Bilaspur Chhattisgarh Mungeli

रंग-बिरंगे पानी पीने को मजबूर बैगा आदिवासी

मुंगेली: जिले के लोरमी वनांचल में बैगा आदिवासियों को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है. आलम यह है कि मजबूरी में वे हैंडपंप से निकल रहे उसी (रंग-बिरंगे) लाल पानी को पीने के लिए मजबूर हो गए हैं. मामला महामाई पंचायत के डंगनिया गांव का है. इस तरह गांव की दशा महीनेभर चले ग्राम स्वराज अभियान की पोल खोलती दिखाई दे रही है. शासन-प्रशासन विकास और स्वराज के लाख दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत तो यह है कि लोगों को पीने का साफ पानी भी नहीं मिल पा रहा है.

आपको बता दें कि महामाई पंचायत के डंगनिया गांव में बैगा आदिवासियों के 30 परिवार निवासरत हैं. यहां पेयजल के लिए 5 हैंडपंप लगाए गए हैं, जिनमें से 3 खराब पड़े हुए हैं और जो दो हैंडपंप सही है उसमें से लोहयुक्त गंदा लाल पानी निकल रहा है.

बैगा आदिवासियों की मानें तो बार बार शिकायत करने के बाद भी पीएचई विभाग इस समस्या के निदान के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है. ऐसा लगता है जैसे उनकी कोई सुध तक लेना नहीं चाहता है. मानों सरकार ने इन बैगाओं को मरने के लिए छोड़ दिया हो, क्योंकि इतने गंदे पानी को पीकर या उससे खाना पकाने से कोई भी गंभीर बीमारी हो सकती है.

वहीं स्वास्थ्य अधिकारी का मानना है कि इस पानी के शरीर में जाने से कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. वहीं पीएचई विभाग के लापरवाह अधिकारी 3 महीने बाद ही परीक्षण कराने की बात ही कह रहे हैं. ऐसे में साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन इन राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के लिए जरा भी चिंतित नहीं है.

दूषित पानी पिलाकर तिल-तिल कर मरने को मजबूर कर रहे हैं जबकि बोतलबंद पानी पीने वाले अधिकारी और इस क्षेत्र के विधायक तोखन साहू ने कुछ दिन पहले इस वनांचल में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान कुएं का पानी पीने का दिखावटी फोटो सोशल मीडिया में डालकर खूब वाहवाही बटोरने का प्रयास किया था.

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