गरीबखाना सजाया हमने… मुखिया के मुखारी

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सुनी जो उनके आने की आहट…गरीबखाना सजाया हमने….जी हां. बिलकुल इसी तर्ज पर छत्तीसगढ के विधानसभा भवन को सजाया जा रहा है क्योंकि जिस तरह की बयार बह रही है, वे इस बात की तरफ इशारा कर रही है कि विधानसभा में नए पहुना आने वाले हैं। विधानसभा परिसर में ऐसा कुछ भी नहीं दिखना चाहिए, जिससे पुरानों का एहसास भी हो सके। बाहर से लेकर अंदर तक सभी चीजों को बदला जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि सदन के अंदर मुख्यमंत्री की कुर्सी को अधिक आरामदायक बनाया जा रहा है।
राज्य निर्माण के बाद पहला बार विधानसभा भवन की साज-सज्जा कराई जा रही है। राज्य निर्माण के बाद यह चौथी बार विधानसभा के लिए चुनाव हुए हैं। इससे पहले तीन बार चुनाव हुए और तीनों ही बार भाजपा ने सरकार बनाया। सरकार में वही पुराने चेहरे हुआ करते थे। शायद यही सोचकर विधानसभा प्रशासन ने बदलाव की दिशा में सोचने के लिए अधिक माथा-पच्ची नहीं की क्योंकि विधानसभा प्रशासन जानता है कि पुराने लोगों का काम करने का अंदाज भी पुराना है। उसमें कितना भी नयापन किया जाए, कोई फर्क नहीं पडेगा।
लेकिन इस बात चुनावी बिगुल बजते ही बदलाव की बात हवाओं में तैरने लगी और मतदान का दिन करीब आते-आते प्रदेश की हर दीवार पर परिवर्तन की ईबारत लिख दी गई। हालांकि भाजपा पूरी तरह आश्वस्त है कि वह चौथी बार सत्ता में लौट रही है क्योंकि उसके शानदार बैट्समैन डॉ. रमन सिंह अंतिम गेंद (मतगणना) पर छक्का मारकर अपनी टीम को जिताने के लिए तैयार हैं लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी यह तय कर लिया है कि डॉ. रमन सिंह को इस बार छक्का नहीं मारने दिया जाएगा इसलिए कांग्रेस ने ऐसी फील्ड सजाई है कि वाउण्ड्री लाइन पर उन्हें लपका जा सके। कहने का मतलब है कि ईवीएम पर कडी निगरानी से लेकर जीतने वाले कांग्रेस विधायकों की कडी नाकेबंदी कर दी गई है ताकि वे भाजपा के भ्रमजाल मे ंफंसने से बच सकें।
खैर बात हो रही थी विधानसभा भवन की साजसज्जा की। विधानसभा प्रशासन ने इस बात पूरे भवन पर परिसर की इस तरह साजसज्जा की है कि नई सरकार जब अपना पहला सत्र आयोजित करे तो वहां पहुंचने वालों को यह एहसास हो जाए कि वे नए भवन में आए हैं। खूबसूरत गलीचों के साथ बेहतरीन बगीचा तै

यार किया गया है। मुख्यमंत्री व मंत्रियों के सीलन भर कक्षों को नया आयाम दिया गया है। सदन के अंदर विधायकों के बैठने की व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाया गया है। यहां तक कि पहली बाद विधायक हेल्प डेस्क बनाया जा रहा है ताकि विधायकों को यह पता चल सके कि उनके अधिकार क्या हैं। उन्हें अपने काम किस तरह के कराने हैं। किसकी चिरौरी करनी है और किसको धमकाना है। विधानसभा परिसर का वातावरण ऐसा बनाया जा रहा है, जिससे विधायक अधिकतम समय वहां गुजारने में परेशान न हों। बताया गया है कि इसके पीछे एक बडी सोच है। सत्र का कार्यवाही शुरू होते ही सत्रावसान हो जाता है।
वास्तु के हिसाब से वहां का वातावरण बारी था, जिसके कारण यह दिक्कतें आती थीं। अब वहां वास्तु के हिसाब से रिनोवेशन कराया गया है, जिससे पॉजीटिव एनर्जी का संचार होगा और यह माना जा रहा है कि सत्र पूरे समय तक चलेगा। रिनोवेशन करते समय कम्बल वाले बाबा का भी ध्यान रखा गया है क्योंकि यह कहा गया था कि पिछली सरकार के अंतिम सत्र को दौरान कम्बल वाले बाबा ने अपनी कथित तंत्र विद्या के माध्यम से विधानसभा भवन को बांध दिया है ताकि भाजपा की सरकार चौथी बार बन सके। देखना होगा कि इस विद्या का कितना असर विधानसभा भवन में होता है लेकिन सच्चाई यही है कि अब विधानसभा परिसर में घुसते ही एक

चोखेलाल
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