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Chhattisgarh Narayanpur

बेटी ने चुना गलत रास्ता, कराया अपना अंत

नारायणपुर: अबूझमाड़ के धुरबेड़ा और इरपानार के जंगल में छह दिन पहले एंटी नक्सल ऑपरेशन प्रहार-2 के दौरान मारे गए छह में से चार नक्सलियों की शिनाख्त होने के बाद चारो नक्सलियों के शव को सोमवार को दफना दिया गया।

मजिस्ट्रेट के सामने वीडियोग्राफी कराने के बाद पुलिस द्वारा अस्पताल से शवों को निकालकर नगर पालिका के सुपुर्द शवों को आश्रम रोड में दफनाने की कार्रवाई की गई। राजनांदगांव जिले के सीतागांव थाना क्षेत्र के पीरेमेटा गांव की मृत महिला नक्सली कमांडर रूकमी गावडे उर्फ प्रर्मिला गावड़े के पिता मानसाय गावड़े और छोटा भाई प्रेम सिंह गावड़े अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद रहे।

अंतिम संस्कार के दौरान पिता और भाई के आंखें डबडबाई रही। अंतिम सस्कार के बाद नईदुनिया से चर्चा में मानसाय गावड़े ने कहा कि चाहे कोई कुछ भी बोले मैं तो एक पिता हूं और बेटी की मौत का दर्द तो मुझे पूरी उम्र रहेगा।

बेटी ने चुना गलत रास्ता चुन कराया अपना अंत

मानसाय गावड़े ने कहा कि तेरह साल पहले उसकी बेटी ने नक्सलपंथ का गलत रास्ता चुना था जो उसकी अंत का कारण बन गया। रूंधे गले से उन्होने कहा कि मेरी बेटी के मौत से अब पूरा खेल खत्म हो गया है। अब पुलिस हमारे गांव नहीं आएगी और न ही हमारे साथ गांव के लोग परेशान होंगे ।

उन्होंने बताया कि हमारे गांव से सिर्फ दो लकड़ी ने नक्सलवाद का दामन थामा था, जिसमें एक लड़की आत्मसमर्पण कर चुकी है। दूसरी मेरी बेटी थी जो अब इस दुनिया ने नहीं रही। इन दोनों की तलाश में हमेशा पुलिस गांव आती थी और हमारे साथ पूरे गांव वालों का परेशान करती थी।

कफन-दफन के दौरान नायाब तहसीलदार केतन कुमार भोयर,थाना प्रभारी केके शुक्ला,बुधराम नाग समेत पुलिस कर्मियों के साथ नगरीय निकाय का अमला मौजूद था।

भोज नहीं कराया तो समाज करेगा बहिष्कार

बेटी के मौत का दर्द झेल रहे महिला कमांडर के परिवार को अब बेटी के मृत्यु भोज की चिंता सता रही है। गरीबी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिजनो ने बताया कि उन्हे 9 तारीख को हुई मुठभेड़ में उनकी बेटी के मारे जाने की सूचना मिल गई थी लेकिन उनके पास नारायणपुर आने के लिए रकम नही थी।

जिसके बाद सीतागांव थाना प्रभारी के द्वारा सूचना देकर पांच सौ रूपए दिए गए। जिससे वे बेटी के अंतिम दीदार के लिए पहुंच पाएं । कमांडर के पिता ने बताया कि गांव में मृत्यु भोज कराने का रिवाज है ऐसी स्थिति में भोज कराना आनिवार्य है नहीं तो समाज के द्वारा उनके परिवार का बहिष्कार कर दण्ड लगाया जाएगा।

पांचवी के बाद थामा संगठन का हाथ

मृतका नक्सली कमांडर रूकमी के पिता ने बताया कि मानपुर ब्लाक के प्राथमिक शाला कंदाड़ी में पांचवी तक पढ़ने के बाद उनकी बेटी तेरह साल पहले नक्सली कमांडर विजय के कहने पर नक्सलवाद का हाथ थामकर घर छोड़कर चली गई थी।

जिसके तीन साल बाद वह 12 घंटे के लिए परिजनों से मिलने के लिए एक बार घर आई थी। उन्होंने बताया कि जब वह आई थी तो उनके हाथो में इंसास रायफल थी और उनके साथ छह हथियारबंद नक्सली आए थे। मानसाय ने बताया कि उनके परिवार में तीन पुत्र और एक पुत्री है चारो घर में रहकर खेती किसानी के काम में हाथ बंटाते है।

टीआई ने की आर्थिक मदद

आर्थिक तंगी की मार से जूझ रहे परिजनों की बातों को सुनने के बाद टीआई कमलकांत शुक्ला और बुधराम नाग के द्वारा आर्थिक मदद करते परिजनों को जाने के लिए उनकी बाइक में पट्रोल डलवाया फिर उन्हे रास्ते के खाने-पीने के लिए रकम भी दिए । नक्सलियों के कफन-दफन की कार्रवाई की अच्छे से किए जाने पर परिजनों के द्वारा पुलिस का आभार जताया गया।

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