मशरूम की खेती इन दिनों बहुत लोकप्रिय हो रही है. जिन किसानों भाइयों के पास कम भूमि है वे इसे कमरे या अन्य खाली स्थानों पर उगाकर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. देशभर के किसान हर साल कई हजार टन मशरूम का निर्यात दूसरे देशों को करते हैं.
इसमें अच्छी पैदावार पाने हेतु आपको बहुत ख्याल रखना होता है, अगर आप इसमें मेहनत करते हैं तो फायदा भी काफी ज्यादा होता है.

मशरूम क्या है:

मशरूम एक तरह का पौधा है लेकिन फिर भी इसको मांस की तरह देखा जाता है. मतलब आप इसको शाकाहारी पौधा तो नहीं कह सकते हैं. इसमें अधिक मात्रा में प्रोटीन एवं पोषक तत्व मौजूद होते हैं जैसे की विटामिन डी. यह फफूंद से बनता है और इसके आकार के बारे में कहा जाय तो लगभग एक छत्ते के आकार का होता है.

मशरूम के प्रकार :

अंतराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी लगभग 10000 किस्में हमारी धरती पर मौजूद है. लेकिन अगर व्यापार के नजरिये से देखें तो मशरूम की लगभग 5 किस्में ही मौजूद है, जिनमें से सिर्फ 5 ही किस्में अच्छी मानी जाती है. जिनके नाम क्रमशः बटन मशरूम, पैडी स्ट्रॉ, स्पेशली मशरूम, दवाओं वाली मशरूम, धिंगरी या ओएस्टर मशरूम हैं. इनमें बटन मशरूम सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली किस्म है. कभी-कभी इसको मिल्की मशरूम भी कहा जाता है.

मशरूम बीज की कीमत :

इसके बीज की कीमत लगभग 75 रुपए प्रति किलोग्राम होती है, जो कि ब्रांड और किस्म के अनुसार बदलती रहती है. इसलिए आपको पहले यह तय करना होगा, कि आप किस किस्म की मशरूम को उगाना चाहते है.

मशरूम की मांग :

मशरूम की मांग कई जगहों पर होती है, इसको बेचने के लिए उपयुक्त स्थानों में होटल, दवाएं बनाने वाली कंपनियां आदि आते हैं. इसके अलावा मशरूम का उपयोग अधिकतर चाइनीज खाने में किया जाता है. इसके अन्य लाभकारी गुणों के कारण इसको मेडिकल के क्षेत्र में भी उपयोग किया जा रहा है. इतना ही नहीं इसका निर्यात एवं आयात भी कई देशों में किया जाता है, अर्थात इसको बेचने के लिए बहुत से क्षेत्र मौजूद है.

मशरूम पर आनेवाला खर्च :

इस पर लगाई जाने वाली राशि आपकी क्षमता एवं व्यापार के स्तर के अनुसार हो सकती है. इस व्यापार में बस आपको इसकी देखभाल एवं उगाने के स्थान को बनाने में ही पैसे लगाने पड़ेगें. इसके अलावा कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करने के लिए भी खर्च आएगा. अगर आप छोटा व्यापार शुरू करते है, तो 10000 रुपए से 50000 रुपए तक लगा सकते हैं. वहीं बड़े व्यापार के लिए आप 1 लाख रुपय से 10 लाख रुपए का निवेश करना उचित रहेगा.

मशरूम की खेती करने की प्रक्रिया:

घर पर मशरूम की खेती करने की प्रक्रिया-

इसकी खेती करने के लिए आपको एक कमरे की जरुरत होती है, लेकिन आप चाहें तो लकड़ियों का एक जाल बनाकर भी उसके नीचे मशरूम उगाना आरम्भ कर सकते हैं. बाकी के सभी चरण (स्टेप्स) सभी स्तर के व्यापार के लिए एक जैसे होते हैं जिसको नीचे अच्छे से बताया जा रहा है.

प्रथम चरण – धान और गेहूं के भूसे की मदद से कॉम्पोस्ट खाद बनाना:

मशरूम की खेती करने के लिए खाद की जरुरत होती है, जिसके लिए आप गेहूं या धान के भूसे का उपयोग कर सकते है. इसके लिए आपको भूसे को कीटाणु रहित बनाना होगा. ताकि इसमें मौजूद कीटाणु एवं अशुद्धियाँ दूर हो जाए. ऐसा इसलिए करते है, ताकि मशरूम की फसल को उगने में कोई बाधा ना आये एवं इसके पौधे की वृद्धि एवं इसके गुणों में को अवरोध उत्पन्न ना हो. आपको लगभग 1500 लीटर पानी में 1.5 किलोग्राम फार्मलीन एवं 150 ग्राम बेबिस्टीन मिलाना होता है. इसमें दोनों रसायन या कीटनाशकों को एक साथ मिलाना होता है. इसके बाद इस पानी में 1 कुंटल, 50 किलोग्राम गेहूं का भूसा डालकर अच्छे से मिला लेना होता है. उसके बाद इसे कुछ समय के लिए ढक्कर रखना पड़ता है. जिससे ये खाद या भूसा आपके लिए मशरूम उगाने का माध्यम बनकर तैयार हो जायेगा.

दूसरा चरण – मशरूम की बुवाई :

पहले चरण के बाद इस भूसे को हवा में बाहर कहीं अच्छे से फैला लें, ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि हवा के सम्पर्क में लाकर इसकी नमी को 50 प्रतिशत तक काम किया जा सके. इसके बाद आपको भूसे को बार-बार पलटना पड़ता है. जिसके बाद ये बुवाई करने के लिए तैयार हो जाता है. 16 बाई 18 का एक पॉलिथीन बैग लेकर इसमें परतों के हिसाब से बुवाई करते हैं, जैसे की पहले भूसा उसके ऊपर बीज और इसी तरह से 3-4 परतें बना लेते हैं. ध्यान रहे इस बैग के नीचे दोनों कोने पर छेद कर लें, जिससे बचा हुआ पानी निकल जाये, इतना ही नहीं इस पन्नी के बैग को कसकर बांध लें. जिससे इसमें कहीं भी हवा की गुंजाइस ना रहे. इसके बीज या भूसे का अनुपात हर एक परत में बराबर होना आवश्यक है. हालांकि ये मिल्की मशरूम में ही की जाती है. जबकि ऑरेस्टर मशरूम में मिक्स करने की तकनीकी का इस्तेमाल होता है. मतलब बिना परतों के ही मशरूम के बीज और भूसे को मिला दिया जाता है. बुवाई की प्रक्रिया समाप्त हो जाने के बाद इस पैकेट में कुछ छोटे-छोटे छिद्र कर दिए जाते है. जिससे मशरूम के पौधे बाहर निकल सकें.

मशरूम का रख रखाव :

लगभग 15-17 दिन तक इस फसल को हवा लगने से बचाना पड़ता है, जिसके लिए आप कमरे को पूरी तरह से बंद कर दें. फिर 15-17 दिन के बाद इसी कमरे को खुला छोड़ दे या पंखे का भी इंतजाम कर दें. यहां तक आपको मशरूम की फसल सफेद रंग की नजर आने लगती है.

नमी एवं तापमान :

नमी पर नियंत्रण करने के लिए आपको कभी-कभी दीवारों पर पानी का छिड़काव करना होगा, ध्यान रहे नमी लगभग 70 डिग्री तक की होनी चाहिए इसके बाद आपको कमरे के तापमान पर भी ध्यान देना बहुत जरुरी है. मशरूम की फसल को अच्छे से उगाने हेतु लगभग 20 से 30 डिग्री का तापमान ही ठीक रहता है.

मशरूम के थैले रखने के तरीके :

अपने कमरे में मशरूम की खेती करने के लिए आपको मशरूम वाले थैले को तरीकों से रखना होता है. इसे या तो आप किसी लकड़ी और रस्सी की सहायता से बांध कर लटका दें या फिर एक तरह से लकड़ियों या किसी धातु से पलंगनुमा जंजाल तैयार कर लें जिस पर मशरूम के पैकेट्स आसानी से रख सकें.

कब और कैसे करें कटाई :

मशरूम की फसल अधिकतम 30 से 40 दिनों के भीतर काटने के लिए तैयार हो जाती है. उसके बाद आपको इसका फल दिखाई देने लगता है, जिसे आप आसानी से हाथ से ही तोड़ सकते हैं.

सरकारी मदद:

मशरूम की खेती के लिए सरकार द्वारा ऋण देने की योजनाएं भी बनाई गयी है. https://www.nabard.org वेबसाइट के जरिये आप इस योजना का बारे में और जानकारी ले सकते हैं. आपको एक व्यावसायिक प्रस्ताव बनाकर सरकारी कार्यालय में जाना होगा. आपको पैन कार्ड आधार कार्ड, निवासी प्रमाण पत्र और बैंक खाता की जानकारी वहां देनी पड़ेगी. ऐसा करने से आपको सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी. अगर आप छोटे किसान हैं तो हर एक मशरूम फल के थैले पर 40 प्रतिशत तक एवं सामान्य व्यक्ति के लिए 20 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी.
मशरूम की खेती के लिए लगभग सभी राज्य सरकारें किसानों को सब्सिडी दे रही है . योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा क्रेडिट लिंक्ड बैंक इंडेड आधारित 50% अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लाभ कोई भी इच्छुक कृषक प्राप्त कर सकते हैं .
इस व्यापार में अगर आपको सब्सिडी नहीं चाहिए तो आपको इसका रजिस्ट्रेशन या पंजीकरण करवाने की जरुरत नहीं है.

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