत्र की जांच को छोड़ दिया गया और क्यों रमन सिंह सरकार ने न्यायिक आयोग को षडयंत्र की जांच करने का जिम्मा नहीं दिया? रमन सिंह के बयान पर सवाल खड़ा करते हुए शुक्ला ने पूछा है कि यदि रमन सिंह एनआईए की तरफ़दारी कर रहे हैं तो वे बताएं कि अदालत और अपनी वेबसाइट पर जांच पूरी होने की बात कहने के बाद एनआईए अब किस बात की जांच कर रहा है? एनआईए को फिर से जांच शुरु करने की बात क्यों सूझी? सबूत पेश करने के सवाल पर उन्होंने कहा है कि जांच करने वाली एजेंसी जब मुख्य षडयंत्रकारियों का ही नाम हटा देगी, किसी से बयान ही नहीं लेगी, किसी को गिरफ़्तार ही नहीं करेगी तो सबूत किसके सामने पेश करेगी कांग्रेस? उन्होंने कहा कि रमन सिंह 15 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और वे समझते होंगे कि संवेदनशील मामलों पर सबूत सार्वजनिक तो नहीं किए जा सकते।

अगर उन्होंने केंद्र पर दबाव बनाकर सीबीआई जांच शुरु करवा दी होती तो कई षडयंत्रकारी इस समय जेल की सलाखों के पीछे होते। लेकिन वे तो दो साल जानकारी छिपाकर बैठे रहे। शुक्ला ने कहा है कि अगर रमन सिंह का दामन बेदाग है, उनका मन साफ़ है और वे सच में चाहते हैं कि सच सामने आए तो वे केंद्र सरकार से कहें कि सीबीआई जांच हो ही जाए या फिर राज्य की एसआईटी को जांच करने दिया जाए और एनआईए दस्तावेज़ एसआईटी को सौंप दे। ये सब उनसे न हो सके तो कम से कम रमन सिंह इतना तो करें कि राज्य की जांच में एनआईए के अडंगे बंद करवा दें।

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