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छत्तीसगढ़ का एक ऐसा स्कूल जहां नहीं होता है राष्ट्रगान

मनेंद्रगढ़। राष्ट्रगान देश के इतिहास व परंपरा को दर्शाता है। इसे खास कर शिक्षण संस्थानों में रोजाना पढ़ाई से पहले राष्ट्रगान गाकर स्कूल की शुरुआत की जाती है, ताकि भावी नागरिकों के मन में उनके देश के प्रति सम्मान व एकजुटता की भावना भरी जा सके। यह अनिवार्य भी है, लेकिन हैरानी की बात है कि कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ में एक ऐसा भी स्कूल है जहां राष्ट्रगान कोई मायने नहीं रखता।

इस स्कूल में रोजाना राष्ट्रगान नहीं होता। यहां पर राष्ट्रगान नहीं गाया जाता। इतना ही नहीं यहां पर सुबह की प्रार्थना भी नहीं होती। सीधे विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठा कर पढ़ाई शुरू करवा दी जाती है। और तो और स्कूल प्रबंधन के इस तुगलकी निर्णय का यहां पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक भी विरोध नहीं कर पाते। ऐसे में सवाल किया उठता है कि आखिर जब स्कूल को राष्ट्रगान में आपत्ति है तो ऐसे में इस स्कूल का संचालन कैसे किया जा रहा है।

मनेंद्रगढ़ विकासखंड में आने वाले ग्राम चौघडा में सेंट पैट्रिक स्कूल संचालित है ।लगभग 5 वर्ष पूर्व इस स्कूल की शुरुआत की गई थी तब से लेकर आज तक इस स्कूल में राष्ट्रगान को लेकर स्कूल प्रबंधन के अपने बनाए नियम चलते हैं। स्कूल प्रबंधन की जब मर्जी होती है तब राष्ट्रगान करवा दिया नहीं तो उनके लिए राष्ट्रगान कोई मायने नहीं रखता।

ऐसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी मनमानी करते हुए इस स्कूल का संचालन आखिर किसके इशारे पर हो रहा है। अगर इस स्कूल में रोज राष्ट्रगान नहीं कराया जा सकता तो क्या इस स्कूल की मान्यता समाप्त नहीं कर देनी चाहिए।

क्यों जरुरी हैं राष्ट्रगान

राष्ट्रगान ऐसा गान होता है जो देश के इतिहास व परंपरा को दर्शाता है इसे खासकर शिक्षण संस्थानों में रोजाना पढ़ाई के पहले जाकर दिन की शुरुआत की जाती है ताकि बच्चों के मन में उनके देश के प्रति सम्मान व एकजुटता की भावना भरी जा सके। बच्चे देश के राष्ट्रगान और देश की परंपरा को जान सके

किताबों में न भारत का नक्शा न तिरंगा

और तो और हैरत वाली बात तो यह है कि इस स्कूल की जो स्टूडेंट बुक बच्चों को दी जाती है उस पूरी बुक में ना तो कहीं भारत का नक्शा है और ना ही कहीं महात्मा गांधी की तस्वीर और नही ऐसा कोई उल्लेख जिससे यह पता चले कि यह स्कूल भारत देश में संचालित हो रहा है और तो और इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में दहशत इतनी कि वह स्कूल संचालक की इस मनमानी का खुल कर विरोध नहीं कर पाते।

किताब और ड्रेस के लिए तय है दुकान 

इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए जो ड्रेस तय की गई है वह शहर की एकमात्र दुकान में मिलती है। जहां अभिभावकों को ऊंची कीमत देकर ड्रेस खरीदना पड़ता है। इसके अलावा इस स्कूल में जो किताबें बच्चों को पढ़ने के लिए निर्धारित की गई हैं उनके लिए भी एक दुकान तय की गई है उसी दुकान में इस पूरी स्कूल की किताबें मिलती है । इस दुकान में बाजार में लगभग 15-20 रु में मिलने वाली किताबें लगभग डेढ़ सौ से 200 रुपए कीमत देकर खरीदनी पड़ती है। और तो और अभिवावक स्कूल की मनमानी फीस चुकाने के लिए भी मजबूर हैं।

वर्जन

स्कूल में राष्ट्रगान न होना गलत है। पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

प्रदीप साहू, एसडीएम

 

हमारे स्कूल में एक दिन राष्ट्रगान और एक दिन स्कूल सांग अल्टरनेट होता है। हम स्कूल संबंधी संभी निर्देशोंं का पालन करते है।

ब्रदर सालोमन, प्राचार्य सेंट पैट्रिक स्कूल

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